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0प्र0 सहकारी समिति अधिनियम 1965 के मुख्य बिन्दु

निबन्धक-

राज्य सरकार किसी भी व्यक्ति को राज्य के लिए सहकारी समितियों का निबन्धक नियुक्त कर सकती है।

निबन्धन-

(1) यदि निबन्धक का समाधान हो जाये कि -
(क) प्रार्थना-पत्र अधिनियम तथा नियमों के उपबन्धों के अनुसार है, तो  निबन्धक समिति तथा उसकी उपविधियों को निबन्धित करेगा।

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सहकारी समिति के कौन सदस्य हो सकते हैं- (1) निम्नलिखित के अतिरिक्त कोई भी व्यक्ति सहकारी समिति का सदस्य न होगा, अर्थात-
(क) कोई व्यक्ति जो अपने पर प्रवृत्ति विधि के अनुसार वयस्क हो तथा जो स्वस्थ चित्त का हो और अपने पर प्रघृत विधि के अनुसार संविधा करने के लिए अनर्हित न हो,
(ख) कोई अन्य सहकारी समिति,
(ग) राज्य सरकार,
(घ) केन्द्रीय सरकार,
(ड़) वेयर हाउसिंग कारपोरेशन एक्ट 1962(एक्ट संख्या 58, 1963) के अधीन स्थापित या स्थापित किया गया समझा जाने वाला राज्य गोदाम निगम (वेयर हाउसिंग कारपोरेशन),

1[(ड़ड) भारतीय भागीदारी अधिनियम, 1932 के अधीन रजिस्ट्रीकृत फर्म,
(च) कोई निगमित निकाय, जो किसी अन्य खण्ड के अन्तर्गत न आता हो अथवा निबन्धक ने सामान्य रूप से सहकारी समितियों की या किसी विशेष समिति अथवा समितियों के वर्ग की नाम-मात्र या साधारण सदस्यता के लिए इस आधार पर अनुमोदित किया गया हो कि वह ऐसी समितियों के अथवा ऐसी समिति अथवा समितियों के वर्ष के विकास के लिए उपयोगी है।

सदस्यों के मत

सहकारी समिति के सदस्य को चाहे समिति की पूजी में उसके हित की मात्रा कितनी ही क्यों न हो, समिति के प्रशासन में एक मत (वोट) प्राप्त होगा।
सदस्य बनाना अथवा सदस्यता छोड़ना

(1)  अधिनियम, नियम तथा उपविधियों के उपबन्धों के अधीन रहते हुए किसी व्यक्ति को सहकारी समिति का सदस्य बनाया जा सकता है।
(2) सहकारी समिति का कोई सदस्य, यदि यह समिति का ऋणी न हो या किसी अदत्त ऋण का प्रतिभूत न हो, समिति को कम से कम एक माह का नोटिस देने के बाद समिति की सदस्यता छोड़ सकता है

प्रारम्भिक कृषि ऋण समितियों के लिए सर्वव्यापी सदस्यता

कोई व्यक्ति जो इस अधिनियम, नियमों तथा उपविधियों के अधीन सदस्य बनाये जाने के लिए अर्ह है और किसी प्रारम्भिक कृषि ऋण समिति की सदस्यता के लिए नियत रीति से प्रार्थना पत्र देता है तो यह समझा जायेगा कि वह समिति के कार्यालय में ऐसे प्रार्थना पत्र के प्राप्त होने के दिनांक से ऐसी समिति का सदस्य बनाया गया हैः

सदस्य या समिति का निबन्धक द्वारा हटाना या निकाला जाना

(1) सहकारी समिति, संकल्प द्वारा किसी व्यक्ति को अपनी सदस्यता से ऐसी प्रक्रिया के अनुसार और ऐसे कारणों से तथा ऐसी अवधि के भीतर जो नियत की जाये, हटा या निकाल सकती है।
(2) निबन्धक भी किसी व्यक्ति को सहकारी समिति सदस्यता से हटा या निकाल सकता है-

सहकारी समिति में अन्तिम अधिकार-

इस अधिनियम तथा नियमों के उपबन्धों के अधीन रहते हुए किसी सहकारी समिति का अन्तिम प्राधिकार उसके सदस्यों के सामान्य निकाय की सामान्य बैठक में निहित होगाः
प्रतिबन्ध यह है कि उन परिस्थितियों में जो नियत की जाये, 1[अन्तिम प्राधिकार ऐसे सदस्यों के नियत रीति से निर्वाचित और सामान्य बैठक में समयेत प्रतिनिधियों में निहित होगा

 प्रबन्ध कमेटी

प्रत्येक सहकारी समिति का प्रबन्ध इस अधिनियम, नियमों और उपविधियों के अनुसार संगठित प्रबन्ध कमेटी में निहित होगा, जो ऐसे अधिकारों का प्रयोग और ऐसे कर्तव्यों का पालन करेगी जो इस अधिनियम, नियमों और उपविधियों द्वारा प्रदत्त या आरोपित किये जायें।
सचिव और कृत्य.-

(1) प्रत्येक सहकारी समिति का एक सचिव होगा

(2) सचिव, समिति का मुख्य कार्यपालक अधिकारी होगा
वार्षिक सामान्य बैठक

सहकारी समिति के सामान्य निकाय की एक बैठक सहकारी वर्ष में ऐसी अवधि के भीतर जो नियत की जाये, एक बार होगी -
सहकारी समिति के अधिकारी को हटाया जाना-

 निबन्धक की राय में सहकारी समिति के किसी अधिकारी ने इस अधिनियम, नियमों या समिति की उपविधियों के किन्हीं उपबन्धों का उल्लंघन किया है, या उसका पालन नहीं किया है, या पद धारण करने का अपना अधिकार खो दिया है, निबन्धक समिति से ऐसे अधिकारी को निर्दिष्ट अवधि के भीतर, उसके पद से हटाये जाने के लिए और यदि आवश्यक हो तो उसे उक्त समिति के अधीन तीन वर्ष से अनधिक अवधि के लिए कोई पद धारण करने के लिए अनहित भी करने के लिए कह सकता है, जिसके उपरान्त समिति सम्बद्ध अधिकारी को सुनवाई का अवसर देने के पश्चात् ऐसे आदेश दे सकती है।
सरकार द्वारा सहकारी आन्दोलन को बढावा देना.-

राज्य में सहकारी आन्दोलन को प्रोत्साहन तथा बढावा देना और इस दशा में आवश्यक कार्यवाही करना राज्य सरकार का कर्तव्य होगा।
सहकारी समितियों को राज्य की सहायता देने की अन्य रीतियॉ.-

 राज्य सरकार-
(क) सहकारी समितियों को ऋण या अग्रिम (एडवान्स) दे सकती है,
(ख) सहकारी समिति द्वारा जारी किये गये ऋण-पत्रों के मूलधन के प्रतिदान एवं ब्याज के भुगतान की प्रत्याभूति (गारन्टी) दे सकती है,
(ग) किसी सहकारी समिति को दिये गये ऋणों तथा अग्रिमों के मूलधन के प्रतिदान और ब्याज के भुगतान की प्रत्याभूति दे सकती है, और
(घ) किसी सहकारी समिति को किसी भी अन्य रीति से, जिनमें राज्य सहायताएं भी सम्मिलित हैं, वित्तीय सहायता दे सकती है।

लेखा परीक्षा-

निबन्धक अथवा राज्य सरकार द्वारा नियुक्त कोई व्यक्ति प्रत्येक सहकारी समिति के लेखों की लेखा परीक्षा प्रत्येक सहकारी वर्ष में कम से कम एक बार करेगा।

निबन्धक द्वारा जॉंच.-

निबन्धक स्वतः या उसके लिखित आदेश द्वारा प्राधिकृत व्यक्ति किसी सहकारी समिति के संगठन, कार्य संचालन और वित्तीय दशा की जॉंच कर सकता है।
अधिभार.-

यदि किसी सहकारी समिति की लेखा परीक्षा, जॉंच निरीक्षण अथवा समापन करते समय यह पता चला कि किसी व्यक्ति ने, जिसे इन समितियों के संगठन या प्रबन्ध का कार्य सौंपा गया है या सौंपा गया था अथवा जो समिति के किसी समय अधिकारी या कर्मचारी रहे हों कोई भुगतान इस अधिनियम, नियमों अथवा उपविधियों के प्रतिकूल किया है या कराया है या विश्वासघात करके अथवा जानबूझ कर उपेक्षा करके समिति की परिसम्पत्तियों को हानि पहुचायी है या उक्त समिति के किसी धन या अन्य सम्पत्ति का दुर्विनियोग किया है या उसे कपटपूर्वक रोक रखा है तो निबन्धक स्वतः अथवा कमेटी, परिसमापक या किसी ऋण-दाता के प्रार्थना करने पर उक्त व्यक्ति के आचरण की स्वयं जॉंच कर सकता है ।
त्रुटि सुधार आदेश का निबन्धक का अधिकार.-

यदि लेखा परीक्षा अथवा जॉच अथवा निरीक्षण के परिणाम स्वरूप निबन्धक की यह राय हो कि समिति सुस्थिति रूप में कार्य नहीं कर रही है अथवा उसका प्रबन्ध त्रुटिपूर्ण है तो वह इस अधिनियम के अधीन किसी अन्य कार्यवाही पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऐसा आदेश दे सकता है जिसे वह समिति अथवा उसके अधिकारियों का आदेश में निर्दिष्ट समय के भीतर त्रुटियों को दूर करने के लिए कोई ऐसी कार्यवाही करने का आदेश दे जो इस अधिनियम, नियमों और उपविधियों से असंगत न हो और जो उक्त आदेश में निर्दिष्ट की जाये।

सहकारी समितियों का समापन.-

 यदि जॉच हो जाने अथवा निरीक्षण का लिए जाने के पश्चात् अथवा सहकारी समिति के कम से कम तीन चौथाई सदस्यों द्वारा दिये गये प्रार्थना-पत्र के प्राप्त होने पर, निबन्धक की यह राय हो कि समिति का समापन हो जाना चाहिये, तो वह उसके समाप्ति कर दिये जाने के आदेश दे सकता।
सहकारी समिति के निबन्धक का रदद किया जाना.-

यदि किसी ऐसी सहकारी समिति के सम्बन्ध में जिसे समापित करने का आदेश दिया गया हो, निबन्धक की राय हो कि कोई परिसमापक नियुक्त करने की आवश्यकता नहीं है या यदि किसी सहकारी समिति को जिसके लिए कोई परिसमापक नियुक्त किया गया हो, कार्य समापित कर दिये हों, तो निबन्धन समिति के निबन्धक को रदद करने का आदेश देगा और उस आदेश के दिनांक से समिति विघटित की गई समझी जायेगी और वह निगमित निकाय के रूप में विद्यमान न रहेगी।

 

 

प्रभार का प्रवर्तन  निबन्धक अथवा उसके द्वारा तदर्थ प्राधिकृत उसका अधीनस्थ कोई राजपत्रित अधिकारी, सहकारी समिति के प्रार्थना-पत्र पर और ऋण अथवा शेष भाग के अस्तित्व के सम्बन्ध में समाधान हो जाने पर, आदेश दे सकता है कि किसी सदस्य अथवा भूतपूर्व अथवा मृत सदस्य द्वारा समिति को देय किसी भी ऋण अथवा शेष का भुगतान ऐसी सम्पत्ति को अथवा उसमें किसी ऐसे हित के अन्तर्गत प्रभार के अधीन हो को बेच कर दिया जायेः

 निबन्धक के अभिनिर्णय के विरूद्ध अपील.- (1) निबन्धक द्वारा दिये गये किसी अभिनिर्णय से क्षुब्ध कोई व्यक्ति, उस दिनांक से जब वह अभिनिर्णय उस व्यक्ति को संसूचित किया गया हो, तीस दिन के भीतर न्यायाधिकरण के समक्ष अपील कर सकता है।


 अपीलीय अधिकारी के आदेश का पुनर्विलोकन अपीलीय प्राधिकारी किसी पक्ष के प्रार्थना-पत्र पर, किसी भी मामले में आदेश का पुनर्विलोकन कर सकता है और उसके सम्बन्ध में ऐसे आदेश दे सकता हे जो वह उचित समझेः

 अधिनियम के अधीन अपराध-(1) इस अधिनियम के अधीन अपराध होगा, यदि-
(i) किसी सहकारी समिति की प्रबन्ध कमेटी या उसका कोई सदस्य या अधिकारी निबन्धक या निबन्धक द्वारा तदर्थ यथाविधि प्राधिकृत व्यक्ति द्वारा जो राज्य सरकार द्वारा, निर्दिष्ट पद से नीचे के पद का हो, इस अधिनियम के अधीन उचित कारण के बिना अपेक्षित कोई विवरणी, प्रतिवेदन या सूचना प्रस्तुत करे या जान बूझ कर मिथ्या विवरणी तैयार करे या मिथ्या सूचना दे या समुचित लेखे रखे, या
(ii) किसी सहकारी समिति का कोई अधिकारी,कर्मचारी या सदस्य सहकारी समिति की बहियों, पत्रादि या प्रतिभूतियों की कपटपूर्ण टंग से नष्ट करे, विकृत करे,उनमें परिवर्तन करे, कूटकरण (falsify) करे या उनके नाश विकृति परिवर्तन,कूटकरण के लिए अभिप्रेत करे या किसी समिति के रजिस्टर, लेखा बही या लेख्य में कोई मिथ्या प्रविष्टि रे या करने के लिये अभिप्रेरित करे, या
(iii)  सहकारी समिति का कोई ऐसा अधिकारी या सदस्य जिसके कब्जे में सूचना बहियॉ और अभिलेख हो, लेखा परीक्षा के लिए  राज्य सरकार द्वारा नियुक्त व्यक्ति या उसके द्वारा प्राधिकृत किसी अन्य व्यक्ति को अथवा निबन्ध  के अधीन नियुक्त या प्राधिकृत व्यक्तियों को उचित कारण के बिना उक्त सूचना दे या बहियॉ और पत्रादि प्रस्तुत करे या सहायता दे, या
 

न्यायालय के क्षेत्राधिकार पर रोक- इस अधिनियम में स्पष्ट रूप से की गई व्यवस्था के अतिरिक्त किसी दिवानी या राजस्व न्यायालय को निम्नलिखित के सम्बन्ध में कोई क्षेत्राधिकार प्राप्त होगा-
() किसी सहकारी समिति का या उसकी उपविधियों या उपविधि के किसी संशोधन का निबन्धन,
() किसी प्रबन्ध कमेटी का अवक्रमण अथवा निलम्बन,
() धारा 70 के अधीन निबन्ध को अभिर्दिष्ट किये जाने के लिए अपेक्षित कोई विवाद,
() इस अधिनियम के अधीन दिया गया कोई आदेश या अभिनिर्णय।

 सहकारी समितियों का समामेलन या विलयन का निदेश देने का निबन्धक का प्राधिकार- यदि निबन्धक की यह राय हो कि दो या अधिक सहकारी समितियों का समामेलन या विलयन उनकी शक्ति या उपयोगिता बढ़ाने के लिए आवश्यक या वांछनीय हे तो वह, इस अधिनियम में किसी विपरीत बात के होते हुये भी, उस वित्त पोषण बैंक से, यदि कोई हो, परामर्श करने के पश्चात, जिसकी उक्त समितिय ऋणी है, ऐसी समितियों को एक ही समिति में ऐसे समय के भीतर जिसे वह निर्दिष्ट करे, समामेलित या विलीन होने का लिखित आदे दे सकता है और तदुपरान्त  समितिय  ऐसी समस्त कार्यवाहिय करेगी
किसी सहकारी समिति को दो या अधिक सहकारी समितियों के विभाजित करने का निदेश देने का निबन्धक का अधिकार- यदि निबन्धक की यह राय हो कि लोकहित में या सहकारिता आन्दोलन के हित में यह आवश्यक या सहकारी समिति के अच्छे प्रबन्ध को सुनिश्चित करने के लिए यह वांछनीय कि दो या अधिक समितिय बनाई जाने के लिए किसी सहकारी समिति का विभाजन किया जाना चाहिये तो वह, इस अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी, उस वित्त पोषण बेंक से यदि कोई हो, परामर्श करने के पश्चात जिसकी उक्त समिति ऋणी है, ऐसी समिति का दो या अधिक समितियों में ऐसे संघटनों, परिसम्पत्तियों, दायित्वों, अधिकारो, कर्तव्य और आभारों के साथ, जो आदेश में निर्दिष्ट किये जाये विभाजित होने का लिखित आदेश दे सकता है और तदुपरान्त उक्त समिति ऐसी समस्त कार्यवाहीय करेगी

 वसूल की जाने वाली परिसम्पत्तियों का बट्टे खाते में डाला जाना- सहकारी समिति निबन्धक के पूर्व अनुमोदन से, ऐसी सम्पत्तियों को बट्टे खाते में डाल सकती है जो अशोध्य हों और वसूल की जा सकती हो।

 कतिपय मामलों में सहकारी समिति के संकल्पों को निष्प्रभाव करने या सहकारी समिति के किसी अधिकारी के आदेश को रद्द करने का निबन्धन का अधिकार-निबन्धक-(1) किसी सहकारी समिति की प्रबन्ध कमेटी या उसके सामान्य निकाय द्वारा पारित किसी संकल्प को निष्प्रभाव (annul) कर सकता है;

 कठिनाईयों के निवारण करने का अधिकार- राज्य सरकार समय समय पर अधिसूचना द्वारा, ऐसे आनुषगिक और पारिणामिक आदेश दे सकती है जिसे वह इस अधिनियम या इसके अधीन बनाये गये उपबन्धों के नियमों के अधीन निर्वाचन से सम्बन्धित किसी मामले में किसी कठिनाई को दूर करने के लिए आवश्यक या वांछनीय समझे।