बिन्दु -4

विभाग के क्रियाकलापों को सम्पादित करने हेतु निर्धारित प्राविधान/नार्म 

             अंगीकृत सहकारी अधिनियम 1965 एवं 1968 तथा समय-समय पर राज्य सरकार द्वारा निर्धारित मापदण्डो  को दृष्टिगत रखते हुए विभागीय क्रिया-कलापों का निष्पादन किया जाता है। विभाग द्वारा अपने उददेश्यों की प्राप्ति हेतु चलाये जा रहे कार्यक्रमों के लिए निर्धारित प्राविधान निम्न प्रकार है।
क- अल्पकालीन फसली ऋण:- किसानों को फसल उगाने हेतु पैक्स के माध्यम से दिया जाता है। यह फसलवार खरीफ/रबी के लिए दिया जाता है तथा फसल कटने पर ऋण वापस करना पड़ता है।
अल्पकालीन ऋण के लिए किसानों को अपने क्षेत्र के पैक्स सदस्य बनना होगा। सदस्य बनने के लिए निर्धारित रूपपत्र पर समिति के सचिव के प्रार्थना-पत्र देना होगा, जिसमें प्रार्थी किसान की फोटो, खसरा खतौनी की प्रमाणित नकल तथा रू0 1.00 (एक रूपया) सदस्यता शुल्क एंव कम से कम एक अंश क्रय हेतु रू0 20.00 (रूपये बीस) जमा करना होगा।
सदस्यों को फसली ऋण जिला टेक्नीकल कमेटी द्वारा निर्धारित वित्तमान के अनुसार अंश क-नकदी एवं अंश ख-वस्तु उर्वरक बीज इत्यादि के रूप मे दिया जाता है। अशं क के लिये लाल रंग की चैक बुक एवं अशं ख के लिए हरे रंग की चेक बुक दी जाती है किसान अपनी आवश्यकतानुसार चेक काटकर समिति/बैक से ऋण प्राप्त कर सकता है।
                           अशंधन अ. साधारण सदस्यों को              - लिए जाने वाले ऋण का 1/10
                          ब. लघु एवं सीमान्त सदस्यों को               - लिये जाने वाले ऋण का 1/20
अशंधन के रूप में समिति में जमा करना होगा।
ख- किसान क्रेडिट कार्ड:- किसान के्रडिट कार्ड योजना 01.12.99 से शुरू की गयी है, जिसमें स्वीकृत ऋण सीमा एवं लिए जाने वाले ऋणों का उल्लेख रहता है और इसके अन्र्तगत किसान स्वीकृत ऋण सीमा के अन्र्तगत अपनी इच्छानुसार चाहे जितनी बार ऋण निकाल सकता है।
ग- उर्वरक एंव बीज वितरण:- किसानों को प्रारम्भिक कृषि ऋण समिति पैक्स तथा अन्य सहकारी संस्थाओ के बिक्री केन्द्रो द्वारा बीज उर्वरक डीएपी/एनपीके यूरिया इत्यिादि तथा कृषि रक्षा रसायनों जिंक सल्फट आइसोप्रोटयूरान/ ब्यूटाक्लोर इत्यादि का वितरण किया जाता है।
घ- मूल्य सर्मथन योजना:- किसानों को उनके उपज का उचित मूल्य दिलाने तथा उन्हे शोषण से बचाने हेतु सरकार द्वारा समिर्थित मूल्य पर गेहॅ/धान का क्रय सहकारी समितियों द्वारा किया जाता है।
ड- उपभोक्ता वस्तुओ का वितरण:- उ0प्र0 उपभोक्ता सहकारी संघ, अन्य उपभोक्ता समितियों एवं समितियों के माध्यम से जनता को उचित मूल्य पर दैनिक आवश्यकता की वस्तुओ का वितरण किया जाता है।
च- दीर्घकालीन ऋण:- उ0प्र0 सहकारी ग्राम विकास बैंक द्वारा शाखाओ के माध्यम से सदस्यों को दीर्घकालीन ऋण उपलब्ध कराया जाता है।
दीर्घकालीन ऋण के उददेश्य:-
1. अल्प सिंचाई संयत्र
2. कृषि यंत्रीकरण
3. डेयरी विकास
4. डनलप
5. पशुपालन
6. मुर्गीपालन
7. मत्स्य पालन
8. बागवानी
9. बायोगैस
10. अकृषि क्षेत्र, आटा चक्की/तेल घानी आदि
11. ग्रामीण आवास इत्यादि