धारा-29. प्रबन्ध कमेटी -(1) प्रत्येक सहकारी समिति का प्रबन्ध इस अधिनियम, नियमों और उपविधियों के अनुसार संगठित प्रबन्ध कमेटी में निहित होगा, जो ऐसे अधिकारों का प्रयोग और ऐसे कर्तव्यों का पालन करेगी जो इस अधिनियम, नियमों और उपविधियों द्वारा प्रदत्त या आरोपित किये जायें।
2["(2)(क) प्रत्येक प्रबन्ध कमेटी का कार्यकाल 3[तीन वर्ष] होगा और प्रबन्ध कमेटी के निर्वाचित सदस्यों का कार्यकाल ऐसी कमेटी के कार्यकाल के साथ सहविस्तारी होगा।
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1. अधिनियम सं0 17, 1994 द्वारा बदला गया जो अधिसूचना सं0 2380/-49-1-94-7(94), दिनांक 15.7.94 को प्रवृत्त हुआ।
2. उ0 प्र0 अधिनियम सं0 19, सन् 1998 द्वारा प्रतिस्थापित, जो 9 जुलाई, 19998 से प्रभावी।
3. उ0 प्र0 अधिनियम सं0 46 सन् 2007 द्वारा शब्द पांच वर्ष के स्थान पर दो वर्ष प्रतिस्थापित जो उ0 प्र0 असाधारण गजट भाग-1 खण्ड (क) दिनांक 10 दिसम्बर 2007 को प्रकाशित हुआ (5 सितम्बर 2007 से प्रभावी)।


(ख) खण्ड (क) के उपबन्ध ऐसी किसी प्रबन्ध कमेटी, जो 1[उत्तर प्रदेश सहकारी समिति (द्वितीय संशोधन) अधिनियम, 2007 ] के प्रारम्भ के दिनांक को अस्तित्व में है, और ऐसी कमेटी के निर्वाचित सदस्यों, पर भी लागू होंगे।]"
2[(ग) किसी प्रबन्ध कमेटी का कार्यकाल, जिसमें खण्ड (ख) में निर्दिष्ट अधिनियम के प्रारम्भ के दिनांक को या उसके पूर्व अपने गठन के दिनांक से दो वर्ष की अवधि पूरी कर ली है, और उसके निर्वाचित सदस्यों का कार्यकाल ऐसे प्रारम्भ पर समाप्त हो जायेगा।
3[(3) किसी सहकारी समिति की प्रबन्ध कमेटी का पुर्नगठन करने के लिए निर्वाचन, निबन्धक के अधीक्षण नियन्त्रण और निदेशों के अधीन विहीत रीति से प्रबन्ध कमेटी के कार्यकाल की समाप्ति के कम से कम पन्द्रह दिन पूर्व पूरा कर लिया जायेगा और इस प्रकार निर्वाचित सदस्य उस प्रबन्ध कमेटी के स्थान पर जिसका कार्यकाल उपधारा (2) के अधीन समाप्त हो गया है स्थान ग्रहण करेंगेः
प्रतिबन्ध यह है कि जहनिबन्धक का यह समाधान हो जाता है कि ऐसी परिस्थितियॉ विद्यमान हैं जिनके कारण उसे नियत किये गये दिनांक को निर्वाचन कराया जाना कठिन है वह वह निर्वाचन को अस्थगित कर सकता है और निर्वाचन के संदर्भ में समस्त कार्यवाहिय सभी प्रकार से नये सिरे से प्रारम्भ की जायेगी।
(4) सहकारी समिति के, यथास्थिति, सचिव या प्रबन्ध निदेशक का यह कर्तव्य होगा कि वह प्रबन्ध कमेटी के कार्यकाल की समाप्ति के चार मास पूर्व निबन्धक को निर्वाचन कराने के लिए अधियाचन और ऐसी समस्त सूचना जिसकी उसके द्वारा अपेक्षा की जाये ऐसी अवधि के भीतर जो उसके द्वारा नियत की जाय, भेजे।
(5) (क) जह किसी कारण से, चाहे वह जो भी हो, प्रबन्ध कमेटी के निर्वाचित सदस्यों का निर्वाचन निर्वाचित सदस्यों के कार्यकाल की समाप्ति के पूर्व नहीं हुआ है या नहीं हो सका है, वह  प्रबन्ध कमेटी, इस अधिनियम या तदधीन बनाये गये नियमों या समिति की उपविधियों के किन्हीं अन्य उपबन्धों में किसी प्रतिकूल बात के होते हुए भी, ऐसे कार्यकाल के समाप्ति होने पर अस्तित्व में नहीं रह जायेगी।
(ख) निबन्धक ऐसे कार्यकाल की समाप्ति पर या समाप्ति के पश्चात्, यथाशीघ्र, अधिनियम के उपबन्धों, नियमों और समिति की उपविधियों के अनुसार प्रबन्ध कमेटी का पुर्नगठन होने तक, समिति के कार्यकलापों का प्रबन्धक करने के लिए प्रशासक या प्रशासक कमेटी (जिसे आगे इस धारा में कमेटी कहा गया है) नियुक्त करेगा, और निबन्धक को समय-समय पर यथास्थिति प्रशासक या कमेटी के किसी सदस्य को बदलने या प्रशासक के स्थान पर कोई कमेटी या कमेटी के स्थान पर प्रशासक नियुक्त करने की शक्ति होगी।
(ग) जह खण्ड (ख) के अधीन कोई कमेटी नियुक्त की जाये, वह  उसके एक सभापति और आठ से अनधिक ऐसे अन्य सदस्य होंगे जिन्हें निबन्धक द्वारा नाम-निर्दिष्ट किया जायेगा और जिनमें कम से कम दो सदस्य सरकारी सेवक होंगे।
(घ) कमेटी की बैठक बुलाने और उसका आयोजन करने की प्रक्रिया, ऐसी बैठकों का आयोजन करने का समय और स्थान, ऐसी बैठकों में कार्य संचालन और उसकी गणपूर्ति के लिए आवश्यक सदस्यों की संख्या ऐसी होगी जैसी निय की जाय।

(ड़) जब तक खण्ड (ख) के अधीन यथास्थिति, किसी प्रशासक या कमेटी की नियुक्ति न की जाय तब तक यथास्थिति, समिति का सचिव या प्रबन्ध निदेशक, प्रबन्ध कमेटी के केवल चालू कर्तव्यों का प्रभारी होगा।
स्पष्टीकरण- जहां पदावरोही प्रबन्ध कमेटी के निर्वाचित सदस्यों के कार्यकाल की समाप्ति के पूर्व किसी कारण से, चाहे जो भी हो, प्रबन्ध कमेटी के सदस्यों के निर्वाचन के परिणाम घोषित न किये गये हों, या घोषित न किये जा सके हों वहां यह समझा जायेगा कि प्रबन्ध कमेटी के निर्वाचित सदस्यों का निर्वाचन इस उपधारा के अर्थान्तर्गत नहीं हुआ है।
(6) उपधारा (5) के अधीन नियुक्त प्रशासक या कमेटी को, ऐसे किसी निदेश के अधीन रहते हुए, जिसे निबन्धक द्वारा समय-समय पर दिया जाय, प्रबन्ध कमेटी के या समिति के किसी अधिकारी के समस्त या किन्हीं कृत्यों का सम्पादन करने की शक्ति होगी और इस अधिनियम, नियमों और समिति की उपविधि के अधीन समस्त प्रयोजनों के लिए उसे प्रबन्ध कमेटी समझा जायेगा और ऐसी कमेटी का सभापति प्रबन्ध कमेटी के सभापति की शक्तियों का प्रयोग और कृत्यों का सम्पादन करेगा।
(7) उपधारा (5) के अधीन नियुक्त, यथास्थिति, प्रशासक या कमेटी, यथाशीघ्र, किन्तु नियुक्ति के दिनांक से छः माह की समाप्ति के पूर्व, यथास्थिति, प्रशासक या कमेटी से समिति का प्रबन्ध लेने के लिए इस अधिनियम के उपबन्धों, नियमों और समिति की उपविधि के अनुसार प्रबन्ध कमेटी का पुनर्गठन करने की व्यवस्था करेगीः
प्रतिबन्ध यह है कि जहां किसी प्रशासक के स्थान पर कमेटी या कमेटी के स्थान पर प्रशासक रखा जाय, जैसा कि उपधारा (5) के खण्ड (ख) में उपबिन्धत है, वहां छः माह की अवधि की गणना, यथास्थिति, प्रशासक या कमेटी की मूल नियुक्ति के दिनांक से की जायेगी।
स्पष्टीकरण- उपधारा (5) के अधीन प्रशासक या कमेटी की नियुक्ति के पूर्व निर्वाचन की प्रक्रिया के प्रारम्भ हो जाने पर भी, ऐसी नियुक्ति के पश्चात् निर्वाचन की नई प्रक्रिया प्रारम्भ होगी।
1["(8) इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध में किसी बात के प्रतिकूल होते हुए भी रिजर्व बैंक द्वारा यथानिय लेखा, विधि, बैंकिंग, प्रबधंन, कृषि या ग्रामीण अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में विशेष ज्ञान या अनुभव रखने वाले उत्तर प्रदेश सहकारी बैंक या किसी केन्द्रीय सहकारी बैंक की कमेटी में पूर्ण मतदान के अधिकारों सहित कम से कम तीन वृत्तिक व्यक्ति होंगे। यदि ऐसे वृत्तिक व्यक्ति निर्वाचित नहीं होते तो ऊपर उल्लिखित के अनुसार उन्हें बैंक की प्रबन्ध कमेटी में सहयोजित किया जायेगा।

1. उ0 प्र0 अधिनियम सं0 46 सन् 2007 द्वारा शब्द उत्तर प्रदेश सहकारी समिति संशोधन अधिनियम, 2002 के स्थान पर शब्द उत्तर प्रदेश सहकारी समिति (द्वितीय संशोधन) अधिनियम, 2007 प्रतिस्थापित हुआ (जो 5 सितम्बर 2007 से प्रभावी)।
2. उ0 प्र0 अधिनियम सं0 46 सन् 2007 द्वारा खण्ड (ग) बढाया गया ( 5 सितम्बर 2007 से प्रभावी)।
3. उ0 प्र0 अधिनियम सं0 46 सन् 2007 द्वारा उपधारा (3), (4), (5), (6) और (7) के स्थान पर प्रतिस्थापित हुआ (जो 5 सितम्बर 2007 से प्रभावी)।