धारा-31. सचिव, उसकी उपलब्धियॉ और कृत्य.- 4(1) सिवाय शीर्ष समिति के प्रत्येक सहकारी समिति का एक सचिव होगा जो नियमों और धारा 121 और 122 के अधीन बनाये गये विनियमों के उपबन्धों के अधीन रहते हुए समिति द्वारा नियक्त किया जायेगा और हटाया जा सकेगा। सचिव की उपविधिय और सेवा की अन्य शर्तें ऐसी होंगी जैसी इस निमित बनाये गये नियमों और विनियमों के अनुरूप बनाई गई समिति की उपविधियों में नियत की जायें:
प्रतिबन्ध यह है कि जहॉ सहकारी समितियों के किसी भी वर्ग के लिए सचिवों के पद के लिए सर्व सामान्य सेवा का सृजन धारा 122-क के अधीन किया गया हो, वहां ऐसे पदों पर भर्ती, नियुक्ति और उन पर नियुक्त व्यक्तियों, जिसमें ऐसी सेवा के सृजन के पूर्व ऐसे पदों पर नियुक् व्यक्ति भी सम्मिलित हैं, को हटाने और उनकी सेवा की अन्य शर्तें उक्त धारा के और उसके अधीन बनाये गये नियमों के उपबन्धों द्वारा नियन्त्रित होंगी]

(2) सचिव, समिति का मुख्य कार्यपालअधिकारी होगा और सभापति तथा प्रबन्ध कमेटी के ऐसे नियन्त्रण और पर्यवेक्षण के अधीन रहते हुए जिसकी व्यवस्था नियमों या समिति की उपविधियों में की जाये, वह-
(क) समिति के कार्य के सम्यक् प्रबन्ध तथा उसके कुशल प्रशासन के लिए उत्तरदायी होगा,
(ख) समिति के प्राधिकृत और सामान्य कार्य करेगा,
(ग) समिति की उपविधियों के उपबन्धों के अधीन रहते हुये, उसके लेखों का परिचालन करेगा और उस व्यवस्था को छोड़कर जब समिति का कोई रोकडिया या कोषाध्यक्ष हो,, उसकी रोकड बाकी का प्रबन्ध करेगा तथा उसे अपनी अभिरक्षा में रखेगा,
(घ) समिति की ओर से और उसके लिए सभी लेखों पर हस्ताक्षर करेगा और उन्हें प्रमाणित करेगा,
(ड़) समिति के विभिन्न बहियों और अभिलेखों को उचित रूप से रखने और इस अधिनियम, नियमों और उपविधियों और निबन्धक या राज्य सरकार के अनुदेशों के अनुसार नियकालिक विवरण पत्रों और विवरणियों को शुद्ध रूप से तैयार करने और ठीक समय पर उन्हें प्रस्तुत करने के लिए उत्तरदायी होगा,
(च) सामान्य निकाय, प्रबन्ध कमेटी और प्रबन्ध कमेटी द्वारा संगठित किसी उप समिति की बैठकें बुलायेगा और ऐसी बैठकों का ठीक अभिलेख रखेगा, और
(छ) ऐसे अन्य कर्तव्यों का पालन और ऐसे अन्य अधिकारों का प्रयोग करेगा जो नियमों तथा  समिति की उपविधियों के अधीन उस पर आरोपित या उसे प्रदत्त किये जायें।
(3) कोई सहकारी समिति, नियमों, उपविधियों और 1[ धारा 121, धारा 122 या धारा 122-क] के अधीन बनाये गये विनियमों के उपबन्धों के अधीन रहते हुए सचिव की सहायता के लिए यदि आवश्यक हो, एक या अधिक व्यक्तियों की नियुक्ति कर सकती है और उसे या उन्हें सचिव के ऐसे अधिकार तथा कर्तव्य सौंप सकती है जो वह (समिति) उचित समझे।
(4) किसी सहकारी समिति के निबद्ध हो जाने के पश्चात् और ऐसे समय तक जब तक कि उपधारा (1) के अधीन उसके सचिव की नियुक्ति न हो जाये, अथवा छः महीने तक जो भी पहले हो, सचिव के कृत्यों और कृतव्यों का पालन समिति के ऐसे सदस्य द्वारा किया जायेगा जिसकी व्यवस्था नियमों तथा समिति की उपविधियों में की जाय।


टिप्पणी


धारा 31(1) तथा 30 एवं उत्तर प्रदेश सहकारी समिति नियमावली, 1968 के नियम 125 के अन्तर्गत सचिव की नियुक्ति के लिए किये गये अनुमोदन को वापस लिए जाने के आदेश की विधिमान्यता के प्रश्न पर यह धारण किया गया है कि यदि ऐसा आदेश केवल इस आधार पर पारित किया गया है कि सचिव के विरूद्ध कुछ परिवाद प्राप्त हुए थे तो ऐसा आदेश अधिकारितारहित होगा। सेवा से हटाये जाने का आदेश केवल तभी पारित किया जा सकता है जबकि या तो सेवा समाप्ति की कोई संविदा की गयी हो, या आरोपों की जच कर ली गयी हो।
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1. उ0 प्र0 अधिनियम संख्या 1, 1972 के द्वारा रखे गये।
2. उपधारा (4) उ0 प्र0 अधिनियम संख्या 1, 1972 के द्वारा बढा दी गयी है।
3. अधिसूचना सं0 235/सत्रह-वि-1-1(क)-38-1997 दि0 2 फरवरी, 1998 द्वारा बढाया गया।
4. उ0 प्र0 अधिनियम संख्या 12, 1976 के द्वारा रखे गये (3.10.1975 से प्रभावी)

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1. उ0 प्र0 अधिनियम संख्या 12, 1976 के द्वारा रखे गये (3.10.1975) से प्रभावी।