धारा-1[31क. शीर्ष समितियों के लिए सचिव के स्थान पर प्रबन्ध निदेशक की नियुक्ति-(1) प्रत्येक शीर्ष समिति के लिए सचिव के स्थान पर एक प्रबन्ध-निदेशक होगा जो राज्य सरकार द्वारा नाम निर्दिष्ट प्रथम वर्ग के अधिकारी से अनिम्न पद का सरकारी सेवक होगा और उसकी सेवायें समिति में प्रतिनियुक्ति पर समझी जायेंगी और उसे राज्य सरकार द्वारा अवधारित वेतन और भत्ता समिति के निधि से दिया जायेगा।
(2) प्रबन्ध निदेशक प्रबन्ध कमेटी का पदेन सदस्य होगा।
(3) किसी शीर्ष समिति के सम्बन्ध में, अधिनियम में सचिव के प्रति समस्त निर्देशों, जहां कहीं व्यवहार्य हो, प्रबन्ध निदेशक के प्रति निर्देश समझ जायेगा।
(4) प्रबन्ध निदेशक शीर्ष समिति का मुख्य-कार्यपालक अधिकारी होगा और प्रबन्ध कमेटी और सभापति के ऐसे नियन्त्रण में रहते हुए, जैसा नियमों और समिति की उपविधियों में उपबन्धित किया जाय, उसका निम्नलिखित कर्तव्य और उत्तरदायित्व होगा, अर्थात:
(i) समिति के प्रशासन पर सामान्य नियन्त्रण रखना,
(ii) प्रबन्ध कमेटी और सामान्य निकाय की बैठक बुलाना,
(iii) समिति की ओर से समस्त धन और प्रतिभूति प्राप्त करना और समिति की रोकड़ बाकी और अन्य सम्पत्तियों के समुचित अनुरक्षण और अभिरक्षा का प्रबन्ध करना,
(iv) वचन-पत्रों, सरकारी और अन्य प्रतिभूतियों को पृष्ठांकित और संक्रमित करना और समिति की ओर से चेक और अन्य परक्राम्य संलेख का पृष्ठांकन, हस्ताक्षर तथा परक्रमण करना,
(v) समिति के दिनानुदिन कार्य और मामलों के सामान्य संचालन, पर्यवेक्षण और प्रबन्ध के लिए उत्तरदायी होना?
(vi) समस्त जमा रसीदों पर हस्ताक्षर करना और बैंक में समिति को लेखा चलाना?
(vii) समिति के पक्ष में समस्त बन्द-पत्रों और अनुबन्धों पर हस्ताक्षर करना,
(viii) समिति के बजट प्राविधानों के रहते हुए तीन मास की अवधि के लिए तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के पदों का सजृन करना और नियुक्त प्राधिकारी के रूप में बोर्ड के माध्यम से उन पर भर्ती करना जैसा कि धारा 122 की उपधारा (2) के अधीन अधिकारियों का प्रयोग करके राज्य सरकार द्वारा बनाये गये विनियमों में व्यवस्थित है।,
(ix) समिति के कर्मचारियों के अधिकार, कर्तव्य और उत्तरदायित्व अवधारित करना।
(x) समिति द्वारा या उसके विरूद्ध या अन्यथा समिति के मामलों के संबंध में कोई वाद या अन्य विधिक कार्यवाही संस्थित, संचालित, प्रतिवादित, प्रशमित या परित्यक्त करना और समिति द्वारा या उसके विरूद्ध किसी दावा या मांग का प्रशमन करना और भुगतान या तुष्टि के लिए समय देना,
(xi) ऐसे विनियमों से, यदि कोई हो, जिन्हें प्रबन्ध कमेटी बनाये, के अधीन रहते हुए, बातचीत करना और निर्माण कार्य के दौरान पच लाख रूपये तक की प्रत्येक और उसके पश्चात् 2.5 लाख रूपये तक की प्रत्येक संविदा को स्वीकृत करना और समिति के परियाजनार्थ, उपर्युक्त किसी विषय के संबंध में समिति के नाम से और उसकी ओर से ऐसे समस्त कार्य, कृत्य और बात करना,
(xii) अपना अन्तिम नियंत्रण और प्राधिकार रखते हुए, किसी समिति के किसी कर्मचारी या कर्मचारियों को अपने में निहित सभी या किसी अधिकार, प्राधिकार या विवेकाधिकार प्रत्यायोजित करना,
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1. उ0 प्र0 अधिनियम संख्या 12, 1976 के द्वारा रखे गये (3.10.1975 से प्रभावी)।