धारा-2[34. प्रबन्ध कमेटी में सरकार द्वारा नाम-निर्दिष्ट व्यक्ति-(1) यदि राज्य सरकार ने -
(क) अध्याय 6 के अधीन किसी सहकारी समिति की अंशपूंजी में प्रत्यक्ष रूप से अंशदान दिया हो, या
(ख) किसी सहकारी समिति की अंशपूंजी के निर्माण या वृद्धि में अप्रत्यक्ष रूप से सहायता दी हो, जैसा कि अध्याय 6 में व्यवस्था की गयी है, या
(ग) किसी सहकारी समिति को ऋण या अग्रिम दिया हो या किसी सहकारी समिति द्वारा जारी किये गये ऋण पत्रों के मूलधन के प्रतिदान और ब्याज के भुगतान के लिए प्रतिभूति दी हो या किसी सहकारी समिति को ऋण या अग्रिम के मूलधन के प्रतिदान और ब्याज के भुगतान के लिए प्रत्याभूति दी हो, तो राज्य सरकार को ऐसी समिति प्रबन्ध कमेटी में दो से अनधिक व्यक्तियों के नाम-निर्दिष्ट करने का अधिकार होगा, जिसमें से एक सरकारी सेवक होगा, किन्तु सरकारी सेवक समिति के किसी पदाधिकारी के निर्वाचन में मत नहीं देगा।

1[ * * *]
2[प्रतिबन्ध यह है कि जह कोई समिति चीनी उत्पादन में लगी हो, और -
(1) राज्य सरकार द्वारा अभिदत्त अंशपूंजी एक करोड़ रूपये से कम न हो, या
(2) समिति की अंशपूंजी में राज्य सरकार का अंश समिति की कुल अंशपूंजी के 50 प्रतिशत से अधिक हो, या
(3) राज्य सरकार से समिति को ऋण या अग्रिम दिया हो या समिति द्वारा जारी किये गये ऋण पत्रों के मूलधन के प्रतिदान और ब्याज के भुगतान के लिए प्रत्याभूति दी हो या समिति को ऋण या अग्रिम के मूलधन के प्रतिदान और ब्याज के भुगतान के लिए प्रत्याभूति दी हो, जिसकी कुल धनराशि समिति द्वारा इस प्रकार उधार ली गयी कुल धनराशि के योग के 50 प्रतिशत से अधिक हो,
वह राज्य सरकार को ऐसी समितियों और उनकी शीर्ष समिति अर्थात उत्तर प्रदेश सहकारी चीनी मिल संघ लिमिटेड को प्रबन्ध कमेटी का सभापति, जोकि एक सरकारी सेवक होगा, नाम-निर्दिष्ट करने का भी अधिकारी होगा।]
(1-क) 3[ * * *]
(1-ख) 4[ * * *]
5[अग्रतर प्रतिबन्ध यह है कि किसी केन्द्रीय सहकारी बैंक या उत्तर प्रदेश सहकारी बैंक की प्रबन्ध कमेटी में, राज्य सरकार एक से अनधिक ऐसे व्यक्ति को नाम निर्दिष्ट करेगी जो सरकारी सेवक होगाः
6[ प्रतिबन्ध यह भी है कि किसी प्रारम्भिक कृषि सहकारी ऋण समिति में राज्य सरकार का कोई नामनिर्देशिती नहीं होगा।
(2) इस धारा के अधीन नाम निर्दिष्ट व्यक्ति सरकार के प्रसाद-पर्यन्त पद धारण करेगा।
 

7[(3) The right of nomination vested in the State Government under this section may be delegated by it to any authority specified by it in the behalf.]

स्पष्टीकरण - इस धारा के प्रयोजनों के लिए राज्य सरकार की सिफारिश पर केन्द्र सरकार द्वारा दी गयी कोई प्रत्याभूति राज्य सरकार द्वारा दी गयी प्रत्याभूति समझी जायेगी।
 

टिप्पणिय


धारा 34 अध्यादेश सं0 1, वर्ष 1989 द्वारा प्रतिस्थापित तथा धारा 29 एवं 42-विधि के अधीन स्थिति यह है कि लाटों के निकालने के पश्चात् प्रबन्ध समिति के ऐसे सदस्य जो लाटों के क्रम में अलग कर दिये जायें वह उस तारीख से प्रबन्ध समिति के सदस्य नहीं रह जायेंगे। इस प्रकार 29-6-1988 से याचीगण का संघ की समिति का सदस्य रहना समाप्त हो गया इसलिए, इस तारीख के पश्चात् उनके प्रबन्ध समिति का सदस्य बने रहने का कोई प्रश्न ही नहीं रह जाता।
अध्यादेश सं0 1, वर्ष 1989 द्वारा नयी प्रतिस्थापित की गयी धारा 24 सहकारी समिति के लोकतंत्रात्मक संविधान को मान्य किया गया है, और राज्य सरकार को प्रबन्ध समिति में मात्र दो सदस्यों का नाम निर्देशन करने का अधिकार दिया गया है, जिनमें से एक सदस्य कर्मचारी वर्ग का होगा। अध्यादेश के प्रवर्तन के पश्चात् राज्य सरकार ने इस प्रकार प्रबन्ध समिति में नौ सदस्यों का नाम निर्देशन करने का आदेश वापस ले लिया, क्योंकि इस प्रकार प्रतिस्थापित की गयी धारा 34 के अधीन प्रबन्ध समिति में दो से अधि सदस्यों का नाम निर्देशन करने का कोई प्रश्न ही नहीं था। याचीगण का प्रबन्ध समिति का सदस्य होना समाप्त हो जाने के पश्चात् पूर्वोक्त वर्ष 1989 के अध्यादेश सं0 1 की दृष्टि में दिनांक 17.5.1989 के उपरोक्त आदेश के वापस ले लिये जाने पर , उनके पुर्नजीवन (revival) का कोई प्रश्न ही नहीं था। वह स्थान रिक्त हो चुके हैं और इसलिए अधिनियम तथा नियमावली के उपबन्धों के अनुसार उन रिक्त स्थानों के लिए नया निर्वाचन कराया जायेगा।
राम प्रकाश तथा अन्य बनाम उ0 प्र0 राज्य तथा अन्य, 1989 ए0एल0जे0726, पृष्ठ 729 1989 ए0एल0आर0 75 (समरी)

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1. अधिनियम सं0 17, 1994 द्वारा निकाला गया।
2. उ0 प्र0 अधिनियम सं0 4, 1989 द्वारा प्रतिस्थापित (1.7.1989 से प्रभावी)

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1. उ0 प्र0 अधिनियम सं0 4, 1989 द्वारा प्रतिबन्धक निकाल दिया गया (1.7.1989 से प्रभावी)।
2. अधिनियम सं0 17, 1995 द्वारा बढाया गया (30.11.94)।
3. उ0 प्र0 अधिनियम सं0 7, 1994 द्वारा उपधारा (1क) और (1ख) निकाला गया (18.2.1994)
4. उ0 प्र0 अधिनियम सं0 7, 1994 द्वारा उपधारा (1क) और (1ख) निकाला गया (18.2.1994)
5. उ0 प्र0 अधिनियम सख्या 47, सन् 2007 द्वारा प्रतिबन्धक अन्तः स्थापित जो उ0 प्र0 असाधारण गजट भाग-1 खण्ड (क) दिनांक 10 दिसम्बर 2007 को प्रकाशित हुआ।
6. उ0 प्र0 अधिनियम सख्या 47, सन् 2007 द्वारा प्रतिबन्धक अन्तः स्थापित जो उ0 प्र0 असाधारण गजट भाग-1 खण्ड (क) दिनांक 10 दिसम्बर 2007 को प्रकाशित हुआ।
7. Inserted by U.P. Act No. 12 of 1990