धारा-35. प्रबन्ध कमेटी का अवक्रमण व निलम्बन. - (1) यदि निबन्धक की राय में किसी सहकारी समिति की प्रबन्ध कमेटी इस अधिनियम या नियमों अथवा समिति की उपविधियों द्वारा उस उप आरोपित कर्तव्यों के पालन में बराबर चूक करती है अथवा उपेक्षा करती है, अथवा कोई ऐसा कार्य करती है जो समिति अथवा उसके सदस्यों के हित के प्रतिकूल हो या अन्यथा समुचित रीति से कार्य नहीं करती है तो निबन्धक कमेटी की सुनवाई का समुचित अवसर देने के पश्चात् और नियत रीति से उक्त प्रयोजन के लिए बुलाई गयी सामान्य बैठक में समिति के सामान्य निकाय की राय प्राप्त करने के पश्चात् लिखित आदेश देकर प्रबन्ध कमेटी को अवक्रान्त कर सकता हैः
1[प्रतिबन्ध यह है कि यदि नियत परिस्थितियों में समिति के सामान्य निकाय की सामान्य बैठक बुलाना संभव नहीं है, तो निबन्धक के लिए समिति के सामान्य निकाय की राय लेना आवश्यक नहीं होगा।
2[ अग्रतर प्रतिबन्ध यह है कि किसी केन्द्रीय सहकारी बैंक या उ0 प्र0 सहकारी बैंक के मामले में प्रबन्ध कमेटी का निलम्बन या अवक्रमण निबन्धक द्वारा तब तक नहीं किया जायेगा जब तक रिजर्व बैंक से परामर्श न कर लिया गया होः
प्रतिबन्ध यह है कि प्रारम्भिक कृषि सहकारी ऋण समिति की प्रबन्ध कमेटी को निबन्धक द्वारा निम्नलिखित आधारों पर ही अवक्रमित किया जा सकता है-
(एक) यदि कोई समिति लगातार तीन वर्षों से हानि उपगत करती हो, या
(दो) यदि गम्भीर वित्तीय अनियमिततायें या कपट किया गया हो,
(तीन) यदि इस आशय के कोई न्यायिक निर्देश हों अथवा निरन्तर गणपूर्ति का अभाव हो।

(2) यदि उपधारा (1) के अधीन कार्यवाही करते समय, निबन्धक की यह राय हो कि कार्यवाही की अवधि में प्रबन्ध कमेटी को निलम्बित करना समिति के हित में आवश्यक है तो वह प्रबन्ध कमेटी को निलम्बित कर सकता है जो तदुपरान्त कार्य करना बन्द कर देगी, और कार्यवाही पूरी होने तक समिति के कार्यों के प्रबन्ध के लिए निबन्धक ऐसी व्यवस्था करेगा जो वह उचित समझेः
प्रतिबन्ध यह है कि इस प्रकार निलिम्बित प्रबन्ध कमेटी अवक्रान्त न की जाये उसे पुनः स्थापित किया जायेगा और वह अवधि जिसमें वह निलम्बित रही हो उसके कार्यकाल की गणना करने में सम्मिलित की जायेगी।
1[* * *]
2[(3) जहॉ निबन्धक ने उपधारा (1) के अधीन प्रबन्ध कमेटी का अवक्रमण किया हो, वहां वह उसके स्थान पर निम्नवत नियुक्ति कर सकता है-
(क) एक नयी कमेटी जिसमें समिति के एक या अधिक सदस्य होंगे, या
(ख) कोई प्रशासक या प्रशासक कमेटी जिसके या जिनके लिए समिति का सदस्य होना आवश्यक नहीं है,
प्रतिबन्ध यह है कि यदि उपधारा (1) के अधीन प्रबन्ध कमेटी का अवक्रमण कर दिया जाए तो अवक्रमण के दिनांक से तीन माह के भीतर इस अधिनियम के उपबन्धों के अनुसार निर्वाचन कराने के पश्चात् प्रबन्ध कमेटी का पुर्नगठन किया जायेगा।
(4) निबन्धक को उपधारा (3) के खण्ड(क) अथवा (ख) के अधीन नियुक्त कमेटी अथवा उसके किन्हीं सदस्यों या प्रशासक अथवा प्रशासकों की स्वमति से उपधारा के अधीन निर्दिष्ट अवधि में बदलने का अधिकार होगा।
(5) उपधारा (3) और (4) के अधीन नियुक्त कमेटी, प्रशासक या प्रशासकों को, किसी निदेश के अधीन रहते हुए जो निबन्धक समय-समय पर दे, प्रबन्ध कमेटी के या समिति के किसी अधिकारी के समस्त या कोई कृत्य करने का अधिकार होगा और वे इस अधिनियम, नियमों तथा समिति की उपविधियों के अधीन सभी प्रयोजनों के लिए प्रबन्ध कमेटी समझे जायेग
(6) उपधारा (3) के अधीन विर्निदिष्ट अवधि के व्यतीत हो जाने के पूर्व उपधारा (3) और (4) के अधीन नियुक्त कमेटी, प्रशासक या प्रशासकगण उक्त अवधि के व्यतीत होने पर सहकारी समिति का प्रबन्ध ग्रहण करने के लिए इस अधिनियम, नियमों और समिति की उपविधियों के अनुसार प्रबन्ध कमेटी का पुर्नगठन करने की व्यवस्था करेंगेः
प्रतिबन्ध यह है कि कमेटी या प्रशासक या प्रशासकगण जिनका कार्यालय 31[उत्तर प्रदेश सहकारी अधिनियम, 1994 के प्रारम्भ के पूर्व समाप्त हो गया है, प्रबन्ध कमेटी के पुर्नगठन की व्यवस्था 31 दिसम्बर, 1994 तक करेंगे रख दिये जायेंगे।
(7) धारा 29 की 4[* * * ] के उपबन्ध इस धारा के अधीन प्रबन्ध कमेटी के पुर्नगठन के सम्बन्ध में लागू होंगे।

1[(8) अवक्रमित प्रबन्ध कमेटी के सदस्य अवक्रम के दिनांक से अगले तीन वर्ष के लिए निर्वाचन में पुनः भाग लेने के लिए अर्ह न होंगे।


टिप्पणिय


धारा 35 के अधीन कार्यवाही- एक तथ्य यह है कि अध्यक्ष की अनुपस्थिति में एक ऐसी परिस्थिति उत्पन्न हुई जिसमें कमेटी उचित रूप से अपने कार्यों का सम्पादन नहीं कर सकी। अनुपस्थित का अभिकथ भ्रामक था। अतः प्रबन्ध समिति का कोई दायित्व (Liability) नहीं था, और इसलिए उसके विरूद्ध कोई कार्यवाही नहीं की का सकती।
राम समुझ सिंह बनाम निबन्धक सहकारी समिति, उ0 प्र0 1986, ए0एल0जे0 802: 1936 यू0पी0एल0बी0ई0सी0 152:  1986 (2) लैण्ड एल0आर0 227।

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1. अधिनियम सं0 1, 1997 द्वारा बढाया गया।
2. प्रतिबन्धात्मक खण्ड अधिनियम सं0 47, 2007 द्वारा बढाया गया।

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1. अधिनियम सं0 1, 1997 द्वारा निकाला गया।
2. उ0 प्र0 अधिनियम संख्या 47 सन् 2007 द्वारा उपधारा (3) प्रतिस्थापित हुई जो उ0 प्र0 असाधारण गजट भाग-1 खण्ड(क) दिनांक 10 दिसम्बर, 2007 को प्रकाशित हुआ।
3. अधिनियम सं0 1, 1997 द्वारा बदला गया।
4. उ0 प्र0 अधिनियम सं0 17, 1994 द्वारा निकाला दिया गया।