धारा-2[35 . (1) इस अध्याय के अन्य उपबन्धों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, जह दो लगातार वर्षों के लिए (जिसके अन्तर्गत इस धारा के प्रारम्भ के पूर्व की कोई अवधि भी है)-
(क) किसी प्रारम्भिक समिति का, जो ऋण समिति है, किसी सहकारी वर्ष में अपने सदस्यों के विरूद्ध कुल देयों का सत्तर प्रतिशत से अधिक ऐसे वर्ष के अन्त में अदत्त रह जाये, या
(ख) किसी ऐसे वर्ष के अन्त में बाकीदार सदस्यों की संख्या ऐसी समिति के ऋणी सदस्यों की कुल संख्या के सत्तर प्रतिशत से अधिक हो जाये।
वहॉ  किसी ऐसे समिति की प्रबन्ध कमेटी के सभापति और सभी सदस्य उपधारा (3) के अधीन आदेश प्रभावी होने पर इस रूप में अपना-अपना पद रिक्त कर देंगे।
(2) उपधारा (1) के उपबन्ध, जिस प्रकार वे किसी प्रारम्भिक ऋण समिति पर लागू होते हैं, वित्त पोषण बैंक पर, आवश्यक परिवर्तनों सहित इस प्रकार लागू होंगे मानों सत्तर प्रतिशत के निर्देश को साठ प्रतिशत के निर्देश द्वारा प्रतिस्थापित कर दिया गया है।
(3) किसी समिति या बैंक के सम्बन्ध में जैसा कि उपधारा (1) या उपधारा (2) में निर्दिष्ट हैं, निबन्धक ऐसी समिति या बैंक के, जिसे वह उपयुक्त समझे, कार्यों के प्रबन्ध के लिए ऐसी व्यवस्था कर सकता है जिसे वह उचित समझे, और धारा 35 की उपधारा (3), (4), (5) और (6) के उपबन्ध आवश्यक परिवर्तनों सहित लागू होंगे।


टिप्पणी


धारा 35-क(3) स्पष्टतया यह उपबन्ध नहीं करती कि उपधारा (3) के अधीन आदेश पारित किये जाने से पूर्व समिति की प्रबन्ध समिति को अवसर प्रदान किया जायेगा। फिर भी, इस बात से इन्कार नहीं किया जा सकता कि ऐसे आदेश का प्रभाव प्रबन्ध समिति को समिति के कार्य कलापों का प्रबन्ध करने की शक्ति से वंचित करना होगा। प्रबन्ध समिति, को जो एक निर्वाचित निकाय होती है, पद की अवधि तक के लिए समिति के कार्य कलापों का प्रबन्ध करने का अधिकार प्राप्त होता है। नैंसर्गिक त्याग के सिद्धान्त के अधीन यह जरूरी होता है कि ऐसे निकाय को समिति के कार्य कलापों का प्रबन्ध करने के वैध अधिकारी से वंचित किये जाने के पूर्व उसको इस बात का अवसर प्रदान किया जाये कि वह सिद्ध करे कि धारा 35-क(3) के अधीन शक्तियों का प्रयोग करने के लिए पूर्व शर्तें विद्यमान नहीं है। यदि धारा 35-क(3) के अधीन पारित किया गया कोई आदेश बिना अवसर प्रदान किये ही पारित किया गया है, तो उसको बनाये रखा नहीं जा सकता है।
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1. उ0 प्र0 अधिनियम संख्या 47 सन् 2007 द्वारा उपधारा (8) बढायी गयी उ0 प्र0 असाधारण गजट भाग-1 खण्ड(क) दिनांक 10 दिसम्बर, 2007 को प्रकाशित हुआ।
2. उ0 प्र0 अधिनियम सं0 12, 1975 के द्वारा बढाये गये (3.10.1975 से प्रभावी)।