धारा-73. परिसमापक.- (1) यदि निबन्धक ने धारा 72 के अधीन सहकारी समिति के समापन का आदेश दिया हो, तो वह इस प्रयोजन के लिये किसी व्यक्ति को परिसमापक नियुक्त कर सकता है और यदि आवश्यक हो, तो उसका पारिश्रमिक नियुक्त कर सकता है।
(2) नियुक्त होने पर परिसमापक ऐसी सभी सम्पत्ति, सामान और अभियोज्य दावों (actionable claims)को जिनकी समिति हकदार हो या प्रतीत हो, अपनी अभिरक्षा में अथवा अपने नियंत्रण में ले लेगा और ऐसी सम्पत्ति, सामान और दावों की हानि का ह्रास और क्षति रोकने के लिए ऐसी कार्यवाही करेगा जो वह आवश्यक या इष्टकर समझे। परिसमापक ऐसी सभी सम्पत्ति, सामान और अभियोज्य दावों का पूरा लेख रखेगा और उनकी सुरक्षित अभिरक्षा के लिए उत्तरदायी होगा,
(3) यदि धारा 72 के अधीन सहकारी समिति का परिसमापन करने के आदेश के विरूद्ध धारा 98 के अधीन अपील की गयी हो तो परिसमापन सम्बन्धी आगे की कार्यवाही तब तक के लिए रोक देगा जब तक कि उक्त आदेश की अपील की पुष्टि न हो जाये।

प्रतिबन्ध यह है कि परिसमापक उपधारा (2) मे उल्लिखित सम्पत्ति, सामान और अभियोज्य दावों को अपनी अभिरक्षा अथवा नियंत्रण में रखे रहेगा और उसका उक्त उपधारा में अभिर्दिष्ट कार्यवाही करने का प्राधिकार बना रहेगा।
(4) यदि सहकारी समिति के समापक का आदेश अपील से रदद कर दिया जाये तो समिति की सम्पत्ति, सामान और अभियोज्य दावे समिति में पुर्ननिहित हो जायेंगे।


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1. उ0 प्र0 अधिनियम सं0 17, 1994 द्वारा बदला गया (15.7.94)