धारा-74. परिसमापक के अधिकार.- (1) तदर्थ बनाये गये किन्हीं नियमों के अधीन रहते हुए, किसी ऐसी सहकारी समिति की जिनके सम्बन्ध में समापन का आदेश दिया गया हो सम्पूर्ण परिसम्पत्तिय धारा 73 के अधीन नियुक्त परिसमापक में उस दिनांक से निहित हो जायेंगी जिस दिनांक को उक्त आदेश प्रभावी हो और परिसमापक को ऐसी परिसम्पत्तियों को बेचकर या अन्य प्रकार से वसूल करने का अधिकार होगा।
(2) ऐसे परिसमापक को निबन्धक के नियंत्रण के अधीन रहते हुए यह भी अधिकार होगा कि वह:
(क) अपने पद के नाम से सहकारी समिति की ओर से वादों और अन्य विधि कार्यवाहियों को संस्थित करे और उनका प्रतिवाद करे,
(ख) सम्बद्ध व्यक्ति अथवा व्यक्तियों को दावे का उत्तर देने का अवसर देने के पश्चात् समय समय पर अंशदान की, जिनके अन्तर्गत ऋण तथा अन्य देय भी हैं, अवधारित करे जो सदस्यों अथवा भूतपूर्व सदस्यों द्वारा अथवा मृत सदस्यों की सम्पदाओं से या उनके द्वारा नाम निर्दिष्ट व्यक्तियों या उनके दायादों अथवा विधिक प्रतिनिधियों द्वारा अथवा अधिकारियों अथवा भूतपूर्व अधिकारियों द्वारा समिति की परिसम्पत्तियों में दिया जाना हो अथवा दिया जाना शेष हो,
(ग) उस समय को निश्चित करे, जो किसी भी दशा में तीन दिन से कम न होगा, जिसके भीतर ऋणदाता अपने ऋणों और दावों को प्रमाणित करेंगे अथवा इस ऋणों या दावों के प्रमाणित होने के पूर्व किये गये किसी वितरण के लाभ के लाभ में सम्मिलित किये जायेंगे और ऐसे समय का नोटिस निय रीति से दें,
(घ) सहकारी समिति के विरूद्ध सभी दावों की जच करें और दावेदारों के बीच उठने वाले पूर्वता के प्रश्नों का इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन रहते हुए निर्णय करें;
(ड़) सहकारी समिति के विरूद्ध दावों का भुगतान, उनकी पारस्पिरिक पूर्वता यदि कोई हो, के क्रमानुसार समापन के दिनांक तक के ब्याज सहित पूरा-पूरा अथवा अनुमानतः जैसा कि समिति को परिसम्पत्तियों के अनुसार संभव हो, करे और यदि दावों के भुगतान के पश्चात् कोई अतिरिक्त धनराशि बचे तो उसे उक्त आदेश के दिनांक से तथा उसके (परिसमापक के) द्वारा नियत दर से, जो किसी भी दशा में संविदा की दर से अधिक न होगी, ब्याज के भुगतान में लगाया जायेगा,
(च) यह अवधारित करे कि किन व्यक्तियों द्वारा और किस अनुपात में परिसमापन के व्यय वहन किये जायेंग;
(छ) समिति की परिसम्पत्तियों के संग्रह और वितरण के संबंध में ऐसे निदेश दे जो उसे समिति के कार्यों के समापन के लिए आवश्यक प्रतीत हों;
(ज) अध्याय 9 के अन्तर्गत आने वाले विवादों को मध्यस्थ निर्णय के लिए अभिर्दिष्ट करायें तथा मध्यस्थ निर्णय की किसी भी कार्यवाही में, जिसमें समिति एक पक्ष हो, समिति का प्रतिनिधित्व करे,
(झ) समिति के लाभप्रद के समापन के लिए जह तक आवश्यक हो समिति के कार्य का संचालन करें ;
(ञ) ऋणदाताओं अथवा ऐसे व्यक्तियों के साथ जो ऋणदाता होने का दावा करे अथवा जिनका कोई दावा हो अथवा जो अभिकथन करें कि उनका दावा है, चाहे वह वर्तमान हो अथवा भावी, जिसके द्वारा समिति देनदार ठहराई जा सके, कोई समझौता अथवा प्रबन्ध करे, और
(ट) सभी आहूतियों (Calls) अथवा आहूति और ऋणों के दायित्वों तथा ऐसे दायित्वों के सम्बन्ध में जो परिणामतः ऋण में परिवर्तित हो सकते हों तथा वर्तमान अथवा भावी निश्चित या घटनापेक्ष सभी दावों के सम्बन्ध में, जो समिति तथा अंशदायी तथा अभिकथित अंशदायी या अन्य ऋणी के अथवा ऐसे व्यक्ति के जो अपने ऊपर सहकारी समिति का दायित्व आने की आशंका करता हो, मध्य विद्यमान हों या विद्यमान माने जाते हों, तथा ऐसे सभी प्रश्नों के सम्बन्ध में जो किसी भी रूप में परिसम्पत्तियों से या समिति के समापन से संबंधित हों अथवा उन पर प्रभाव डालते हों, ऐसी शर्तों पर तय हो जायें, समझौता करें और उक्त आहूति , दायित्व ऋण या दावे के उनमोचन के लिए कोई प्रतिभूति ले और उसके संबंध में पूर्ण उन्मुक्ति दे।
(3) जब किसी सहकारी समिति के कार्य समाप्ति कर दिये गये हों, तो परिसमापक इसका प्रतिवेदन निबन्धक को देगा और समिति के अभिलेखों को ऐसे स्थान पर जहनिबन्धक निदेश दे जमा करेगा।
(4) ऐसी धनराशि जिसके उपधारा (2) के अधीन समिति की परिसम्पत्तियों के लिए अंशदान (जिसके अन्तर्गत ऋण तथा अन्य देय धनराशिय भी हैं) यह समापन के व्यय के रूप में वसूल किये जाने का आदेश दिया गया हो, वसूली के लिए परिसमापक की प्रार्थना पर निबन्धक द्वारा कलेक्टर से तदर्थ अभियाचन किये जाने पर मालगुजारी की बकाये के रूप में वसूली की जा सकती है।
(5) कोई ऋण या दावा उपधारा (2) के खण्ड (ग) के अधीन नियत समय के भीतर प्रमाणित न किया गया हो परिसमापक के इस अधिकार को वापस न करते हुए कि वह पर्याप्त कारण बताये जाने पर उपर्युक्त समय के बाद भी उसे प्रमाणित करने की अनुज्ञा दे दें, उन्मोचित समझा जायेगा।