धारा-77. सहकारी कृषि समितियों का निबन्धन.- (1) यदि दस अथवा व्यक्ति जो-
(क) किसी मण्डल (सर्किल) की भूमिधरी अथवा सीरदारी के अधिकार धारण करते हों और भूमि को समुच्चय करना चाहते हों;अथवा
(ख) मिलकर समिति के नाम से किसी मण्डल के क्रय द्वारा, पटटे या अन्य प्रकार से भूमि प्राप्त करने के अभिलाषी हों।
कृषि उद्यानकरण, रेशम के कीडे पालने अथवा पशुपालन जिसके अन्तर्गत सुअर पालन, मत्स्य संवर्द्धन तथा कुटकुट पालन भी है से संबंधित किसी प्रयोजन के लिए अथवा ऐसे परियोजन के साथ साथ उक्त प्रयोजन में किसी कुटी उद्योग के लिए ऐसी भूमि का संयुक्त रूप से उपयोग करने के उददेश्य से समिति बनाते हैं, तो ऐसी समिति ( जिसे आगे सहकारी कृषि समिति कहा गया है) यदि वह धारा 7 की अपेक्षाओं के अनुरूप हो और यदि उर्पयुक्त प्रयोजनों के लिए ऐसी भूमि पर अधिकांश क्रियायें समिति के सदस्यों द्वारा की जाती हों तो इस अधिनियम के अधीन एक सहकारी कृषि समिति के रूप में निबन्धित की जा सकती हैं:
प्रतिबन्ध यह है कि निबन्धक किसी विशेष मामले की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर भूमि के एक ही मण्डल में होने की अपेक्षा से मुक्त कर सकता है और ऐसी मुक्ति की दशा में यह आगे मण्डल का अभिदेश उन मण्डलों का अभिदेश समझा जायेगा जिनमे सदस्यों द्वारा धृत या प्राप्त किये जाने के लिए वांछित भूमि स्थित हो।
(2) निबन्धक, निबन्धन प्रमाण पत्र की एक प्रतिलिपि और ऐसे अन्य लेख्य जो नियत किये जायें कलेक्टर को ऐसी कार्यवाही के लिए, यदि कोई हो, भिजवायेगा जो नियत की जायें।