धारा-82. सदस्यता समाप्त होने का प्रभाव.- (1) इस अधिनियम तथा नियमों और उपविधियों के अन्य उपबन्धों के अधीन रहते हुए, यदि कोई सदस्य जिसने सहकारी कृषि समिति को अंशदान के रूप में भूमि दी हो, सदस्य न रह जाये, तो उसके द्वारा अंशदान के रूप में दी गई भूमि उसे लौटा दी जायेगी, अथवा समिति के पास शेष रहने वाली अथवा सदस्य को लौटाई जाने वाली भूमि की सघनता (eompactness) बनाये रखने की दृष्टि से उसे समान मूल्य की अन्य भूमि दे दी जायेगी जो समिति की या किसी अन्य सदस्य की हो जिसकी लिखित सम्मति ऐसे विनियोग के लिए प्राप्त कर ली गई होः
प्रतिबन्ध यह है कि समिति ऐसे सदस्य से भूमि में अपने द्वारा किये गये उन सुधार या क्रियाओं के व्यय की प्रतिभूति कराने की हकदार होगी जिससे उत्पादन में लाभ या वृद्धि हो, अथवा जो उत्पादन में सहायक होः
प्रतिबन्ध यह भी है कि यदि लौटाई जाने वाली भूमि धारा 86 के उपबन्धों के अधीन समिति द्वारा रखे गये बन्धक के अधीन हो तो समिति बहिर्गामी सदस्य को भूमि लौटाने के पूर्व ऐसे बन्धक से भूमि क मोचन प्राप्त कर लेगी और बन्धक-कर्ता समिति द्वारा बन्धक धन की अनुपातिक धनराशि का भुगतान करने पर भूमि को छोड देगा, भले ही सम्पत्ति अन्तरण अधिनियम, 1882(Tranfer of Property Act, 1882) में कोई प्रतिकूल बात दी हैः
प्रतिबन्ध यह भी है कि समिति और बहिर्गामी सदस्य की पास्परिक सम्पत्ति से, समिति ऐसे सदस्य को भूमि के बदले, नियत रीति से अवधारित किया गया नकद प्रतिकर देगी।
(2) उपधारा (1) के अधीन बहिर्गामी सदस्य को वापस मिली भूमि को वह उसी अधिकारी से धारित करेगा जिससे वह समिति को अंशदान के रूप में दी गई समिति की सदस्यता समाप्त होने के ठीक पूर्व धारित करता था, और यथास्थिति, समिति या किसी अन्य सदस्य को, उपधारा (1) के अधीन बहिर्गामी सदस्य को दी गई भूमि के विनिमय में रखी गई भूमि में वही अधिकार, यदि कोई हो, प्राप्त होंगे जो इस प्रकार दी गई भूमि  में समिति या सदस्य के थे, भले ही 1950 ई0 के उत्तर प्रदेश जमींदारी भूमि विनाश भूमि-व्यवस्था अधिनियम की धारा 161 में कोई प्रतिकूल बात दी है।
(3) कोई सदस्य, अपनी सदस्यता समाप्त होने पर, सहकारी कृषि समिति द्वारा किसी भी रीति से अर्जित भूमि पर या अन्य सम्पत्ति के किसी भाग के लिए दावा करने का हकदार न होगा, किन्तु इसमें दी गई किसी बात से किसी ऐसे अंश का मूल्य पाने के उसके अधिकार पर प्रभाव न पडेगा जिसे पाने का हकदार वह इस अधिनियम के अधीन हो।