धारा-90ख. बीमाकृत सहकारी बैंकों पर लागू होने वाले विशेष उपबन्ध.- इस अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी, निम्नलिखित उपबन्ध प्रत्येक बीमाकृत सहकारी बैंक पर लागू होंगे, अर्थात-
(1) किसी बीमाकृत सहकारी बैंक के समामेलन या विलयन या विभाजन या समापन की योजना या संकल्प की स्वीकृत करने वाला कोई आदेश निबन्धक द्वारा रिजर्व बैंक की लिखित पूर्व स्वीकृति मात्र से ही दिया जा सकता है।
(2) किसी बीमाकृत सहकारी बैंक के समापन का आदेश उक्त अधिनियम की धारा 13-डी में निर्दिष्ट परिस्थितियों में रिजर्व बैंक द्वारा ऐसी अपेक्षा किये जाने पर इस नियम के उपबन्धों के अधीन दिया जायेगा।
(3) यदि रिजर्व बैंक की यह राय हो कि लोकहित में या किसी बीमाकृत सहकारी बैंक के कार्य-कलाप की ऐसी रीति से जो निक्षेपकों के हित के विरूद्ध हो, संचालन रोकने के लिए या ऐसे सहकारी बैंक के समुचित प्रबन्ध को सुनिश्चित करने के लिए ऐसा करना आवश्यक है, तो वह निबन्धक से कुल मिलाकर पच वर्ष से अनधिक उतनी अवधि के लिए जितनी रिजर्व बैंक के द्वारा समय-समय पर विनिर्दिष्ट की जाये, ऐसी सहकारी बैंक के प्रबन्ध कमेटी या अन्य प्रबन्ध निकाय के (चाहे वह किसी भी नाम से पुकारा जाये) अवक्रमण का और उसके लिए प्रशासक की नियुक्ति का आदेश देने की अपेक्षा कर सकता है और निबन्धक तदनुसार आदेश देगा और धारा 36 के शेष उपबन्ध ऐसे आदेश के सम्बन्ध में उसी प्रकार लागू होंगे मानों आदेश धारा 35 के अधीन दिये गये हों, किन्तु प्रबन्ध कमेटी को सुनवाई का अवसर देने और समिति के सामान्य निकाय की राय प्राप्त करने की उस धारा की उपेक्षायें लागू नहीं होंगी।
(4) किसी बीमाकृत सहकारी बैंक के प्रबन्ध कमेटी  के सभापति या सदस्यों द्वारा धारा 35-क की उपधारा (1) या उप-धारा (2) के अधीन अपना-अपना पद रिक्त करने की दशा में रिजर्व बैंक निबनधक से ऐसे बैंक के कार्य-कलाप का प्रबन्ध करने के लिये ऐसी व्यवस्था करने की अपेक्षा कर सकता है जैसी वह उचित समझे और निबन्धक तदनुसार आदेश देगा, और धारा 35-क के शेष उपबन्ध ऐसे आदेश के सम्बन्ध में उसी प्रकार लागू होंगे मानों आदेश उस धारा के अधीन दिया गया हो।

(5) किसी बीमाकृत सहकारी बैंक के समामेलन या विलयन या विभाजन या समापन की योजना या संकल्प की स्वीकृत करने वाले या रिजर्व बैंक की लिखित पूर्व स्वीकृति से या अपेक्षा पर बैंक के प्रबन्ध कमेटी  या अन्य प्रबन्ध निकाय (चाहे वह किसी भी नाम से पुकार जाये) वे अवक्रमण तथा उसके प्रशासक की नियुक्ति के आदेश पर किसी भी प्रकार के कोई आपत्ति नहीं की जायेगी।
(6) यथास्थिति, परिसमापक या बीमाकृत बैंक या अन्तरकम बैंक उक्त अधिनियम की धारा 21 में उल्लिखित धनराशि डिपाजिट इन्श्योरेंश कार्पोरेशन की उक्त धारा में निर्दिष्ट परिस्थितियों में और सीमा तक और रीति से प्रतिसंदाय करने के लिये बाध्य होगा।]


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1. उ0 प्र0 अधिनियम सं0 40, 1976 के द्वारा बढाई गई(28.8.1976 से प्रभावी)।