धारा-92. कतिपय आदेशों तथा अभिनिर्णयों का निष्पादन.- धारा 71 के अधीन दिया गया प्रत्येक अभिनिर्णय जो नीचे दी गयी रीति से निष्पादन योग्य हो और धारा 67 या 68 की उपधारा (2) अथवा 91 के अधीन निबन्धक द्वारा या धारा 74 के अधीन परिसमापक द्वारा अथवा धारा 97 या 98 के अधीन अपील पर अथवा धारा 91 के अधीन पुनर्विलोकन पर या धारा 100 के अधीन विवादकालीन ((Interlocutory) आदेश स्वरूप अपीलीय प्राधिकारी द्वारा किये गये इस प्रकार के निष्पादन योग्य प्रत्येक आदेश 1[ या धारा 95-क के अधीन जारी की गई किसी वसूली के लिए प्रमाण-पत्र] का निष्पादन, यदि उसका पालन न किया गया हो-
(क) मालगुजारी से बकाया की वसूली के लिए तत्समय प्रचलित विधि द्वारा व्यवस्थित रीति से किया जायेग;
प्रतिबन्ध यह है कि किसी भी ऐसी धनराशि की वसूली के लिए प्रार्थना-पत्र कलेक्टर को दिया जायेगा और उसके साथ निबन्धक द्वारा और उसके द्वारा तदर्थ प्राधिकृत किसी अन्य व्यक्ति द्वारा हस्ताक्षर कृत एक प्रमाण-पत्र भी रहेग;
प्रतिबन्ध यह भी है कि ऐसा प्रार्थना-पत्र आदेश या अभिनिर्णय में भुगतान के लिये निश्चित दिनांक से और यदि ऐसा कोई दिनांक निश्चित न हो तो यथास्थिति आदेश या अभिनिर्णय के दिनांक के 12 वर्ष के भीतर दिया जायेगा; अथवा
(ख) निबन्धक या उसके अधीनस्थ किसी ऐसे अन्य व्यक्ति द्वारा जिसे उसने तदर्थ अधिकृत किया हो उस व्यक्ति या सहकारी समिति की जिसके विरूद्ध आदेश या अभिनिर्णय दिया गया हो किसी सम्पत्ति को कुर्की और विक्रय द्वारा अथवा बिना कुर्की के विक्रय द्वारा किया जायेगा, अथवा
(ग) उस मामले में क्षेत्राधिकार रखने वाले दीवानी न्यायालय द्वारा इस प्रकार दिया जायेगा, मानों ऐसा आदेश या अभिनिर्णय उसी न्यायालय की डिग्री हो।


टिप्पणी


ऐसे अभिनिर्णयों (awards) को जो 1965 के अधिनियम के प्रवर्तन में आने से पूर्व अन्तिम हो चुके हों, न तो उ0 प्र0 सामान्य खण्ड अधिनियम की धारा 6 की सहायता से और न ही 1965 के अधिनियम के किसी उपबन्ध जिसमें धारा 172 भी शामिल है, की सहायता से प्रवृत्त किया जा सकता है। ह, 1965 के अधिनियम के प्रवर्तन में आने के पश्चात् दिये गये अभिनिर्णयों या जिनके सम्बन्ध में कार्यवाहिय ऐसे होने वाले अभिनिर्णयों के विषय में, 28 जनवरी, 1968 को जबकि 1965 का अधिनियम प्रवर्तन में आया लम्बित थी, यह माना जायेगा कि वह 1965 के अधिनियम के अधीन प्रारम्भ हुये और उसके सम्बन्ध में कार्यवाही धारा 132 की दृष्टि में उसके उपबन्धों के अनुसार चलाई गई थी।