धारा-1[92-ख. सहकारी संग्रह निधि.- (1) एक निधि स्थापित की जायेगी, जिसे सहकारी संग्रह निधि कहा जायेगा, जिसमें निम्नलिखित धनराशि जमा की जायेगी, अर्थात-
(क) किसी सहकारी समिति को देय किसी धनराशि की प्राप्ति की वसूली का समस्त व्यय;
(ख) धारा 92 के खण्ड (क) या खण्ड(ख) के अधीन किसी अभिनिर्णय, आदेश या वसूली के लिये प्रमाण-पत्र की प्राप्ति के निष्पादन का समस्त व्यय;
(ग) ऐसी अन्य धनराशि जिसे राज्य सरकार निदेश दे।
(2) उपधारा (1) के अधीन स्थापित निधि का उपयोग, देयों की वसूली से सम्बन्धित समस्त व्ययों को पूरा करने के लिये राज्य सरकार द्वारा बनाये गये नियमों द्वारा यथाविहित रीति में किया जायेगा। देयों की वसूली से सम्बन्धित व्ययों में, धारा 92-क के अधीन नियुक्त अमीनों और अन्य कर्मचारियों को भुगतान किये जाने वाले कमीशन, वेतन, सेवानिवृत्ति के समय अवकाश-नकदीकरण, यदि कोई हो, उपदान, अन्य भत्ते, ऋण और अग्रिम, भविष्य निधि पर देय ब्याज और पेंशन भी, सम्मिलित होंगे।