धारा-95. सरकार की देय धनराशियों की वसूली.-(1) सहकारी समिति से अथवा सहकारी समिति के किसी अधिकारी या सदस्य या भूतपूर्व सदस्य से राज्य सरकार या केन्द्रीय सरकार को देय समस्त धनराशिय, जिनके अन्तर्गत इस अधिनियम के किन्हीं उपबन्धों के अधीन किसी ऐसी सरकार को दिलाये गये व्यय भी हैं, नियन्त्रक द्वारा तदर्थ जारी किये गये प्रमाण-पत्र पर मालगुजारी के बकाया की भांति वसूल की जा सकती है।
(2) किसी समिति द्वारा राज्य सरकार या केन्द्रीय सरकार को देय तथा उपधारा (1) के अधीन वसूल की जाने योग्य धनराशिय प्रथमतः समिति की सम्पत्ति से द्वितीयतः ऐसी समिति की


दशा में जिसके सदस्यों का दायित्व सीमित हो, सदस्यों, भूतपूर्व सदस्यों अथवा मृत सदस्यों की सम्पदाओं से उसके दायित्व की सीमा के अधीन रहते हुए और तृतीयतः अन्य समितियों की दशा में सदस्यों, भूतपूर्व सदस्यों अथवा मृत सदस्यों की सम्पदाओं से वसूल की जा सकती है।
प्रतिबन्ध यह है कि भूतपूर्व सदस्यों का दायित्व तथा मृत सदस्यों की सम्पदायें सभी दशाओं में धारा 23 के उपबन्धों के अधीन रहेंगी।

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1. नई धारा 92-क और 92-ख उ0 प्र0 अधिनियम सं0 8 सन् 2003 द्वारा अधिसूचना सं0 1822/सात-वि-1-1 (क)-33-2002 दिनांक 17 दिसम्बर, 2003 द्वारा बढायी गयी तथा अध्यादेश संख्या 18 सन् 2002 निरस्त किया गया जो उ0 प्र0 असाधारण गजट भाग-1 खण्ड(क) दिनांक 17 दिसम्बर, 2003 को प्रकाशित हुआ (28 अक्टूबर 2002 से प्रभावी)।