धारा-98. अन्य अभिनिर्णयों, आदेशों तथा निर्णयों के विरूद्ध अपील.- (1) निम्नलिखित के विरूद्ध कोई अपील उस आदेश, निर्णय या अभिनिर्णय के जिसके विरूद्ध अपील की जानी हो, संसूचित किये जाने के दिनांक से 30 दिन के भीतर, क्षुब्ध द्वारा उपधारा (2) में उल्लिखित प्राधिकारियों को नियत रीति से की जा सकती है-
(क) धारा 7 की उपधारा (2) के अधीन निबन्धक द्वारा दिया गया ऐसा कोई आदेश जिसमें किसी सहकारी समिति को निबन्धित करने से इन्कार किया गया हो,
1[(ख) निबन्धक का कोई ऐसा आदेश, जिसमें किसी सहकारी समिति की उपविधियों में किसी संशोधन की धारा 12 की उपधारा (3) के अधीन निबद्ध करने से इन्कार किया गया हो, अथवा 14 की उपधारा (2) के अधीन निबद्ध किया गया हो, ,
(ग) किसी सहकारी समिति का कोई निर्णय, जिसमें धारा 26 की उपधारा (2) के अधीन किसी व्यक्ति को समिति का सदस्य बनाने से इन्कार किया गया हो अथवा धारा 27 की उपधारा (1) के अधीन समिति के किसी सदस्य को निकाला गया हो;2[या धारा 38 की उपधारा (1) के अधीन किसी अधिकारी को उसके पद से हटाने के लिए या कोई पद धारण करने से अनर्हित करने के लिए किया गया कोई आदेश बढा दिये जायेंगे]
(घ) धारा 27 उपधारा (2) अधीन किसी सदस्य को निकालने या हटाने अथवा धारा 38 की उपधारा (2) के अधीन सहकारी समिति के किसी अधिकारी को हटाने या अनर्हित करने का निबन्धक का कोई आदेश,
(ड़) धारा 35 के अधीन किसी सहकारी समिति की प्रबन्ध कमेटी को अवक्रान्त करने का निबन्धक का आदेश,
(च) धारा 65 के अधीन की गई किसी जच अथवा धारा 66 के अधीन किये गये किसी निरीक्षक के व्ययों को विभाजित करने का धारा 67 के अधीन निबन्धक द्वारा दिया गया कोई आदेश,

(छ) धारा 68 के अधीन निबन्धक द्वारा दिया गया अधिमान का कोई आदेश,
(ज) धारा 71 की उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन किसी मध्यस्थ या मध्यस्थ मण्डल द्वारा किया गया कोई अभिनिर्णय,
(झ) धारा 72 के अधीन निबन्धक द्वारा किया गया कोई आदेश जिसमें किसी सहकारी समिति के समापन (Amalgamation) का निदेश दिया गया हो,
(ञ) धारा 74 के खण्ड (ख) तथा (छ) द्वारा प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करके सहकारी समिति के परिसमापक द्वारा दिया गया कोई आदेश,
(ट) धारा 92 के खण्ड (ख) के अधीन कार्यवाहियों के सम्बन्ध में पक्षों के मध्य उत्पन्न होने वाले किसी ऐसे प्रश्न पर जो कोड आफ सिविल प्रोसीजर, 1908 (ऐक्ट संख्या 5, 1908) की धारा 47 के निर्दिष्ट प्रकार का हो, निबन्धक द्वारा दिया गया कोई आदेश,
(ठ) धारा 94 के अधीन निबन्धक द्वारा किसी सम्पत्ति की कुर्की के लिए दिया गया आदेश,
(ड़) निबन्धक का धारा 125 के अधीन कोई आदेश जिसमें समामेलन (Amalgamation) या विलयन का निदेश दिया गया हो या धारा 126 के अधीन कोई आदेश जिसमें विभाजन का निदेश दिया गया हो,
(ढ) धारा 128 के अधीन निबन्धक द्वारा किसी संकल्प को रदद करने या किसी आदेश को निरस्त करने के लिए दिया गया आदेश।
(2) उपधारा (1) के 1[खण्ड (घ), (ड़), (च), (छ), (ट) और (ठ)] के अधीन अपील न्यायाधिकरण को प्रस्तुत की जायेगी, और उक्त उपधारा के 2[खण्ड (क), (ख), (ज), (झ), (ञ), (ड) और (ढ) , के अधीन अपील निम्नलिखित को प्रस्तुत की जायेगी-
(क) यदि निर्णय या आदेश निबन्धक द्वारा दिया गया हो तो राज्य सरकार की, अथवा
(ख) यदि निर्णय आदेश या अभिनिर्णय किसी अन्य व्यक्ति या प्राधिकारी द्वारा दिया गया हो तो निबन्धक को।
(3) उपधारा (3) के खण्ड (ख) (ग) यदि आदेश या अधिनिर्णय किसी निर्वाचन के सम्बन्ध में विवाद पर दिया गया हो तो न्यायाधिकरण को किसी बात के होते हुए भी राज्य सरकार गजट में विज्ञप्ति द्वारा, यह निदेश दे सकती है कि उपधारा (1) के खण्ड (ज) में उल्लिखित अभिनिर्णय के विरूद्ध अपील ऐसे मामलों अथवा मामलों के वर्ग के सम्बन्ध में, जो उक्त विज्ञप्ति में उल्लिखित किये जायें, न्यायाधिकरण को की जायेगी और तदुपरान्त ऐसे अभिनिर्णय से क्षुब्ध कोई व्यक्ति न्यायाधिकरण को अपील कर सकता है,
(4) अपीलीय प्राधिकारी इस धारा के अधीन सुनने के पश्चात् ऐसा आदेश दे सकता है जो वह उचित समझे।


टिप्पणी


धारा 98(1) (घ) में सेवा से हटाये जाने के आदेश के विरूद्ध अपील का प्राविधान किया गया है। यह संभव है कि व्यथित कर्मचारी तब तक अपील दायर न कर सके जब तक कि सुसंगत आदेश में अन्तर्शिष्ट तथ्यों का उसका ज्ञान न हो जाये। मर्यादा आदेश का संसूचना के दिनांक से प्रारम्भ होती है। अपील के ज्ञापन में आदेश के संसूचना के दिनांक का विनिर्दिष्ट किया जाना अपेक्षित है, जिससे कि अपील प्राधिकारी मर्यादा की संगणना कर सके। संसूचना का आदेश की अन्तर्वस्तु तथा उसमें दिये गये कारणों के विषय में अधिकृत होना जरूरी है।


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1. उ0 प्र0 अधिनियम सं0 1, 1972 के द्वारा प्रतिस्थापित।
2. उ0 प्र0 अधिनियम सं0 17, 1994 द्वारा बढाया गया (15.7.94)।

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1. अधिनियम सं0 15, 1994 के द्वारा बदल गया (15.7.94)।
2. अधिनियम सं0 17, 1994 द्वारा बढाया गया।