धारा-99. अपीलय अधिकारी के आदेश का पुनर्विलोकन-(1) यथास्थिति धारा, 97 अथवा धारा 98. के अधीन ,अपीलीय प्राधिकारी किसी पक्ष के प्रार्थना-पत्र पर, किसी भी मामले में आदेश का पुनर्विलोकन कर सकता है और उसके सम्बन्ध में ऐसे आदेश दे सकता हे जो वह उचित समझेः
प्रतिबन्ध यह ह कि ऐसा कोई प्रार्थना पत्र तब तक ग्रहण नही किया जायेगा जब तक अपीलीय प्राधिकारी को यह समाधान न हो जाये कि किसी ऐसे नवीन तथा महत्वपूर्ण तथ्य या साक्ष्य का पता लगा है, जो उचित अध्यवसाय के पश्चात भी यार्थी की जानकारी में नही थी, अथवा वह उसे उस समय प्रस्तुत नही कर सकता थ जब अपीलीय प्राधिकारी द्वारा आदेश दिया गया था अथवा यह समाधान न हो जाये कि ऐसी कोई गलती या त्रुटि हुई है जो अभिलेख में प्रत्यक्ष है अथवा यह कि कोई अन्य पर्याप्त कारण विद्यमान हैः
प्रतिबन्ध यह भी है ‍ि इस उपधारा के अधीन उस समय तक कोई ऐसा आदेश नही दिया जायेगा जब तक कि समस्त हितबद्ध पक्षों को नोटिस न दे दिया गया हो और उन्हें सुनवाई  के लिए समुचित अवसर प्रदान न कर दिया गया हो।
(2) किसी पक्ष द्वारा उपधारा (1) के अधीन पुनर्विलोकन के लिए कोई प्रार्थना-पत्र अपीलीय प्राधिकारी के उस आदेश के, जिसका पुनर्विलोकन अवांछित हो, संसुचित किये जाने के दिनांक से तीस दिन के भीतर दिया जायेगा।