धारा-103. अधिनियम के अधीन अपराध
-(1) इस अधिनियम के अधीन अपराध होगा, यदि-
(i) किसी सहकारी समिति की प्रबन्ध कमेटी या उसका कोई सदस्य या अधिकारी निबन्धक या निबन्धक द्वारा तदर्थ यथाविधि प्राधिकृत व्यक्ति द्वारा जो राज्य सरकार द्वारा, निर्दिष्ट पद से नीचे के पद का न हो, इस अधिनियम के अधीन उचित कारण के बिना अपेक्षित कोई विवरणी, प्रतिवेदन या सूचना प्रस्तुत न करे या जान बूझ कर मिथ्या विवरणी तैयार करे या मिथ्या सूचना दे या समुचित लेखे न रखे, या
(ii) किसी सहकारी समिति का कोई अधिकारी,कर्मचारी या सदस्य सहकारी समिति की बहियों, पत्रादि या प्रतिभूतियों की कपटपूर्ण टंग से नष्ट करे, विकृत करे,उनमें परिवर्तन करे, कूटकरण (falsify) करे या उनके नाश विकृति परिवर्तन,कूटकरण के लिए अभिप्रेत करे या किसी समिति के रजिस्टर, लेखा बही या लेख्य में कोई मिथ्या प्रविष्टि रे या करने के लिये अभिप्रेरित करे, या
(iii) किसी सहकारी समिति की प्रबन्ध कमेटी या कोई  अधिकारी जिसके कब्जे में समिति की बहियॉ, अभिलेख या सम्पत्ति हो, समिति क ऐसी बहियों और अभिलेखों और सम्पत्ति की अभिरक्षा ऐसे व्यक्ति को सौपने से इन्कार करे या उचित कारण के बिना न सौपे जो इस अधिनियम, नियम या उपविधियों के अधीन उन्हें लेने के लिए विधितः हकदार हो, या
(iv) किसी सहकारी समिति की प्रबन्ध कमेटी या कोई अधिकारी कारण के बिना अपने कर्मचारियों के लिए धारा 63 के अधीन अपेक्षित अंशदायी भविष्य निधि की स्थापना न करे, या
(v) सहकारी समिति का कोई अधिकारी ऐसे लेखे और रजिस्टर न रखे जो नियम किये जाये, या
(vi) सहकारी समिति का कोई ऐसा अधिकारी या सदस्य जिसके कब्जे में सूचना बहियॉ और अभिलेख हो, लेखा परीक्षा के लिए धारा 64, की उपधारा (1) के अधीन राज्य सरकार द्वारा नियुक्त व्यक्ति या उसके द्वारा प्राधिकृत किसी अन्य व्यक्ति को अथवा निबन्ध या धारा 64,65,66,73 या 123 के अधीन नियुक्त या प्राधिकृत व्यक्तियों को उचित कारण के बिना उक्त सूचना न दे या बहियॉ और पत्रादि प्रस्तुत न करे या सहायता न दे, या
(vii) कोई सेवायोजक पर्याप्त कारण के बिना किसी सहकारी समिति को धारा 40की उपधारा (2) के अधीन अपने द्वारा कटौती की गई धनराशि का उस दिनांक से जब वह कटौती की गई हो, 14 दिन की अवधि के भीतर भुगतान न करे, या
(viii) किसी सहकारी समिति का कोई अधिकारी या सदस्य या कोई अन्य ऐसा कार्य या कार्यालीय करे जो नियमो द्वारा अपराध घोषित किया गया हो।

(2) (क) कोई भी व्यक्ति जो उपधारा (1) के खण्ड 1,2,5 [*  *  *] 7 या 8 के अधीन अपराध करे उसे सिद्ध दोष ठहराये जाने पर अर्थदण्ड दिया जायेगा, 2[जो दो हजार रूपये तक हो सकता है।
 


1 [प्रतिबन्ध यह है कि कोई व्यक्ति, जो निर्वाचन के सम्बन्ध में ऐसा कार्य करता है जो नियमों के अधीन अपराध हो, वह नियमों में तथा उपबन्धित दो वर्ष से अनधिक कारावास से या पांच हजार रूपये से अनधिक के अर्थदण्ड से, या दोनों से दण्डनीय होगा]

2 [(ख) कोई भी व्यक्ति जो उपधारा (1)से खण्ड (2) खण्ड (3) या खण्ड (6) के अधीन अपराध करता है दोष सिद्ध पर किसी प्रकार के कारावास के दण्ड को भागी होगा जो दो वर्ष तक हो सकता है और अर्थदण्ड का भी भागी होगा जो तीन हजार रूपये तक हो सकता है;
(ग) खण्ड (ख) में निर्दिष्ट प्रत्येक अपराध संज्ञेय और जमानतीय होगा।]

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1.उ0प्र0 अधिनियम सं0 12,1976 के द्वारा निकाल दिये गये (3.10.1975 से प्रभावी)।
2. उ0प्र0 अधिनियम सं0 4, 1989 के द्वारा प्रतिस्थापित।