धारा-3[104क. पराधों का शमन-(1) निबन्धक, इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय किसी अपराध का शमन, अभियोग संस्थित किये जाने के पूर्व या पश्चात प्रशमन शुल्क की ऐसी धनराशि वसूल करने के पश्चात कर सता है जैसी वह उचित समझे,और यदि वह अपराध केवल जुर्माने से दण्डनीय हो तो प्रशमन शुल्क अपराध के लिए निर्धारित अधिकतम जुर्माने की धनराशि से अधिक नही होगा।
(2) जहॉ अपराध का इस प्रकार शमन-
(क) अपराध संस्थित किये जाने के पूर्व किया जाये, वह अपराधी को ऐसे अपराध के लिए अभियोजित नही किया जायेगा और यदि अभिरक्षा में हो तो उसे मुक्त कर दिया जाये,
(ख) अभियोग संस्थित किये जाने के पश्चात किया जाये, वह ऐसे शमन का प्रभाव अभियुक्त को दोष मुक्ति होगा।]