धारा-115. सहकारी समितियों की बहियों में प्रविष्टि की सिद्वि-(1) किसी सहकारी समिति की बही, जो उसके कार्य सम्पादन के सम्बन्ध में नियमित रूप से रखी जाती हो, किसी प्रविष्टि की प्रतिलिपि, यदि वह उस रीति से प्रमाणित की गयी हो, जो नियम की जाये, किसी वाद या विधिक कार्यवाही में उसमें अभिलिखित विषयों, व्यवहारों और लेख्यों के प्रथम दृष्टया साक्ष्य के रूप में उसी प्रकार तथा उसी सीमा तक ग्रहण की जायेगी जिस प्रकार और जिस सीमा तक मूल प्रविष्ट ग्राहय (admissible ) होती।
(2) कोई सहकारी समिति किसी ऐसे लेख्य की प्रतिलिपियॉ जो उसने अपने कार्य सम्पादन के सम्बनध में प्राप्त किया और रखा हो, या उस लेख्य की किन्ही प्रविष्टियों की प्रतिलिपियॉ दे सकती है और दी गई कोई प्रतिलिपि, जो ऐसी रीति से प्रमाणित की गयी हो, जो निय की जाये, किसी भी प्रयोजन के लिए उसी प्रकार और उसी सीमा तक साक्ष्य में ग्राहय होगी जिस प्रकार और जिस सीमा तक यथास्थिति मूल लक्ष्य या उसकी प्रविष्टियॉ ग्राहय होती।
(3) सहकारी समिति के किसी अधिकारी को और ऐसे अधिकारी को, जिसके कार्यालय में समापन के पश्चात किसी सहकारी समिति की बहिय जमा हो, किसी ऐसी विधिक कार्यवाही में जिसमें उक्त सहकारी समिति या परिसमापक एक पक्ष न हो समिति की बहिय या लेख्य , जिनकी अन्तर्वस्तु को इस धारा के अनुसार सिद्ध  किया जा सकें, प्रस्तुत करने या उसमें अभिलिखित विषयों, व्यवहारों और लेखों को सिद्ध  करने के लिए साक्षी के रूप में उपस्थिति होने के लिए बाध्य नही किया जायेगा, सिवाय उस दशा के जब किसी विशेष कारण के न्यायालय, न्यायाधिकरण, निबन्ध या मध्यस्थ तदर्थ आदेश दिया हो।
--------------------------
1.धारा 113 अधिनियम सं0 17,1994 द्वारा निकाला गया (15.7.94)।