धारा-122. सहकारी समिति के कर्मचारियों पर नियन्त्रण रखने वाला प्राधिकारी-(1) राज्य सरकार ऐसी रीति से जो निय की जाये, सहकारी समितियों, या सहकारी समितियों के वर्ग के कर्मचारियों की भर्ती, प्रशिक्षण तथा अनुशासनिक नियन्त्रण के लिए प्राधिकारी या प्राधिकारियों का संघटन कर सकती है और ऐसे प्राधिकारी या प्राधिकारियों से इस बात की अपेक्षा कर सकती ह ‍ि वह या से कर्मचारियों की भर्ती, उपलब्धियों और सेवा की शर्तो के सम्बन्ध में, जिनके अन्तर्गत अनुशासनिक नियन्त्रण भी ह, और धारा 70 के उपबन्धों के अधीन रहते हुये सहकारी समिति के कर्मचारी तथा समिति के बीच विवादों में निपटाने के सम्बन्ध में विनियम बनाये।
(2) उपधारा (1) के अधीन बनाये गये विनियम राज्य सरकार के अनुमोदनाधीन होगे और ऐसे अनुमोदन के पश्चात गजट में प्रकाशित किये जायेगे तथा प्रकाशन के दिनांक से प्रभावी होगे और धारा 121 के अधीन बनाये गये किन्ही विनियमों का अतिक्रमण करेगे।


टिप्पणी



धारा 122, 128 उ0प्र0 सहकारी समिति विनियमावली 1975, विनियम 86 निबन्धक की शक्ति अपर निबन्धक सकारी समिति के बिक्रीकर्ता (salesman) की सेवा समाप्त कर दी। अधिनियम अथवा नियमावली में या समिति की किसी उपविधि में कोई उपबन्ध या सिद्ध   करने के लिए नही है कि निबन्धक अपेक्षित आदेश को रद्द कर सकता है। इस मामले में हस्तक्षेप करने का कोई औचित्य नही है।
सुरेन्द्र प्रताप सिंह बनाम निबन्धक सहकारी समिति, 1986 ए0एल0जे0 70:1986 यू0पी0एल0सी0 132 :1986 (1) लैण्ड एल0आर0 286।