धारा-123.सहकारी समितियों के कार्य संचालन का पर्यवेक्षण करने के लिये सहकारी संघ प्राधिकारी का संघटन या उसे मान्यता देना-(1) राज्य सरकार, सहकारी समितियों या सहकारी समितियों के वर्ग के पर्यवेक्षण के लिए एक या एक से अधिक सहकारी संघ प्राघिका‍रियों को ऐसी रीति से जो निय की जाये और शर्तो के अधीन रहते हुये जो राज्य सरकार आरोपित करे, संघटित कर सकती है, अथवा उसे या उन्हें मान्यता दे सकती है तथा ऐसे प्राधिकारी या प्राघिका‍रियों को निय रीति से ऋण अथवा राज्य सहायता दे सकती है।
(2) राज्य सरकार, सामान्य या विशेष आदेश द्वारा, सहकारी समिति या सहकारी समितियों के वर्ग से यह अपेक्ष कर सकती हे ‍ि वह उपधारा (1) में उल्लिखित संघ प्राधिकारी या प्राधिकारियों द्वारा समितियों के पर्यवेक्षण के सम्बन्ध में किये गये या किये जाने वाले सम्भाव्य व्यय की पूर्ण अथवा आंशिक प्रतिपूर्ति (Recoupment) करने के लिए प्रत्येक वर्ष ऐसी धनराशि का अंशदान करे जो निबन्धक द्वारा निश्चित की जाये।
(3) सहकारी समिति, जिस पर उपधारा (2) प्रवृत हो, ऐसे प्राधिकारी या प्राधिकारियों को ऐसे समय के भीतर, जो निबन्धक द्वारा निश्चित किया जाये, ऐस अंशदान का भुगतान करेगी जो उक्त उपधारा के अधीन निश्चित किया जाये र यदि वह उक्त समय के भीतर उक्त भुगतान न करे तो वह धनराशि प्राधिकारी या प्राधिकारियों द्वारा निबन्धक के माध्यम से उस जिले के जिसमें बाकीदार सहकारी समिति का निबद्ध  कार्यालय स्थित हो, कलेक्टर को अधियाचन करने पर मालगुजारी की बकाया के रूप में वसूल किया जायेगा।
(4) उपधारा (1) में उल्लिखित संघ प्राधिकारी या प्राधिकारियों का कोई अधिकारी या आधिकारीगण निबन्धक द्वारा सामान्य या विशेष लिखित आदेश द्वारा ऐसी सहकारी समिति या सहकारी समिति वर्ग का निरीक्षण करने के लिए प्राधिकृत किया जा सकता है या किये जा सकते है जिसका या जिनका पर्यवेक्षण उपधारा (1) के अधीन संघ प्राधिकारी या प्राधिकारियों को सौपा गया हो, किन्तु प्रतिबन्ध यह है कि ऐसा अधिकार अथवा ऐसे अधिकारी,ऐसे अधिकारों का प्रयोग करने में निबन्धक, के सामान्य पथ प्रदर्शन अधीक्षण और नियन्त्रण के अधीन काम करेगे और निरीक्षण के परिणाम की सूचना निबन्धक को देंगे।