धारा-126. किसी सहकारी समिति को दो या अधिक सहकारी समितियों के विभाजित करने का निदेश देने का निबन्धक का अधिकार-(1) यदि निबन्धक की यह राय हो कि लोकहित में या सहकारिता आन्दोलन के हित में यह आवश्यक ह या सहकारी समिति के अच्छे प्रबन्ध को सुनिश्चित करने के लिए यह वांछनीय ह कि दो या अधिक समितिय बनाई जाने के लिए किसी सहकारी समिति का विभाजन किया जाना चाहिये तो वह, इस अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी, उस वित्त पोषण बेंक से यदि कोई हो, परामर्श करने के पश्चात जिसकी उक्त समिति ऋणी है, ऐसी समिति का दो या अधिक समितियों में ऐसे संघटनों, परिसम्पत्तियों, दायित्वों, अधिकारो, कर्तव्य  और आभारों के साथ, जो आदेश में निर्दिष्ट किये जाये विभाजित होने का लिखित आदेश दे सकता है और तदुपरान्त उक्त समिति ऐसी समस्त कार्यवाहीय करेगी जो धारा 16 के उपबन्धो के अनुसार उस प्रयोजन के लिए आवश्यक हों।

(2) उपधारा (1) के अधीन दिये गये आदेश के अनुसार समिति का विभाजन न होने पर निबन्धक, [* * *] लिखित आदेश द्वारा समिति को दो या अधिक समितियों में विभाजित होने का निदेश दे सकता है।
(3) उपधारा (2) के अधीन निबन्धक का निदेश, धारा 16 के लिए सम्बद्ध समिति का प्रारम्भिक संकल्प समझा जायेगा, और निबन्धक ऐसी अतिरिक्त कार्यवाहियॉ करेगा जो उस धारा द्वारा अपेक्षित हो
(4) 2[धार 15 की उपधारा (2) के खण्ड (क) के अधीन प्रारम्भिक संकल्प की प्रति प्राप्त होने के दिनांक से या, यथास्थिति उक्त उपधारा के खण्ड (ख) के अधीन किसी समाचार पत्र में उसके प्रकाशन के दिनांक से तीस दिन] व्यतीत हो जाने के पश्चात निबन्धक सम्बद्ध समिति की निधियों से धारा 41 के उपबन्धों के अधीन रहते हुये, समस्त सदस्यों की अंशपूजी का प्रतिदान करेगा और ऐसे समस्त ऋणदाताओं के दावों को चुकता करेगा, जिन्होने धारा 16 की उपधारा (3) के क्रमशः खण्ड (1)या (2) के अधीन नोटिस दिया हो और तदुपरान्त नयी समितियों तथा उनकी उपविधियों को निबन्धित करेगा। इस प्रकार निबन्धन हो जाने पर पुरानी समिति का निबन्धन रद्द किया समझा जायेगा।
(5) उपधारा (4) के अधीन सभी समितियों का निबन्धन, धारा 16 के अधीन निबन्धन समझा जायेगा और उस धारा की उपधारा (7) के उपबन्ध उन पर प्रवृत्त होंगे।

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1. नई धारा 125 क उ0प्र0 अधिनियम संख्या 29 सन् 2007 अधिसूचना सं0 2364/79-1-07-1 (क) 42-2007 दिनांक 19 नवम्बर 2007 द्वारा प्रतिस्थापित की गयी जो उ0प्र0 असाधरण गजट भाग-1 खण्ड (क) दिनांक 19 नवम्बर 2007 को प्रकाशित हुआ (1 जुलाई 2007 से प्रभावी)