धारा-128. कतिपय मामलों में सहकारी समिति के संकल्पों को निष्प्रभाव करने या सहकारी समिति के किसी अधिकारी के आदेश को रद्द करने का निबन्धन का अधिकार-निबन्धक-(1) किसी सहकारी समिति की प्रबन्ध कमेटी या उसके सामान्य निकाय द्वारा पारित किसी संकल्प को निष्प्रभाव (annul) कर सकता है; या
(2) सहकारी समिति के किसी अधिकारी द्वारा दिये गये आदेश को रद्द कर सकता है।
यदि उसकी यह राय हो कि यथास्थिति, संकल्प या आदेश समिति के उद्देश्यों के अन्तर्गत नही है या अधिनियम, नियमों अथवा समिति की उपविधियों के उपबन्धों के प्रतिकूल है तदुपरान्त प्रत्येक संकल्प या आदेश शून्य (void) तथा अप्रवर्ती (inoperative) हो जायेगा और समिति के अभिलेखों से निकाल दिया जायेगा।
3[प्रतिबन्ध यह है कि निबन्धक, कोई आदेश करने के पूर्व सहकारी समिति की प्रबन्ध कमेटी सामान्य निकाय या अधिकारी से, ऐसी अवधि जो वह निश्चित करे, किन्तु जो पन्द्रह से कम न होगी, के भीतर यथास्थिति,प्रस्ताव पर, या आदेश पर पुनर्विचार किए जाने की अपेक्षा करेगा, और यदि वह ठीक समझे तो वह ऐसी अवधि के दौरान उस प्रस्ताव या उस आदे के प्रर्वतन को स्थगित कर सकता है]

 


टिप्पणी



किसी मामले में यदि वह संदर्शित किया जा सके कि राय मनमाने ढंग से तथा सुसंगत सामग्री पर विचार किये बिना ही बनाई गई है तो न्यायालय तथाकथित राय में हस्तक्षेप करने और से अभिखण्डित करने के लिए पूर्णतया सक्षम होगा।
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1.उ0प्र0 अधिनियम सं0 12,1976 द्वारा निकाल दिये गये (3.10.1975 से प्रभावी)
2. उ0प्र0 अधिनियम सं0 12,1976 द्वारा रखे गये (3.10.1975 से प्रभावी)
3. उ0प्र0 अधिनियम सं0 17,1994 द्वारा बढाया गया (15.7.94)