धारा-131. वर्तमान समितियों तथा उनकी उपविधियों के सम्बन्ध में उपबन्ध-(1) प्रत्येक ऐसी सहकारी समिति के सम्बन्ध में जो इस अधिनियम के प्रचलित होने के दिनांक को वर्तमान हो तथा जो कोआपरेटिव क्रेडिट सोसाइटीज ऐक्ट, 1904 (ऐक्ट संख्या 10,1904) या (कोआपरेटिव सोसाइटीज ऐक्ट, 1912) (ऐक्ट संख्य 2, 1912) अथवा उत्तर प्रदेश राज्य में प्रचलित सवहकारी समिति विषयक किसी अन्य विधि के अधीन निबन्धित हो, यह समझा जायेगा ‍ि वह  इस अधिनियम के अधीन निबन्धित हे तथा उसकी उपविधिय जह तक वे इस अधिनियम 1[या इसके अधीन बनाये गये नियमों, के व्यक्त उपबन्धों से असंगत न हो, तब तक प्रचलित रहेगी जब तक कि उन्हे [इस अधिनियम और इसके अधीन बनाये गये नियमों के उपबन्धों के अनुसार] परिवर्तित या विखंडित न कर दिया जायें।
(2) कोई सहकारी समिति जिस पर उपधारा (1) प्रवृत्त  होती है और जो धारा 77 की अपेक्षाओं के अनुसार हो, अध्याय 11 के प्रयोजनों के लिए सहकारी कृषि समिति समझ जायेगी।
(3) उपधारा (1) के अन्तर्गत आने वाली प्रत्येक सहकारी समिति इस अधिनियम के प्रचलित होने के दिनांक से एक वर्ष की अवधि के भीतर उन उपविधियों को, इस अधिनियम और नियमों के उपबन्धों से असंगत हो, निकल देगी या संशोधित कर देगी और इस अधिनियम और नियमों के उपबन्धो को ध्यान में रखकर ऐसी ओर उपविधियॉनायेगी, जो आवश्यक हों।
(4) किसी सहकारी समिति की ओर से उपधारा (3) द्वारा अपेक्षित कार्य न किये जाने पर, निबन्धक समिति की उपविधियों में आवश्यक संशोधन कर सकता है, जिसके अन्तर्गत उसमें से उपविधियों का निकाला जाना और उसमें उपविधियों का बढाया जाना भी है।
(5) प्रत्येक सहकारी समिति इस अधिनियम के प्रचलित होने के दिनांक से एक वर्ष की अवधि के भीतर या ऐसी अतिरिक्त अवधि के भीतर जिसकी अनुज्ञा निबन्धक, कारणों को अभिलिखित करके, किसी सहकारी समिति या, सहकारी समिति के, किसी वर्ग को दें अपनी सदस्यता का समायोजन इस अधिनियम के अधीन सदस्यों के वर्गीकरण के अनुसार करेगीः
प्रतिबन्ध यह है कि ऐसे वर्तमान सदस्य के सम्बन्ध में जिसका समायोजन किसी प्रकार की सदस्यता में नही किया जा सकता एक वर्ष की अवधि या बढ़ायी गयी अवधि, यदि कोई हो, के व्यतीत होने पर यह समझा जायेगा कि उसने समिति की सदस्यता छोड़ दी है ओर उसके वही अधिकार तथा दायित्व होगे मानो उसने इस अधिनियम के प्रचलित होने के पूर्व सदस्यता छोड़ दी हो।
(6) यदि सहकारी समिति उपधारा (5) में निर्दिष्ट सदस्यता का समायोजन करने में चूक करे तो निबन्धक समायोजन कर सकता है और यह निदेश दे सकता है कि वर्तमान सदस्यों में से किन सदस्यों के सम्बन्ध में, यदि कोई हों, यह समझा जायेगा कि उसने उपधारा (5) के उपबन्धों के अधीन अपनी सदस्यता छोड़ दी है।


(7)प्रत्येक सहकारी समिति इस अधिनियम के प्रचलित होने के दिनांक से एक वर्ष के भीतर इस अधिनियम तथा नियमों के उपबन्धों के अनुसार अपनी प्रबन्ध कमेटी संघटित करेगी और उसके ऐसा न करने पर निबन्धक, नियत रीति से कमेटी संघटित करेंगा।
(8)इस अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी, सहकारी समिति या उसकी प्रबन्ध कमेटी का कार्य या कार्यवाही केवल इस आधार पर अवैध न होगा अथवा उस न्यायालय में आपत्ति न की जायेगी  कि इस धारा के उपबन्धों के अनुसार सदस्यता समायोजन या प्रबन्ध कमेटी के पुनः संघटन के समय तक समिति की सदस्यता या उसकी प्रबन्ध कमेटी का संघटन इस अधिनियम या नियमों के उपबन्धों से असंगत था।


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1.उ0प्र0 अधिनियम सं0 17,1977 द्वारा बढा दिये गये।