धारा-134. निरसन संशोधन तथा अधिनियमितियाओं का अन्वय लगाना-(1) उत्तर प्रदेश में अपनी प्रवृत्ति के सम्बन्ध में यथा संशोधित कोआपरे‍टिव सोसाइटीज ऐक्ट, 1912 (ऐक्ट संख्या 2, 1912) एतद्द्वारा निरस्त किया जाता है तथा यू0पी0 जनरल क्लाजेज ऐक्ट, 1904 (यू0पी0 ऐक्ट संख्या 1, 1904) की धारा 6 तथा 24 के उपबन्ध कोआपरेटिव सोसाइटीज ऐक्ट 1912 के निरसन पर उसी प्रकार प्रवत्त होंगे मानों वह उत्तर प्रदेश का कोई अधिनियम होः
(2) कोआपरेटिव सोसायटीज ऐक्ट, 1912 (ऐक्ट संख्या 2, 1912) के प्रति समस्त अभिदेश जो किसी ऐसी अधिनियमित में आये हों जिसे भारत के किसी प्राधिकारी ने बनाया हो और जो तत्समय उत्तर प्रदेश राज्य में प्रचलित हो, उक्त राज्य में अपनी प्रवृत्ति के सम्बन्ध में इस अधिनियम के संगत उपबन्धों के अभिदेश समझे जायेगे।
(3) 1950 ई0 के उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश और भूमि व्यवस्था अधिनियम (1951 ई0 का उत्तर प्रदेश अधिनियम संख्या 1) की धारा 295 से 318 तक निरस्त की जाती है।
(4) 1950 ई0 के उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश और भूमि सुधार अधिनियम (1951 ई0 का उत्तर प्रदेश अधिनियम संख्या 1) में दिये गये सहकारी फर्मो के समस्त अभिदेश, इस अधिनियम

के अधीन निबन्धित अथवा निबन्धित समझे गये सहकारी कृषि समितियों के अभिदेश समझे जायेगे।
(5) उत्तर प्रदेश ( गन्ना पूर्ति तथा खरीद अधिनियम, 1953 ई0 (उत्तर प्रदेश अधिनियम संख्या 24, 1953 ई0), एतद्द्वारा निम्नलिखित रूप से संशोधित किया जाता है-

 
संशोधन उपबन्ध    संशोधन
उपधारा 2 की उपधारा (1) वर्तमान खण्ड (ढ) के स्थान पर निम्नलिखित रख दिया जाये-इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिये परिषदों का संगठन,संचालन
प्रबन्ध पर्यवेक्षण तथा लेखा परीक्षतथा उनके कर्मचारियों एवं वित्तीय व्यवस्था (Finances) पर नियन्त्रण और यू0पी0केन यूनियन फेडरेशन तथा गन्ना उत्पादकों की सहकारी समितियों की मान्यता के सम्बन्ध में शर्ते।

(2)खण्ड (द) के वर्तमान उपखण्ड(1) के स्थान पर निम्नलिखित रख दिया जाये-


(1)जो गन्न उत्पादकों की सहकारी समिति के कार्य के विषय में संस्था और फैक्ट्री या गन्ना उत्पादक और फैक्ट्री के बीच में हों।


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1. उ0प्र0 अधिनियम सं0 17,1977 द्वारा बदला गया।