धारा-11. दायित्व पर परिवर्तन- (1) इस अधिनियम तथा नियमों के उपबन्धों के अधीन रहते हुए सहकारी समिति, अपनी उपविधियों में संशोधन करके अपने दायित्वों के स्वरूप या उनकी आयत्ति में परिवर्तन कर सकती है।
(2) यदि सहकारी समिति ने अपने दायित्वों के स्वरूप या उनकी आपत्ति में परिवर्तन करने के लिए संकल्प पारित किया हो तो वह उसका लिखित नोटिस अपने सभी सदस्यों और ऋण दाताओं को देगी तथा किसी प्रतिकूल उपविधि या संविदा के होते हुए भी, किसी सदस्य या ऋणदाता को उस पर नोटिस तामील होने के दिनांक से तीन मास की अवधि के भीतर धारा 41 के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, यथास्थिति अपने अंशों, जमा की गयी धनराशियों या ऋणों को वापस लेने का विकल्प प्राप्त होगा।
(3) किसी ऐसे सदस्य या ऋण दाता के संबंध में, जो उप धारा (2) में निर्दिष्ट अवधि के भीतर विकल्प का प्रयोग न करे, यह समझा जायेगा कि उसने परिवर्तन के लिए सहमति दे दी है।
(4) किसी सहकारी समिति की उपविधियों का ऐसा संशोधन जिसके द्वारा उसके दायित्व के स्वरूप या उसकी आपत्ति में परिवर्तन किया गया हो, उस समय तक निबन्धित नहीं किया जायेगा जब तक कि -
(क) उसके लिए समस्त सदस्यों तथा ऋणदाताओं की सहमति प्राप्त  न हो जाये या प्राप्त हुई न समझी जाए, अथवा
(ख) ऐसे सदस्यों तथा ऋण दाताओं के समस्त दावों की पूर्ति, जो उप धारा (2) में निर्दिष्ट विकल्प का प्रयोग उसमें उल्लिखित अवधि के भीतर करें, पूरी तौर से न कर दी गयी हो।