धारा-12. सहकारी समिति की उपविधियों का संशोधन - (1) सहकारी समिति इस अधिनियम तथा नियमों के उपबन्धक के अधीन रहते हुए निय रीति से अपनी उपविधियों का संशोधन कर सकती है।
प्रतिबन्ध यह है कि ऐसा कोई संशोधन तब तक वैध प्रवर्ती न होगा जब कि वह (संशोधन) इस अधिनियम के अधीन निबन्धित न हो जाये।
(2) उपविधियों को संशोधित करने का प्रस्ताव निबन्धक के पास भेजा जायेगा और यदि निबन्धक का यह समाधान हो जाये कि प्रस्तावित संशोधन -
(1) अधिनियम की धारा 4 में निर्दिष्ट उददेश्यों के प्रतिकूल नहीं है, तथा
1(2) अधिनियम या नियमावली के अन्य उपबन्धों के प्रतिकूल नहीं है तो वह ऐसा प्रस्ताव प्राप्त होने के दिनांक से एक माह के भीतर संशोधन निबन्धित करेगा। यदि निबन्धक एक माह के भीतर संशोधन को निबन्धित नहीं करता है तो यह मान लिया जायेगा कि उसने संशोधन को निबन्धित करने से मना कर दिया है और ऐसी दशा में निबन्धक के लिये यह बाध्यकारी होगा कि वह संशोधन निबन्धित न करने के कारणों से अगले एक माह के अन्दर समिति संसूचित करे।
2(3) यदि निबन्धक किसी सहकारी समिति की उपविधियों के संशोधन को निबन्धित करने से इन्कार करे तो वह इन्कार करने के आदेश को उसके कारणों सहित समिति को संसुचित करेगा।



1. उ0 प्र0 अधिनियम सं0 47, 2007 द्वारा उपधारा (2) में खण्ड(2) प्रतिस्थापित जो उ0 प्र0 असाधारण गजट भाग-1 खण्ड(क) दिनांक 10 दिसम्बर 2007 को प्रकाशित हुआ।
2. उ0 प्र0 अधिनियम सं0 47, 2007 द्वारा उपधारा (2) में खण्ड(3) निकाल दिया गया जो उ0 प्र0 असाधारण गजट भाग-1 खण्ड(क) दिनांक 10 दिसम्बर 2007 को प्रकाशित हुआ।