धारा-15. सहकारी समिति का समामेलन और विलयन - (1) निबन्धक को यथाविधि सूचित करने के पश्चात् कोई दो या अधिक सहकारी समि‍तियॉ इस प्रयोजन के लिए बुलाई गयी अपनी-अपनी साधारण सामान्य बैठक में, जिसके लिए उनके सदस्यों को कम से कम पूरे पन्द्रह दिन का नोटिस दिया जायेगा, उपस्थित सदस्यों के कम से कम दो तिहाई के बहुमत से एक समिति में समामेलित (Amalgamet), होने का या उनमें से किसी एक में विलीन होने का संकल्प कर सकती है। ऐसे संकल्प (जिसे आगे प्रारम्भिक संकल्प कहा गया है) में यथास्थित, समामेलन या विलयन की दशा में चालू रहने वाली समिति को उसकी परिसम्मितियों तथा दायित्वों का संक्रमण और ऐसी समिति की उपविधिय भी हैं।
2(2) इस अधिनियम के किसी अन्य उपबन्ध के या किसी समिति की किसी उपविधि के होते हुए भी उपधारा (1) या उपधारा (4) में निर्दिष्ट किसी बैठक की नोटिस सम्बद्ध समितियों के सदस्यों को दी जायेगी। और प्रारम्भिक संकल्प की प्रतियां ऐसी समितियों के सदस्यों और ऋण दाताओं पर निम्नलिखित किसी एक या अधिक रीति से तामील की जायेंगी, अर्थात्
(क) लिखित अभिस्वीकृत प्राप्त करके व्यक्तिगत तामील द्वारा, या
(ख) जिस व्यक्ति के खण्ड(क) के अधीन लिखित रूप से प्राप्ति अभिस्वीकृति की हो उसका अपवाद करके, प्रत्येक व्यक्ति के पते पर, जैसा समिति के अभिलेख में उल्लिखित हो, प्रेषण प्रमाण पत्र के अधीन डाक द्वारा, और किसी ऐसे समाचार पत्र में जिसका समिति के कार्यक्षेत्र परिचलन हो प्रकाशक द्वारा भी है।

(3)(1) ऐसी किसी समिति का कोई सदस्य इसके प्रतिकूल कोई उपविधि होने पर भी
3(उपधारा(2) के खण्ड (क) के अधीन प्रारम्भिक संकल्प की प्रति प्राप्त होने के दिनांक से या, यथास्थिति, उक्त उपधारा के खण्ड(ख) के अधीन किसी समाचार पत्र में उसके प्रकाशन के दिनांक से तीन दिन की अवधि के भीतर नोटिस द्वारा उस समिति को जिसका वह सदस्य हो, समामेलन की दशा में नयी समिति का सदस्य न बनने अथवा विलयन की दशा में चालू रहने वाली समिति का सदस्य न होने या न रहने के विचार की सूचना दे सकता है।
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1. उत्तर प्रदेश अधिनियम सं0 1, 1972 के द्वारा निरस्त।
2. उ0 प्र0 अधिनियम सं0 12, 1976 के द्वारा रखे गये (3.10.1975 से प्रभावी)।
3. उ0 प्र0 अधिनियम सं0 12, 1976 के द्वारा रखे गये (3.10.1975 से प्रभावी)।


(2) ऐसी किसी समिति का कोई ऋणदाता इसके प्रतिकूल कोई अनुबन्ध होते हुए उस समिति को, जिसका वह ऋणदाता हो, उक्त अवधि के भीतर नोटिस देकर अपनी शेष धनराशि मांगने के अपने विचार की सूचना दे सकता है।
(4) 1 [उपधारा (3) के खण्ड (1) मे निर्दिष्ट अवधि के] व्यतीत होने के पश्चात् उन समितियों के सदस्यों की संयुक्त बैठक, जिसके लिए उन्हें कम से कम पूरे पन्द्रह दिन का नोटिस दिया जायेगा, प्रारम्भिक संकल्प पर विचार करने के लिए बुलाई जायेगी। यदि उस बैठक में प्रारम्भिक संकल्प की पुष्टि परिवर्तनों के बिना अथवा ऐसे परिवर्तनों के साथ जो निबन्धक की राय में (अन्तिम होगी) महत्वपूर्ण न हो, उपस्थित सदस्यों के कम से कम दो तिहाई के बहुमत से पारित संकल्प द्वारा कर दी जाये तो वह-
(1) समामेलन की दशा में उपधारा (5) तथा (6) और धारा 7 के उपबन्धों के अधीन रहते हुए नयी समिति और उसकी उपविधियों को निबन्धित करेगा, तथा
(2) विलयन की दशा में उपधारा (5) तथा (6) के उपबन्धों के अधीन रहते हुए उस पर अपनी स्वीकृति देगा।
स्पष्टीकरण - इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए पद सदस्यों के अन्तर्गत सदस्यों के ऐसे प्रतिनिधि (delegates) भी होंगे ज तदर्थ बनाये गये नियमों के अनुसार इस प्रयोजन के लिए चुने गये हों।
(5) उपधारा (4) के अधीन प्रारम्भिक संकल्प की पुष्टि करते समय अन्य संकल्प द्वारा निम्नलिखित के लिए व्यवस्था की जायेगी:
(1) धारा 41 के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, उन समस्त सदस्यों की अंशपूंजी का प्रतिदान जिन्होंने उप धारा (3) के खण्ड (1) के अधीन नोटिस दिया हो, और
(2) उन सभी ऋण दाताओं के दावों की पूर्ति जिन्होंने उप धारा (3) के खण्ड (2) के अधीन नोटिस दिया हो।
(6) यदि ऐसे समय के भीतर, जिसे निबन्धक उचित समझे, उपधारा (5) में अभिदिष्ट सदस्यों की अंशपूंजी का प्रतिदान, अथवा उस उपधारा में अभिदिष्ट ऋणदाताओं के दावों की पूर्ति नहीं की जाती है, तो निबन्धक नयी समिति को यथा स्थिति, निबन्धित करने से या विलीन करने की स्वीकृति देने से इन्कार कर सकता है।
(7) उप धारा (4) के अधीन नयी समिति के निबन्धक अथवा विलयन की स्वीकृति यथास्थिति, समामेलित समितियों अथवा विलीन समिति या समितियों की समस्त परिसम्पत्तियों अथवा दायित्वों के समामेलन की दशा में नयी समिति में तथा विलयन की दशा में चालू रहने वाली समिति में निहित होने के लिए पर्याप्त हस्तांतरण होगा भले ही तत्समय प्रचलित किसी अन्य विधि में इसके विपरीत कोई बात हो और यथास्थिति, नयी समिति के इस प्रकार निबन्धित किये जाने या विलीन करने की स्वीकृति दिये जाने पर, समामेलित समितियों या उस समिति अथवा उन समितियों का जिसे या जिन्हें अन्य समिति में विलीन कर दिया गया हो, निबन्धन रदृद कर  दिया समझा जायेगा।