धारा-16- सहकारी समितियों का विभाजन - (1) कोई सहकारी समिति, निबन्धक को यथा विधि सूचित करने के पश्चात् किसी ऐसे सामान्य बैठक में, जो इस प्रयोजन के लिए बुलाई गई हो और जिसके लिए कम से कम पन्द्रह दिन का नोटिस उसके सदस्यों को दिया जायेगा, अपने को दो या अधिक समितियों में विभाजित करने का संकल्प कर सकती है। इस संकल्प में (जिसे आगे इस धारा में प्रारम्भिक संकल्प कहा गया है) समिति को परिसम्मिपत्तियों और दायित्वों के उन नयी समितियों में विभाजित करने के प्रस्ताव समाविष्ट होंगे जिनमें उसे विभाजित करने का
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1. उ0 प्र0 अधिनियम संख्या 12, 1976 के द्वारा रखे गये (3.10.1975 से प्रभावी)।

प्रस्ताव हो और उसमें प्रत्येक नयी समिति का कार्यक्षेत्र नियत किया जा सकता है और उसे संघटित करने वाले सदस्यों को भी निर्दिष्ट किया जा सकता है।
1 [(2) इस अधिनियम के किसी अन्य उपबन्ध के या ऐसी समिति की किसी उपविधि के होते भी, इस धारा में निर्दिष्ट किसी बैठक की नोटिस समिति के सदस्यों को दी जायेगी और प्रारम्भिक संकल्प की एक प्रति समिति के सदस्यों और ऋण दाताओं पर धारा 15 की उपधारा (2) में, जो आवश्यक परिवर्तनों सहित लागू होगी, विर्निदिष्ट किसी एक या अधिक रीति से तामील की जायेगी। ]

(3) (1) समिति का कोई सदस्य, इसके प्रतिकूल किसी उपविधि के होते हुए भी 2 [ धारा 15 की उपधारा (2) के खण्ड (क) के अधीन जैसाकि वह इस धारा को उपधारा (2) के आधार पर लागू किया जाये, प्रारम्भिक संकल्प की प्रति प्राप्त होने के दिनांक से या यथास्थिति उसके खण्ड (ख) के अधीन किसी समाचार-पत्र में उसके प्रकाशन के दिनांक से, ती दिन की अवधि के भीतर]  समिति को नोटिस द्वारा किसी भी नयी समिति का सदस्य न बनने के लिए अपने विचार की सूचना दे सकता है।

(2) समिति का कोई ऋण दाता, इसके प्रतिकूल किसी अनुबन्ध के होते हुए भी, उक्त अवधि के भीतर समिति को नोटिस देकर अपनी शेष धनराशि वापस मांगने के अपने विचार की सूचना दे सकता है।

(4) 3[उपधारा (3) के खण्ड(1) में विर्निदिष्ट अवधि के] व्यतीत होने के पश्चात् प्रारम्भिक संकल्प पर विचार करने के लिए एक सामान्य बैठक बुलाई जायेगी, जिसके लिए उसके सदस्यों को कम से कम पूरे पन्द्रह दिन का नोटिस दिया जायेगा यदि उस बैठक में प्रारम्भिक संकल्प की पुष्टि परिवर्तनों के बिना अथवा ऐसे परिवर्तनों के साथ जो निबन्धक की राय में (जो अन्तिम होगा) महत्वपूर्ण न हो उपस्थित सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई के बहुमत से पारित संकल्प द्वारा कर दी जाए, तो वह उपधारा (5) तथा (6) और धारा (7) के उपबन्धों के अधीन रहते हुए नयी समितियों और उनकी उपविधियों को निबन्धित करेगा। इस निबन्धन के पश्चात् पुरानी समिति का निबन्धन रदद कर दिया गया समझा जायेगा।

(5) उपधारा 4 के अधीन प्रारम्भिक संकल्प की पुष्टि करते समय दूसरे संकल्प द्वारा निम्नलिखित के लिए व्यवस्था की जायेगी -
(1) धारा 41 के उपबन्धों के अधीन रहते हुए उन समस्त सदस्यों की अंशपूंजी का प्रतिदान जिन्होने उपधारा (3) के खण्ड (1) के अधीन नोटिस दिया हो, और
(2) उन सभी ऋण दाताओं के दावों की पूर्ति जिन्होंने उपधारा (3) खण्ड (2) के अधीन नोटिस दिया हो।
(6) यदि ऐसे समय के भीतर जो निबन्धक उचित समझे उपधारा (5) में अभिदिष्ट सदस्यों की अंशपूंजी का प्रतिदान अथवा उस उपधारा में अभिदिष्ट ऋण दाताओं के दावों की पूर्ति नहीं की जाती है तो निबन्धक नयी समितियों को निबन्धित करने से इन्कार कर सकता है।
(7) तत्समय प्रचलित किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, नयी समितियों का निबन्धन मूल समिति की समस्त परिसम्पत्तियों और दायित्वों का नयी समितियों में उपधारा (4) के अधीन पुष्टिकृत प्रारम्भिक संकल्प में निर्दिष्ट रीति से ‍िनहित होने के लिए पर्याप्त हस्तान्तरण होगा।
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1. उ0 प्र0 अधिनियम संख्या 12, 1976 के द्वारा रखे गये (3.10.1975 से प्रभावी)।
2. उ0 प्र0 अधिनियम संख्या 12, 1976 के द्वारा रखे गये (3.10.1975 से प्रभावी)।
3. उ0 प्र0 अधिनियम संख्या 12, 1976 के द्वारा रखे गये (3.10.1975 से प्रभावी)।