धारा-6- निबन्धन के लिए प्रार्थना-पत्र -(1) समिति के निबन्धन के लिए प्रार्थना पत्र निबन्धक की नियत रीति से ऐसे प्रपत्र में दिया जायेगा जो निबन्धक समय-समय पर निर्दिष्ट करे, तथा प्रार्थी समिति के संबंध में उसे ऐसी समस्त सूचना देंगे जिसकी वह अपेक्षा करे।
(2) ऐसे प्रत्येक प्रार्थना पत्र में निम्नलिखित अपेक्षाओं की पूर्ति की जायेगी, अर्थात-
(क) इसके साथ समिति की प्रस्तावित उपविधियों की तीन प्रतिय होगी,
(ख) प्रार्थी धारा 17 के अधीन सदस्यता का पात्र हो,
(ग) प्रार्थना-पत्र पर प्रत्येक ऐसे प्रार्थी के, यदि वह व्यक्ति विशेष हो और किसी यथाविधि प्राधिकृत व्यक्ति के यदि प्रार्थी धारा 17 के खण्ड (ख) से (च) तक के किन्हीं भी खण्डों में उल्लिखित कोई व्यक्ति हो यथाविधि हस्ताक्षर होंगे,
(घ) ऐसे प्रार्थियों की संख्या, जिन्हें समिति का साधारण सदस्य होना हो, यदि समस्त प्रार्थी व्यक्ति विशेष हों, तो दस से कम न होगा और अन्य दशाओं में पांच से कम न होगी,
(ड़) यदि समिति के उददेश्यों के अन्तर्गत उसके सदस्यों को ऋण देने के लिए, निधियों का सजृन करना भी हो तो समस्त प्रार्थी, जिन्हें समिति का साधारण सदस्य होना हो यदि वह व्यक्ति विशेष हो तो एक ही गांव नगर में अथवा आसन्नतर्वी (Contigious) गव के समूह में रहते हों अथवा एक ही वर्ग के हों।
स्पष्टीकरण- इस खण्ड के प्रयोजन के लिए किन्हीं दो या अधिक व्यक्तियों को एक ही वर्ग का माना जायेगा, यदि वे एक ही व्यवसाय करते हों अथवा एक ही सेवायोजक के अधीन हों।