धारा-7.निबन्धन- (1) यदि निबन्धक का समाधान हो जाये कि -
(क) प्रार्थना-पत्र अधिनियम तथा नियमों के उपबन्धों के अनुसार है,
(ख) प्रस्तावित समिति के उददेश्य धारा 4 के अनुसार हैं।
(ग) प्रस्तावित उपविधिय इस अधिनियम तथा नियमों के उपबन्धों के असंगत नहीं हैं, तथा
(घ) प्रस्तावित समिति सामान्यतः अथवा समितियों के उस वर्ग के जिस वर्ग की वह विशेष समिति हो, किन्हीं शर्तों के विद्यान होने के सम्बन्ध में नियमों की अपेक्षाओं की तथा सुस्थित कारोबार (Sound bussiness) की अपेक्षाओं की पूर्ति करती है और उसकी सफलता प्राप्त करने की समुचित सम्भावनायें हैं, तो निबन्ध समिति तथा उसकी उपविधियों को निबन्धित करेगा।
प्रतिबन्ध यह है कि निबन्धन के लिए प्रार्थना-पत्र के साथ उपविधिय ऐसी हों जो इस अधिनियम के प्रचलित होने के पश्चात् सहकारी समितियों के उस प्रकार तथा वर्ग के लिए जिस प्रकार तथा वर्ग की वह प्रस्तावित समिति हो, निबन्धक द्वारा पहले से ही अनुमोदित कर ली गयी हो, तो निबन्धक प्रार्थना-पत्र प्राप्त होने के दिनांक से तीन महीने के भीतर उस पर या तो समिति को निबद्ध करने अथवा उसका निबन्धन करने से इन्कार करने का अन्तिम आदेश देगा और वह ऐसा न करे तो प्रार्थी उस प्राधिकारी को प्रत्यावेदन दे सकता है जो किसी समिति को निबद्ध करने से इनकार करने के निबन्धक के आदेशों के विरूद्ध धारा 98 के अधीन अपील सुनने के लिए सक्षम हो और यदि ऐसा प्राधिकारी निबन्धक से रिपोर्ट मांगने के पश्चात् समिति का निबन्ध करने के लिए आदेश दे तो समिति निबन्धक को ऐसा आदेश संसूचित किये जाने के दिनांक से यथाविधि निबद्ध की गयी समझी जायेगी।
(2) यदि निबन्धक किसी व्यक्ति को निबन्धित करने से इन्कार करे तो वह इनकार करने के आदेश को उसके कारणों सहित उस प्रार्थी को संसूचित करेगा जो प्रार्थना-पत्र में इस प्रयोजनार्थ नामांकित हो, तथा ऐसे नामांकन के अभाव में प्रार्थियों में से एक को संसूचित करेगा।