धारा-18. सदस्यों के वर्ग - (1) सहकारी समिति में साधारण सदस्यों के अतिरिक्त, निम्नलिखित प्रकार के सदस्य हो सकते हैं,
(क) सहानुभूतिकर सदस्य,
(ख) नाम मात्र सदस्य,
(ग) सम्बद्ध सदस्य।
(2)(क) कोई व्यक्ति जो समिति के उददेश्य की पूर्ति तथा सदस्य कार्यकर्ताओं के कल्याण में वास्तविक अभिरूचि रखता हो सहानुभूति कर सदस्य बनाया जा सकता है।
(ख) समिति में सहानुभूतिकर सदस्यों की संख्या किसी भी समय, साधारण सदस्यों की कुल संख्या के पांच प्रतिशत से अधिक न होगी और प्रबन्ध कमेटी में सहानुभूतिकर सदस्यों की संख्या न तो दो से अधिक होगी और न सहकारी समिति के सहानुभूतिकर सदस्यों की संख्या के दस प्रतिशत से अधिक होगी, और प्रबन्ध कमेटी के सदस्यों की कुल संख्या पांचवे भाग से ही अधिक होगी।

(3) (क) वह व्यक्ति जिसके साथ सहकारी समिति कारोबार करती हो या कारोबार करने का विचार रखती हो सदस्य बनाया जा सकता है,
(ख) नाममात्र सदस्य को समिति के लाभ में कोई हिस्सा पाने का अधिकार न होगा और न वह प्रबन्ध कमेटी सदस्यता के लिए पात्र होगा।
4.(क) कोई व्यक्ति, जिसके अन्तर्गत अव्यस्क भी है, जो समिति के कारोबार में मौसमी या अस्थायी कर्मचारी अथवा शिशिक्षु हो या उस कारोबार में अन्य रूप से हित रखता हो, सम्बद्ध बनाया जा सकता है।
(ख) सम्बद्ध सदस्य प्रबन्ध कमेटी की सदस्यता के लिए पात्र न होगा और न मजदूरी तथा बोनस के अतिरिक्त लाभों में हिस्सा पाने का ही उसे अधिकार होगा।
(5) इस धारा में या इस अधिनियम में अन्यत्र की गई व्यवस्था के अधीन रहते हुए नाममात्र अथवा सम्बद्ध या सहानुभूतिकर सदस्य को सदस्य के ऐसे विशेषाधिकार और अधिकार प्राप्त होंगे और वह सदस्य के ऐसे दा‍यित्व का भागी होगा जो समिति की उपविधियों में निर्दिष्ट किये जायें।

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1. उ0 प्र0 अधिनियम संख्या 5, 1987 द्वारा अन्तः स्थापित (24.3.1987 से प्रभावी)।
2. अधिसूचना संख्या 2452 /XVII-V-I.(क)-25-2000 दिनांक 1 नवम्बर, 2000 द्वारा बढाया गया जो ए0 प्र0 असाधारण गजट भाग-1 खण्ड(क) दिनांक 1 नवम्बर, 2000 को प्रकाशित हुआ।