धारा-39. सहकारी समिति का कतिपय परिसम्पत्तियों पर प्रथम प्रभार - प्राविन्शियल एन्सालवेंसी ऐक्ट, 1920 अथवा कोड आफ सिविल प्रोसीजर, 1908 अथवा तत्समय प्रचलित भौमिक अधिकार विषयक किसी अन्य अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी, किसी ऋण या अदत्त मांग का, जो किसी भूतपूर्व अथवा वर्तमान सदस्य द्वारा सहकारी समिति को देय हो अथवा जो किसी मृत सदस्य की सम्पदा के विरूद्ध शेष हो, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार के किसी ऐसे दावे के अधीन रहते हुए जो समिति द्वारा ऋण दिये जाने के पूर्व न कि उसके पश्चात् उसके (सरकार के ) के द्वारा दिये गये ऋण से उत्पन्न हो या मालगुजारी के सम्बन्ध में हो, अथवा मालगुजारी की बकाया की रूप में वसूल करने योग्य कोई धनराशि हो, निम्नलिखित पर प्रथम प्रभार होगा-
(क) यदि उक्त ऋण या मांग बीज, खाद, श्रमिक निर्वाह, पशुओं के लिए चारा या अन्य किसी ऐसी वस्तु के जो कृषि सम्बन्धी क्रियाओं के लिए प्रासंगिक हो, सम्भरण के सम्बन्ध में अथवा उनके साधनों की व्यवस्था करने के लिए किन्हीं ऋणों के संबंध में देय हो, तो ऐसे सदस्य की फसलों तथा कृषि उपज पर;
(ख) यदि उक्त ऋण या मांग भूमि का लगान या मालगुजारी के भुगतान के साधनों की अथवा सिंचाई की सुविधाओं की व्यवस्था करने के लिए किन्हीं ऋणों के सम्बन्ध में देय हो तो, यथास्थिति उस भूमि पर जिसके लगान या मालगुजारी का उक्त रूप से भुगतान किया गया हो, अथवा व्यवस्थिति सिंचाई की सुविधाओं पर;
(ग) यदि उक्त ऋण या मग पशु या पशुधन से सम्भरण या उसके क्रम के साधनों की व्यवस्था करने या कृषि उपकरणों, परिवहन ( transport Equipments) या दुग्धशाला अथवा पशुपालन से सम्बद्ध अन्य कार्यकलापों के लिए सज्जा का क्रय मरम्मत अथवा सनधारण करने या फार्म हाउस या पशु अथवा कृषि उपज के संग्रहार्थ गोदाम बनाने, मरम्मत या क्रय करने के संबंध में देय हो तो किसी ऐसे ऋण से पूर्णतः अथवा आंशिक रूप से सदस्यों की कृषि उपज पर और इस प्रकार क्रम किये गये अथवा संधारित या बनाये गये सज्जा, गोदाम, फार्म हाउस या ओसारा पर, और यदि ऋण गृहीता, क्षेत्रपति हो तो उसकी भूमि पर भी ऋण की अन्तिम किस्त प्रतिदेय होने के दिनांक से तीन वर्ष के भीतर किसी भी समय;
(घ) यदि उक्त ऋण या मग कच्चा सामान, औद्योगिक उपकरणों, संयत्र और मशीनों कर्मशालाओं, गोदामों अथवा कारोबार के भू-गृहादिक सम्भरण के सम्बन्ध में या उनके क्रय के निमित्त ऋण के सम्बन्ध में देय हो, तो कच्चा माल या अन्य वस्तुओं पर जिनका इस प्रकार सम्भरण या उस सदस्य द्वारा क्रय किया हो और कच्चे माल के सम्भरण के सम्बन्ध में या उसके क्रय के लिए ऋण या मांग की दशा में, उस कच्चे माल से निर्मित वस्तुओं पर;
(ड़) यदि उक्त ऋण या मांग भूमि के क्रय या विमोचन के प्रयोजनार्थ लिऐ गये किसी ऋण के सम्बन्ध में देय हो तो उस भूमि पर जो इस प्रकार क्रय या विमोचन की गई हो,
(च) यदि उक्त ऋण मांग किसी मकान या भवन अथवा उसके किसी भाग के निर्माणार्थ लिये गये किसी ऋण के सम्बन्ध में देय हो तो उस मकान या भवन या सामग्री पर जो इस प्रकार क्रय निर्मित या सम्भरित किया गया हो, और
(छ) यदि उक्त ऋण या मांग भूमि का उद्धार या संरक्षण करने के लिए अथवा भूमि पर सुधार करने के लिए अथवा भूमि तैयार करने या फलोद्यान अथवा वृक्षारोपण के लिए या पशु, कृषि उपकरणों अथवा मशीनों के क्रय के लिए, लिये गये 500 रूपये या उससे अधिक के ऋण के सम्बन्ध में देय हो तो उस भूमि पर जिसका उद्धार, संरक्षण, सुधार करना हो या जिसे तैयार करना हो और उस भूमि पर जिसके प्रयोग के लिए उपकरणों या मशीनों का क्रय करना हो और पशु क्रय करने की दशा में ऋण गृहीता (Borrower) की किसी भूमि पर।
प्रतिबन्ध यह है कि इस धारा के अधीन सृजित प्रभार के साथ-साथ ऋणी सदस्य की सभी अन्य सम्पत्ति, जिसके अन्तर्गत समिति द्वारा उसकी देय कोई भी धनराशि है, समिति के पक्ष में किसी डिक्री के निष्पादन में कुर्क की जा सकेगी और बेची जा सकेगी, चाहे ऋण का उददेश्य कुछ भी रहा हो।