धारा-42. अंश या हित की कुर्की न हो सकेगी.- धारा 41 के उपबन्धों के अधीन रहते हुये, समिति की पूजी में किसी सदस्य का अंश या हित, ऐसे सदस्य या भूतपूर्व सदस्य द्वारा उपागत किसी ऋण या दायित्व के सम्बन्ध में किसी न्यायालय की डिक्री या आदेश के अधीन न तो कुर्क हो सकेगा और न बेचा जा सकेगा और ऋण-शोध क्षमता (इन्सालवेन्सी) से सम्बद्ध किसी विधि के अधीन कोई सरकारी अभ्यर्पित या आदाता (रिसीवर) ऐसे अंश या हित में किसी दावे का हकदार न होगा और न उस पर कोई दावा होगाः