धारा-43. संलेखों के अनिवार्य निबन्धन से मुक्तिः-- इण्डियन रजिस्ट्रेशन ऐक्ट, 1908 (ऐक्ट संख्या 16, 1908) की धारा 17 की उपधारा (1) के खण्ड (बी) और (सी) में दी हुई कोई बात निम्नलिखित पर प्रवृत्त न होगी-
(क) किसी सहकारी समिति में अंशों से सम्बद्ध कोई संलेख भले ही समिति की परिसम्पत्तियॉ पूर्णतः अथवा अंशतः अचल सम्पत्ति के रूप में हों, या
(ख) ऐसी किसी समिति द्वारा जारी किया गया ऋण-पत्र जो सिवाय उस मात्रा तक जह तक कि वह धारी (Holder) को ऐसे निबन्धित संलेख से प्राप्य सुरक्षा का हकदार बनाता हो जिसके द्वारा समिति ने अपनी सम्पूर्ण अचल सम्पत्ति या उसका कोई भाग या उसमे कोई हित पूर्णतः या अंशतः न्यासधारियों को ऐसे ऋण-पत्र धारियों के हितार्थ न्याय के रूप में बन्धक या हस्तान्तरित कर दिया हो, या अन्यथा संक्रमित कर दिया हो अचल सम्पत्ति में अधिकार, आगम या हित उत्पन्न, घोषित, अभ्यर्पित, सीमित या समाप्त न करता हो, या
(ग) किसी ऐसी समिति द्वारा जारी किये गये किसी ऋण-पत्र पर कोई पृष्ठांकन या उसका संक्रामण।