धारा-44. सरकार द्वारा सहकारी आन्दोलन को बढावा देना.- (1) राज्य में सहकारी आन्दोलन को प्रोत्साहन तथा बढावा देना और इस दशा में आवश्यक कार्यवाही करना राज्य सरकार का कर्तव्य होगा।
(2) उपधारा (1) के उपबन्धों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना राज्य सरकार-
(क) सामान्य रूप से सहकारी समितियों या किसी वर्ग की सहकारी समितियों के विकास में सहायता देने के उददेश्य से, सीमित दायित्व वाली सहकारी समिति की अंशपूजी (share Capital) में उसकी सहमति से सीधे अभिदान कर सकती है,
(ख) तदर्थ बनाये गये किन्हीं नियमों के अधीन रहते हुए राज्यस्तर की किसी सहकारी समिति को 1[ * * * ] सीमित दायित्व वाली अन्य सहकारी समितियों के अंशों के क्रय के लिये धन दे सकती है।
2[प्रतिबन्ध यह है कि सहकारी बैंक या प्रारम्भिक कृषि ऋण समिति के मामले में राज्य सरकार पच्चीस प्रतिशत से अधिक का अंशदान ऐसी समिति की अंशपूंजी में नहीं करेगी और जहां राज्य सरकार की अंशपूंजी पच्चीस प्रतिशत से अधिक है, वहां राज्य सरकार इसे पच्चीस प्रतिशत अथवा कम कर देगी और शेष अंशपूंजी समिति को अनुदान में परिवर्तित कर देगी।
(3) राज्य सरकार, किसी ऐसी सहकारी समिति में अपने अंशों पर लाभांश उसी दर से पाने की हकदार होगी जो समिति के अन्य अंशधारियों को देय हो।