धारा-45. प्रमुख राज्य भागिता-निधि.- (1) कोई भी शीर्ष समिति जिसे धारा 44 के अधीन राज्य सरकार द्वारा दिया जाये, ऐसे धन से एक निधि की स्थापना करेगी जिसे प्रमुख राज्य भागिता-निधि कहा जायेगा।
(2) शीर्ष समिति प्रमुख राज्य-भागिता-निधि का निम्नलिखित प्रयोजनों के लिए ही प्रयोग करेगी, किसी अन्य प्रयोजन के लिए नहीं-
(क) सीमित दायित्व वाली अन्य सहकारी समितियों के अंशों का सीधा क्रय,
(ख) किसी सहकारी समिति को जिसके अन्तर्गत उसकी सदस्यता में अन्य सहकारी समितियॉ भी हैं धन देना जिससे कि वह समिति 3[ * * *] सीमित दायित्व वाली अन्य सम्बद्ध सहकारी समितियों के (जिन्हें आगे इस अध्याय में प्रारम्भिक समितिय कहा गया है) अंश क्रय कर सके,
(ग) इस अध्याय के उपबन्धों के अनुसार राज्य सरकार को भुगतान करना,
(घ) ऐसे अन्य भुगतान करना जिन्हें राज्य सरकार उपखण्ड(क), (ख) तथा (ग) में उल्लिखित अपेक्षाओं के पूर्णतः पूरा होने के पश्चात् अनुज्ञात करें।