धारा-58. शुद्ध लाभ का निस्तारण.- (1) 1[(1) किसी सहकारिता वर्ष में किसी सहकारी समिति का शुद्ध लाभ उस वर्ष में उसके सकल लाभ से निम्नलिखित को घटाने के पश्चात् संगणित किया जायेगा-
(क) ब्याज जो अतिशोध्य है;
(ख) प्रबन्धकीय व्यय;
(ग) कर्मचारियों के निधि या उपदान निधि के लिए अंशदान;
(घ) ऋण और जमा पर ब्याज;
(ड़) लेखा परीक्षा फीस;
(च) चालू व्यय जिसमें, मरम्मत, किराया कर और सम्पत्ति का ह्रास सम्मिलित है;
(छ) असमायोजित अशोध्य ऋणों और हानियों को बटटे खाते में डालने के लिए सृजित निधि के लिए अंशदानः
प्रतिबन्ध यह है कि सहकारी समिति पूर्ववर्ती वर्ष के दौरान प्रोदभूत ब्याज, जिसे उस वर्ष में वसूल किया गया है, वर्ष के शुद्ध लाभ से जोड़ सकती है,
(1-क) सहकारी समिति उपधारा (1) के अधीन यथा संगणित किसी वर्ष के शुद्ध लाभ को, जिसमें पूर्व वर्षों का अग्रनीति शुद्ध लाभ सम्मिलित है, निम्नलिखित रीति से वितरित करेगी-
(क) ऐसी धनराशि जो 25 प्रतिशत से कम न हो, एक निधि में संक्रमित की जायेगी, जिसे रक्षित निधि कहा जाएगा,
(ख) विहित रीति से स्थापित की जाने वाली सहकारी शिक्षा निधि में कम से कम इतनी धनराशि जो विहित की जाये जमा की जायेगी, और यह ऐसी सहकारी समितियों पर भी लागू जिनमें वर्ष में हानि उपगत हो,
2[’’प्रतिबन्ध यह है कि प्रारम्भिक कृषि ऋण समिति, केन्द्रीय बैंक एवं शीर्ष बैंक के सम्बन्ध में इस खण्ड के उपबन्ध लागू नहीं होंगे।’’
(ग) ऐसी धनराशि जो विहित की जाये, सहकारी समितियों के सम्बन्धित वर्ग की शीर्ष समिति में सृजित शोध और विकास निधि में जमार की जायेगी और जिसे शोध और विकास के प्रयोजन के लिए विहित रीति से अनुरक्षित किया जायेगा।
 1[(d) an amount not exceeding twenty per cent as may be prescribed shall be transferred to a fund called the Equity Redemption Fund to be established and utilised in the manner prescribed by such co-operative society which has the subscriptiojn of the State Government in its share capitals:

Provided that the aggregate amount transferred by a co-operative society to such fund shall not exceed the amount subscribed by the State Government in the share capital of that co-operative society.]


(2) ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुये जो नियम की जायें, शुद्ध लाभ को शेष निम्नलिखित सभी या किसी प्रयोजन के लिये उपयोग में लाया जा सकता है अर्थात्-
(क) सदस्यों को उनकी दत्त अंशपूंजी पर 1[20 प्रतिशत से अधिक] दर से लाभांश का भुगतान,
(ख) सदस्यों को व्यापार की, जो उन्होंने समिति के साथ किया हो, राशि या मात्रा पर, उस सीमा तक और उस रीति से, जो नियमों या उपविधियों में निर्दिष्ट हों, बोनस का भुगतान,
(ग) 2[ * * * ] ग्राम सुधार निधि या किसी अन्य विधि का, जो नियमों या उपविधियों में निर्दिष्ट की जायें, संगठन या उसमें अंशदान,
(घ) चेरिटेबुल एनडाउमेंट ऐक्ट, 1890 की धारा 2-क में तथा परिभाषित किसी (chaitble purpose) पूर्व प्रयोजन के लिए 5 प्रतिशत से अधिक धनराशियों का दान,
 

3’’ Provided that no amount shall be donated to any organisation ] established for any charitable purpose, which has an abject, whether directly or indirectly, to further the interest of any political party or a religious faith.”

žM+― 4[*   *   * ]  

žp― 5[*   *   * ]  


(3) तदर्थ बनाये गये किन्हीं नियमों के उपबन्धों के अधीन रहते हुए निबन्धक किसी सहकारी समिति के अनुरोध पर, किसी निधि में अंशदान करने से छूट दे सकता है, या किसी निधि में अंशदान के प्रतिशत को कम कर सकता है, जैसा कि उपधारा (1) और (2) में उल्लिखित है या उपधारा (2) के उपखण्ड (क) में उल्लिखित लाभांश के प्रतिशत को बढा सकता है।

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1. उपधारा (1) अधिनियम सं0 17, 1994 द्वारा बदला गया (15.7.94)।
2. उ0 प्र0 अधिनियम संख्या 47 सन् 2007 द्वारा प्रतिबन्धात्मक खण्ड बढाया गया जो उ0 प्र0 असाधाराण गजट भाग-1 खण्ड (क) दिनांक 10 दिसम्बर 2007 को प्रकाशित हुआ।
3.
   Clause (d) substituted by Act No. 25 of 1994 (w.e.f. 20-9-94) vide Notification No. 5579/49-1-94-7(1)-94, dated 20.7.94.