धारा-71. मध्यस्थ को विवाद का अभिदेश.- (1) धारा 70 की उपधारा (1) के अधीन अभिदेश प्राप्त होने पर निबन्धक नियमों, यदि कोई हो, के उपबन्धों के अधीन रहते हुयेः
(क) विवाद का स्वयं निर्णय कर सकता है, अथवा
(ख) उसे निर्णय के लिए अपने द्वारा नियुक्त मध्यस्थ को अभिर्दिष्ट कर सकता है,
(ग) यदि पक्ष लिखित रूप में अनुरोध करे तो उसे निर्णय के लिए ऐसे मध्यस्थ मण्डल को अभिर्दिष्ट कर सकता है जिसमें तीन सदस्य होंगे तो नियत रीति से नियुक्त किये जायेंगे,
(2) निबन्धक उपधारा (1) के खण्ड (ख) या (ग) के अधीन किये गये अभिदेश को उन कारणों से जो अभिलिखित किये जायेंगे, वापस ले सकता है और उसे दूसरे मध्यस्थ या मध्यस्थ मण्डल को अभिर्दिष्ट कर सकता है अथवा उस पर स्वयं निर्णय दे सकता है।
(3) निबन्धक, मध्यस्थ अथवा मध्यस्थ मण्डल जिसे इस धारा के अधीन कोई विवाद निर्णय के लिये अभिर्दिष्ट किया गया हो, विवाद के निर्णय होने तक न्याय हित में ऐसे विवादकालीन आदेश (Inter locutory order) जिसके अन्तर्गत सम्पत्ति की कुर्की भी है, दे सकता है, जो वह आवश्यक समझे।
(4) इस धारा के अधीन निबन्धक, मध्यस्थ मण्डल अथवा मध्यस्थ मण्डल द्वारा दिया गया निर्णय, आगे अभिनिर्णय कहा जायेगा।
(5) इस धारा के अधीन किसी विवाद का निर्णय करने और अभिनिर्णय देने में निबन्धक, मध्यस्थ या मध्यस्थ द्वारा अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया वही होगा जो नियत की जाये।