धारा-1[71क. ऋणदाता समिति का ऋण समिति और उसके सदस्यों के विरूद्ध अधिकार.- (1) यदि कोई सहकारी समिति (जिसे आगे इस धारा में ऋणी समिति कहा गया है) अपने ऋण का भुगतान किसी अन्य सहकारी समिति को (जिसे आगे इस धारा में ऋणदाता समिति कहा गया है) इस कारण करने में असमर्थ है कि उसके सदस्यों ने धन का भुगतान करने में चूक किया है और ऋणी समिति की प्रबन्ध कमेटी ने अपने सदस्यों से प्राप्त धन की वसूली के लिए आवश्यक कार्यवाही करने में लोप या उपेक्षा बरती है तो इस अधिनियम में किसी बात के होते हुये भी, ऋणदाता समिति लिखित नोटिस द्वारा उक्त कमेटी को चूक करने वाले सदस्यों के विरूद्ध  2 [धारा 70, 91, 92 या धारा 95-क] के उपबन्धों के अनुसार कार्यवाही करने का निदेश दे सकती है।
(2) यदि उपधारा (1) में निर्दिष्ट नोटिस का अनुपालन उस नोटिस की तामील के दिनांक से 30 दिन की अवधि के भीतर ऋणी समिति की प्रबन्ध कमेटी नहीं करती है, तो चूक करने
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1. उ0 प्र0 अधिनियम सं0 12, 1976 के द्वारा अन्तःस्थापित (3.10.1975 से प्रभावी)।
2. उ0 प्र0 अधिनियम सं0 17, 1994 द्वारा बदला गया।


वाले ऐसे सदस्यों के विरूद्ध ऋणदाता समिति स्वयं 1[यथास्थिति धारा 70, 91 धारा 92 या धारा 95-क] के उपबन्धों के अनुसार कार्यवाही कर सकती है मानो वह ऋणदाता समिति के सदस्य हों और इस दशा में इस अधिनियम और इसके अधीन बने नियम और ऋणी समिति की उपविधियों के उपबन्ध इस प्रकार लागू होंगे मानों उक्त उपबन्धों में ऋणी समिति और उसकी प्रबन्धक कमेटी और अधिकारियों के प्रति निर्देश ऋणदाता समिति और उसके प्रबन्ध कमेटी और अधिकारियों के प्रति निर्देश हों।
(3) जह ऋणदाता समिति ने ऋण समिति द्वारा देय किसी धन के सम्बन्ध में ऋणी समिति के विरूद्ध धारा 92 से निर्दिष्ट अभिनिर्णय या आदेश प्राप्त कर लिया है, वह  ऋणदाता समिति इस अधिनियम के और इसके अधीन बनाये गये नियमों के उपबन्धों के अनुसार या तो ऋणी समिति की परिसम्पत्तियों से, या उसके सदस्यों से ऋणी समिति को उनसे प्राप्त ऋण की मात्रा तक, या दोनों से ऐसे धन की वसूली के लिए कार्यवाही कर सकती है।