1
उत्तर प्रदेश सहकारी समिति नियमावली, 1968

अध्याय 1

प्रारम्भिक



1.संक्षिप्त नाम तथा प्रारम्भ-(1) यह नियमावली उत्तर प्रदेश सहकारी समिति नियमावली, 1968 कहलायेगी।
(2) यह नियमावली गजट में प्रकाशित होने के दिनांक से प्रवृत्त होगी।
2. परिभाषाएं- जब तक कि प्रसंग द्वारा अन्यथा अपेक्षित न हो, इस नियमावली में-
(क) अधिनियम का तात्पर्य उत्तर प्रदेश सहकारी समिति अधिनियम, 1965 (उत्तर प्रदेश अधिनियम संख्या 11,1966) से है,
2[(ख) शीर्ष समिति शीर्षस्तर समिति या राज्य स्तर सहकारी समिति का तात्पर्य-
(1)उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक लिमिटेड लखनऊ;
(2)उत्तर प्रदेश कोआपरेटिव बैंक लिमिटेड लखनऊ;
(3) उत्तर प्रदेश कोआपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड लखनऊ;
(4)प्रादेशिक कोआपरेटिव फेडरेशान लिमिटेड लखनऊ;
(5)यू0पी0 कोआपरेटिव यूनियन लिमिटेड लखनऊ;
(6)उ0प्र0 उपभोक्ता सहकारी संघ लिमिटेड लखनऊ;
(7)यू0पी0 कोआपरेटिव शूगर फैक्टरीज फेडरेशन लिमिटेड लखनऊ;
(8)उत्तर प्रदेश केन यूनियन फेडरेशन लिमिटेड लखनऊ;
(9)उत्तर प्रदेश इंडस्ट्रियल कोआपरेटिव एसोसिएशन लिमिटेड कानपुर; या
(10)कोई अन्य केन्द्रय सहकारी समिति, जो निम्नलिखित शर्तो को पूरा करती
हो-
(एक) उसकी सदस्यता में कम से कम ऐसी अन्य केन्द्रीय सहकारी समिति
हो जिसका कारोबार या व्यवसाय उसी प्रकार को हो; तथा
(दो) उसका कार्य क्षेत्र सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश में हो; और
(तीन) उसका मुख्य उद्देश्य साधारण सदस्यों के रूप में जो उससे सम्बद्ध  
सहकारी समितियों का कार्य करने में सुविधा देना हो;
(ग) कृषि समिति का तात्पर्य किसी सहकारी समिति से है जिसके अधिकांश साधारण सदस्य कृषि कार्य करते हों; तथा कृषि ऋण समिति का तात्पर्य किसी ऋण समिति से है जिसके अधिकांश साधारण सदस्य कृषि कार्य करते हों,
------------------------------------------
1.अधिसूचना संख्या 9907-सी/12-सी0ए0-25(12)-68, दिनांक 31 दिसम्बर, 1968 द्वारा उत्तर प्रदेश असाधारण गजट में दिनांक 31, दिसम्बर, 1968 को प्रकाशित।
2.अधिसूचना संख्या 3849/49-1-98-7(11)-97-लखनऊ,दिनांक 31 अक्टूबर 1998 द्वारा प्रतिस्थापित हुआ।

स्पष्टीकरण- कृषि कार्य के अन्तर्गत निम्नलिखित भी होगे-
(1) कृषि फसलों का उत्पादन,प्रक्रिया तथा क्रय विक्रय;
(2) औद्योगिक, रेशम उत्पादन या पशु पालन जिसमें दुग् व्यवसाय के साथ साथ-साथ सुअर पालन, मत्स्य पालन तथा कुक्कुट पालन भी सम्मिलित है।
1[(ग) दुग्ध उत्पादन समिति का तात्पर्य ऐसी सहकारी समिति से हे जिसके साधारण सदस्य एक या अधिक ऐसे क्रिया कलापों में लगे हो जो दुग्ध उत्पादन, उसकी प्राप्ति र प्रक्रिया या दुग्ध उत्पाद के निर्माण दूध या दुग्ध उत्पाद के विक्रय या दुग्धशाला विकास कार्यक्रमों से सम्बन्धित हों;
(घ)अपर निबन्धक का तात्पर्य धारा 3 की उपधारा (2) के अधीन सहकारी समितियों के अपर निबन्धक के रूप में नियुक्त अधिकारी से है;
(ड)सहायक निबन्धक का तात्पर्य धारा 3 की उपधारा (2) के अधीन सहायक निबन्धक के रूप में नियुक्त व्यक्ति से है, तथा जिला सहायक निबन्धक का तात्पर्य किसी जिले में सहकारी कार्यो का प्रभार देने के लिये नियुक्त किसी सहायक निबन्धक से है;
2[(च) संयुक्त निबन्धकका तात्पर्य धारा 3 की उपधारा (2) के अधीन सहकारी समितियों के संयुक्त निबन्धक के रूप में नियुक्त किसी अधिकारी से ह;
(छ) केन्द्रीय समिति या केन्द्रीय सहकारी समिति का तात्पर्य किसी ऐसी सहकारी समिति से है जिसकी अपनी जिसकी अपनी (सदस्यता में) साधारण सदस्य के रूप में कोई अन्य सहकारी समिति हो और जो किसी प्रारम्भिक सहकारी समिति की श्रेणी में न आती हो;
3[(छछ) ब्लाक यूनियन का तात्पर्य ऐसी सहकारी समिति से है जिसका कार्यक्षेत्र जिले का केवल एक भाग हो और जिसका मुख्य उद्देश्य बीज, उर्वरक, कीटनाशक, कृषि उपकरण या उपभोक्ता माल के संग्रह और वितरण का प्रबन्ध करना है और जिसकी सदस्यता में उसके साधारण सदस्य के रूप में कोई अन्य सहकारी समिति भी सम्मिलित है];
(ज) ऋण् समिति का तात्पर्य ऐसी समिति से है जिसका मुख्य उद्देश्य अपने सदस्यों को उधार देने के लिए निधियउगाना हो;
4[(जज) उम्मीदवार का तात्पर्य अधिनियम, नियम या समिति की उपविधियों के अधीन पात्र ऐसे मतदाता से हे जो निम्नलिखित रूप में निर्वाचन लड़ने के लिए नाम निर्देशन पत्र दाखिल करता है-
(1) प्रतिनिधि के रूप में; या
(2) प्रबन्ध कमेटी के सदस्य के रूप् में; या
(3) सहकारी समिति के सभापति और उपसभापति के रूप में] ।
(झ) सहकारी ऋण एवं अल्पव्यय समिति का तात्पर्य वेतन अर्जित करने वालों तथा मजदूरी अर्जित करने वालों की किसी ऐसी ऋण समिति से है जिसकी उपविधियों में अन्य बातों के साथ साथ अपने सदस्यों से अनिवार्य रूप से धनराशि जमा करने की व्यवस्था हो,
-------------------------------------------
1.अधिसूचना सं0 2936/ XII-E-4-4(66)78 दिनांक 27 जून, 1978 के द्वारा बढ़ाई गई।
2.अधिसूचना सं0 3849/49-1-98-7(11)-97 लखनऊ, दिनांक 31 अक्टूबर,1988 द्वारा प्रतिस्थापित।
3. अधिसूचना 3815/सी-1-77-7(5)/1977,दिनांक दिसम्बर 24,1977 के द्वारा बढ़ाये गये।
4.अधिसूचना सं03815/सी-1-77-7(5)/1977, दिनांक दिसम्बर 24,1977 के द्वारा बढ़ाये गये।



1[(झझ)प्रतिनिधि का तात्पर्य यथास्थिति सदस्यों के प्रतिनिधि या समिति के प्रतिनिधि से है,
(ञ) केन्द्रीय सहकारी बैंक का तात्पर्य धारा 2 के खण्ड (ट) में यथापरिभाषित किसी केन्द्रीय बैंक से है,
2[ (ञञ) सदस्यों का प्रतिनिधि का तात्पर्य अलग अलग सदस्यों के समूह द्वारा या किसी क्षेत्र के अलग अलग सदस्यों द्वारा सहकारी समिति के सामान्य निकाय में उनका प्रतिनिधि करने के लिए निर्वाचित किसी सदस्य एक एक सदस्य से है,
सामान्य निकाय में उसका प्रतिनिधित्व करने के लिए इस नियमावली के अनुनियुक्त किसी व्यक्ति से है,,
(ट) उपभोक्ता स्टोर या उपभोक्ता समिति का तात्पर्य किसी प्रारम्भिक समिति से है जिसका मुख्य उद्देश्य अपने सदस्यों के लिए सामान्य रूप से अपेक्षित माल प्राप्त करना और अपने सदस्यों को फुटकर में बेचना है,
(ठ) डिक्रीधारी का तात्पर्य किसी ऐसे व्यक्ति से हे जिसके पक्ष में धारा 92 में अभिदिष्ट कोई अभिनिर्णय या आदेश दिया गया हो,
3[(ठठ) निर्वाचन का तात्पर्य-
(1) प्रतिनिधिय; या
(2) प्रबन्ध कमेटी के सदस्यो;या
(3) किसी सहकारी समिति के सभापति, उपसभापति के निर्वाचन से है।
(ड) उप निबन्धक का तात्पर्य धारा 3 की उपधारा (2) के अधीन सहकारी समितियों के उप निबन्ध के रूप में नियुक्त किसी अधिकारी से है,
4[(डड) निर्वाचन अधिकारी का तात्पर्य राज्य सरकार के किसी ऐसे अधिकारी से है जिसे जिला मजिस्टेट किसी सहकारी समिति या सहकारी समिति के वर्ग या वर्गो या किसी क्षेत्र या क्षेत्रों के लिए इस निमित्ति निर्वाचन अधिकारी नियुक्त करें,,
(ढ) जिला सहकारी बैंकका तात्पर्य ऐसे केन्द्रीय सहकारी बैंक से है जिसका मुख्य कार्यालय जिले के मुख्यालय पर हो,
5[(ढढ) मतदान अधिकारी का तात्पर्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा किसी विशिष्ट क्षेत्र या क्षेत्रों में किसी मतदान केन्द्र पर निर्वाचन कराने में अपनी सहायता के लिए नियुक्त किसी व्यक्ति से है,,
(ण) जिला सहकारी फेडरेशन का तात्पर्य ऐसी केन्द्रीय समिति से है-
(1) जो ऋण समिति न हो;
(2) जिसका मुख्य कार्यालय किसी जिले के मुख्यालय पर हो;
------------------------------------------------
1.अधिसूचना सं0 2936/ XII-E-4-4(66)78 दिनांक 27 जून, 1978 के द्वारा बढ़ाई गई।
2.अधिसूचना 3815/सी-1-77-7(5)/1977, दिनांक दिसम्बर 24,1977 के द्वारा बढ़ाये गये।
3. अधिसूचना 3815/सी-1-77-7(5)/1977,दिनांक दिसम्बर 24,1977 के द्वारा बढ़ाये गये।
4.अधिसूचना 3815/सी-1-77-7(5)/1977, दिनांक दिसम्बर 24,1977 के द्वारा बढ़ाये गये।
5.अधिसूचना 3815/सी-1-77-7(5)/1977;दिनांक दिसम्बर 24,1977 के द्वारा बढ़ाये गये।


(3) जिसका मुख्य उद्देश्य अपनी सदस्य समितियों या ऐसी सदस्य समितियों के सदस्यों अथवा ऐसी सदस्य समितियों से सम्बद्ध  समिति के सदस्यों द्वारा अपेक्षित माल की प्राप्ति, उनका उत्पादन, प्रक्रिया या वितरण करना हो, और
(4) ऐसी समिति की अधिकांश सदस्य समितियों के अधिकांश सदस्य कृषक हों;
1[(णण) मतदाता का तात्पर्य किसी ऐसे सदस्य/प्रतिनिधि से है जो अधिनियम, नियमों और उपविधियों के अधीन मतदान करने के लिए हकदार हो और जिसका नाम निर्वाचन प्रयोजनों के लिए तैयार की गई सम्बद्ध निर्वाचन क्षेत्र अथवा समिति की अन्तिम मतदाता सूची में हो,]
(त) आवास समिति का तात्पर्य किसी सहकारी समिति से है जिसका मुख्य उद्देश्य अपने सदस्यों के लिए निम्नलिखित की व्यवस्था करना हो-
(1) भूमि भवन सामग्रियों तथा/या अन्य सेवायें जो निवास गृहों के निर्माण के लिए आवश्यक हो, या
(2) सीधी खरीदी, किराया खरीदाता किराये के आधार पर निवास गृह,
2[(तत) मतदाता सूची का तात्पर्य निम्नलिखित से है-
(1) प्रबन्ध कमेटी के सदस्य के निर्वाचन की स्थिति में सामान्य निकाय के, यथास्थिति, प्रतिनिधियों सदस्यों की सूची;
(2) समिति के सभापति, उपसभापति या प्रतिनिधियों के निर्वाचन की स्थिति में प्रबन्ध कमेटी के निर्वाचित सदस्यों की सूची;
(3) सदस्यों के प्रतिनिधि के निर्वाचन की स्थिति में उस क्षेत्र के या जहॉ से सम्बद्ध समिति के सामान्य निकाय में प्रतिनिधि निर्वाचित किया जाना हो, सदस्यों की सूची,
(थ) ओद्योगिक समिति का तात्पर्य किसी ऐसी सहकारी समिति से है जिसका उद्देश्य अपने आप माल निर्मित करना या अपने सदस्यों द्वारा माल निर्मित करने की सुविधा देना हो,
 

3[qq ^^Primary Urban Cooperative Bank ^^ means a primary cooperative society majority of members whereof are non agriculturists and the primary object whereof is to accept deposits and to raise funds which it may invest and lend to its members.]


(द) निर्माण ऋणीका तात्पर्य किसी ऐसे व्यक्ति से है जिसके विरूद्ध    धारा 92 में अभिदिष्ट कोई अ‍भिनिर्णय या आदेश दिया गया हो,
(ध) श्रम संविदा समिति का तात्पर्य किसी सहकारी समिति से है जिसका मुख्य उद्देश्य श्रम ठेके पर निर्माण कार्य करना या अपने सदस्यों के लिए यथा कर्मवृत्ति के आधार पर या समयावृत्ति के आधार पर सेवायोजन की व्यवस्था करना हो,
--------------------------------------------
1.अधिसूचना सं0 1194/12-सी-1-1978, दिनांक 24 फरवरी, 1978 के द्वारा बढ़ाये गये।
2.अधिसूचना सं0 3815/सी-1-77-7(5)/1977, दिनांक 24 दिसम्बर,1977 के द्वारा बढ़ाये गये।

3.Ins. by Noti. No. 4410/XII-C-85-7(5)-84 Dated Dec.5 ,1985


(न)क्रय विक्रय समिति का तात्पर्य किसी ऐसी प्रारम्भिक समिति से ह जिसका कार्य क्षेत्र किसी एक जिले का केवल एक भाग या एक से अधिक जिलों का कोई भाग हो और जिसका मुख्य उद्देश्य अपने साधारण सदस्यों की उपज के क्रय विक्रय की व्यवस्था करना हो,
(प)किसी व्यक्ति का निकट सम्बन्धी का अभिदेश उसके निम्नलिखित सम्बन्धियों से है-
(1)पत्नी,                                               (13)पौत्र या पौत्री,
(2)पति,                                               (14) बुआ,
(3)पुत्र,                                                (15)भाई,
(4)पुत्री,                                               (16)भतीजा,
(5)सुर,                                            (17)बहिन,
(6)सास,                                             (18)भजा
(7)साली,                                            (19)पिता के भाई,
(8)साला,                                            (20)मामा,
(9)पति की बहिन,                            (21)दामाद,
((10)पति का भाई,                           (22)पुत्रवधु,
(11)पिता,                                          (23)जीजा(बहनोई),
(12)मांता,

1[(पप)नागरिको के अन्य पिछड़े वर्गो का वही तात्पर्य होगा जो उत्तर प्रदेश लोकसेवा (अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जन जातियों और अन्य पिछड़ेवर्गो के लिए आरक्षण) अधिनियम 1994 की धारा 2 खण्ड (ख) में उसके लिए दिया गया है]
(फ) किसी सहकारी समिति की स्वाधिकृत पूजी का तात्पर्य समिति की संचित हानियों को, यदि कोई हों, निकाल देने के पश्चात निम्नलिखित मदों के योग से है-
(1) दत्त अंश पूजी;
(2) संचित रक्षित निधि;
(3) धारा 58 की उपधारा (1) के खण्ड (ख) में उल्लिखित सहकारी शिक्षा निधि को छोड़कर समिति की कोई अन्य निधि जो उसके लाभ से सृजित हो; और
(4) सरकार अनुदानों से सृजित निधिय जिनकी व्यवस्था समिति के लिए निधिय सृजित करने के प्रयोजनो या विशेष संचित सृजित करने के प्रयोजनार्थ की जाये;
(ब) उत्पादन तथा विक्रय समिति का तात्पर्य किसी ऐसी सरकारी समिति से है-
(1) जो ऋण समिति न हो, और
(2) जिसका मुख्य उद्देश्य माल पैदा करना, उसका उत्पादन या प्रक्रिया करना और उन्हें बेचना अथवा अपने सदस्यों के माल पैदा करने, उसका उत्पादन या प्रक्रिया करने में सहायता देना अथवा अपने सदस्यों द्वारा पैदा किये गये, उत्पादित या प्रक्रिया किये गये माल को बेचना हो;


--------------------------------------
1.अधिसूचना संख्या 719एम/49-1-95-7(10)/95, दिनांक 16.11.95 द्वारा बढ़ाया गया एवं उ0प्र0 सरकारी असाधारण गजट भाग-4 खण्ड(ख) में दिनांक 16.11.1995 को प्रकाशित हुआ।


(भ) प्रारम्भिक समिति का तात्पर्य किसी ऐसी सहकारी समिति से है जिसकी साधरण सदस्यता किसी अन्य सहकारी समिति के लिये न होः
प्रतिबन्ध यह है कि कोई भी ऐसी सहकारी क्रय विक्रय समिति जिसका कार्य क्षेत्र किसी जिले का केवल एक भाग या एक से अधिक जिलों का भाग हो, प्रारम्भिक समिति होगी चाहे कोई अन्य सहकारी समिति उसकी साधारण सदस्य हो या न हो;

प्रतिबन्ध यह भी है कि कई प्रारम्भिक सहकारी समिति जिसका कोई अंश किसी केन्द्रीय या शीर्ष समिति ने अधिनियम के अध्याय 6 के अधीन खरीद लिया हो, प्रारम्भिक समिति बनी रहेगी भले ही अंश खरीद लिए गये हों,
1[(म) उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक का तात्पर्य उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक अधिनियम,1964(उत्तर प्रदेश अधिनियम संख्या 16 सन 1964) की धारा 2 के उपखण्ड () में यथा परिभाषित किसी सहकारी समिति से है।
(य) विक्रय अधिकारी का तात्पर्य इस नियमावली के अधीन विक्रय अधिकारी के कृत्यों को करने के लिए निबन्ध द्वारा अधिकृत व्यक्ति से है,
(कक)प्रत्यादान अधिकारी का तात्पर्य इस नियमावली के अधीन प्रत्यादान अधिकारी के कृत्यों को करने के लिये निबन्धक का अधीनस्थ तथा निबन्धक द्वारा अधिकृत व्यक्ति से है,
(खख) धारा का तात्पर्य अधिनियम की धारा से है,
(गग) नगर केन्द्रीय बैंक का तात्पर्य किसी ऐसे केन्द्रीय बैंक से जिसका मुख्य उद्देश्य नगर सहकारी समितियों को वित्त पोषण करना हो,
(घघ) नगर सहकारी समिति का तात्पर्य किसी ऐसी सहकारी समिति से हे जिसके अधिकांश सदस्य कृषक हो,
2[(घघघ) निर्बल वर्ग का तात्पर्य समाज के ऐसे वर्ग से है जिसमें अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जन जातियों और नागरिकों के अन्य पिछडे वर्गो के व्यक्ति समाविष्ट है,
(डड)सहकारी समिति की कार्यरत पूजी का तात्पर्य उसकी स्वाधिकृत पूजी और ऐसी निधियों से हे जो वह निक्षेपों द्वारा उधर ले कर या किसी अन्य प्रकार से उगाहे,
(चच) थोक उपभोक्ता स्टोर का तात्पर्य किसी ऐसे केन्द्रीय समिति से है जिसका मुख्य उद्देश्य ऐसा माल प्राप्त करना अथवा बेचना हो जो उसके सदस्यों द्वारा अथवा ऐसी समिति से सम्बद्ध समितियों के सदस्यों द्वारा उपयोग के लिए सामान्यता अपेक्षित हो।
-----------------------------
1.अधिसूचना संख्या 3849/49-1-98-7(11)-97, लखनऊ, दिनांक 31 अक्टूबर,1998 द्वारा प्रतिस्थापित
2. अधिसूचना संख्या 719 एम/49-1-95-7(10)/95, दिनांक 16.11.1995 द्वारा बढ़ाया गया।