अध्याय 10
सचिव



124. [ कोई सहकारी समिति किसी ऐसे व्यक्ति को अपना सचिव नियुक्त करेगी जो धारा 120 में निर्धारित अर्हताये न रखता हो या जो उस धारा की अपेक्षानुसार प्रतिभूति, यदि कोई हो, जमा न करे या जो समिति की प्रबन्ध कमेटी के किसी सदस्य का निकट सम्बन्धी हो। ऐसी प्रत्येक नियुक्त धारा 121 या 122 के अन्तर्गत बनये गये विनियमों, यदि कोई हो, के अधीन होगी। यदि सरकार ने-
(क) किसी सहकारी समिति को अंश पूजी में कम से कम एक लाख रूपये अभिदत्त किया हो,
(ख) किसी सहकारी समिति को ऋण दिया हो या अग्रिम की धनराशि दी हो, या
(ग) किसी सहकारी समिति द्वारा जारी किये गये ऋण पत्रों पर मूलधन के प्रतिदान ओर ब्याज के भुगतान की प्रत्याभूति दी हो, या
(घ) किसी सहकारी समिति के मूलधन के प्रतिदान और ब्याज तथा ऋणों और अग्रिम धनराशि के भुगतान की प्रतयाभूति दी हो, या तो ऐसी सहकारी समिति के सचिव की नियुक्ति नियम 125 में की गई व्यवस्था के अनुसार निबन्धक के पूर्वानुमोदन से की जायेगी।,
125. (1) निबन्धक के अनुमोदन के लिए सचिव के रूप में किसी व्यक्ति को नियुक्त करने का प्रस्ताव भेजते समय, सहकारी समिति, चयन से सम्बन्धित सम्पूर्ण अभिलेख निबन्धक को प्रस्तुत करेगी और किसी विशिष्ट अभ्यर्थी को चुनने का कारण भी देगी।
(2) यदि वह व्यक्ति, जिसका नाम उपनियम (1) के अधीन समिति द्वारा निबन्धक को प्रस्तुत किया गया हो, निबन्धक द्वारा अनुपयुक्त समझा जाये तो, वह अपनी आपत्तिय समिति को सूचित करेगा।
(3) उपनियम (2) के अधीन निबन्धक से आपत्तिय प्राप्त होने पर समिति उसी आपत्तियों को ध्यान में रखते हुये उक्त मामले पर पुनर्विचार करेगी र प्रार्थियों में से ऐसे दूसरे नाम का, जो सबसे उपर्यक्त समझा जाये, सुझाव देगी। ऐसा करते समय समिति ऐसे दो ओर व्यक्तियों को भी उल्लिखित करेगी जो समिति की राय में सचिव नियुक्त किये जाने के लिए उपयुक्त हो।
(4) निबन्धक ऐसे अभ्यर्थी की नियुक्ति का अनुमोदन कर सता है, जो समिति द्वारा सबसे उपर्युक्त बताया गया हो और यदि यह उक्त अभ्यर्थी को अनुपयुक्त समझे, तो वह अन्य दो अभ्यर्थियों मे से किसी का अनुमोदन कर सकता है और अपना अनुमोदन कारणो सहित समिति को सूचित करेगा।
(5) यदि प्रार्थियों की संख्या एक या दो से अधिक न हो, तो निबन्धसमिति से रिक्ति को पुनः अधिसूचित करने की अपेक्षा कर सकता है अथवा वह समिति द्वारा चुने गये अभ्यर्थी का अनुमोदन कर सकता हसा कि वह उचित समझे।
स्पष्टीकरण- इस अधिनियम के प्रयोजनार्थ, कोई अम्यर्थी निबन्धक द्वारा केवल तभी अनुपयुक्त समझा जायेगा, यदि-
(1) अभ्यर्थी धारा 120 के अधीन निर्धारित अथवा धारा 121 अथवा 122 के अधीन बनाये गये विनियमो अथवा नियमों एवं उपनियमों के किसी अन्य उपबन्धों के अधीन अर्हताओं की पूर्ति न करे, अथवा
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उत्तर प्रदेश असाधारण गजट की अधिसूचना सं0 196-1/ 12- सी0ए0- 5(1)-69-बी0,दिनांक 15 जून, 1972 के द्वारा प्रतिस्थापित।

(2) अभ्यर्थी प्रबन्ध समिति के किसी सदस्य का निकट सम्बन्धी हो, अथवा
(3) शिक्षा, अनुभव अथवा सुसंगत अर्हताओं का विचार करके, प्रार्थियों मे से कोई स्पष्टतया अच्छा अम्यर्थी, निबन्धक की राय में नियुक्ति के लिए उपलब्ध हो।
[126. नियम 124 तथा 125 के उपबन्धों के होते हुये भी, कोई सहकारी समिति-
(1) निबन्धक से या उसके माध्यम से राज्य सरकार से, समिति के सचिव का पद धारण करने के लिए किसी सरकारी सेवक की सेवाओं की प्रतिनियुक्ति पर या निःशुल्क अथवा अंशदान केआधार पर, समिति को निर्दिष्ट अवधि के हेतु देने के लिए,
(2) किसी केन्द्रीय समिति से, उसके किसी कर्मचारी की सेवाओं की निर्दिष्ट अवधि के लिए सहकारी समिति में सचिव का पद धारण करने के हेतु समिति को प्रतिनियुक्ति पर देने के लिए,
अनुरोध कर सकती है।]
127. (1) नियम 125 या 126 के अधीन सचिव की नियुक्ति होने तक, समिति की प्रबन्ध कमेटी धारा 120 के उपबन्धो के और धारा 121 या 122 के अधीन बनाये गये विनियमों के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, किसी उपयुक्त व्यक्ति को स्थानापन्न सचिव के रूप में नियुक्त कर सकती है।
(2) उपनियम (1) के अधीन नियुक्त स्थानापन्न सचिव छः माह से अनधिक अवधि के लिए ‍िनयम 125 या 126 के अधीन सचिव की नियुक्ति हो जाने तक, इसमें जो भी पहले हो, पदधारण करेगा।




टिप्पणी


उ0प्र0 सहकारी समिति नियमावली, 1968 नियम 127,125 तथा 124-भारत का संविधान, अनुच्छेद 226-सेवा समाप्ति के प्रति आपत्ति करते हुए रिट याचिका याची की जो कि गोविन्द नगर कोआपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी लिमिटेड, मथुरा में सचिव का पद धारण कर रहा था, सेवा उस समिति के प्रशासक द्वारा समाप्त कर दी गई-अभिलेख से यह पता लगता थ कि याची स्थानापन्न सचिव नही था, अपितु एक स्थाई पद धारक था-अतः उसकी सुनवाई का अवसर प्रदान किये बिना सेवा समाप्ति को अवैध माना गया। चन्द्रभान गर्ग बनाम दी डिस्ट्रिक असिस्टैन्ट रजिस्ट्रार, कोआपरेटिव मथुरा, आदि। 1973 UPLBEC,489
128. कोई सहकारी समिति प्रबन्ध कमेटी नियम एवं 125 के उपबन्धों के अधीन रहते हुए सचिव को सहायता देने के लिए धारा 31 की उपधारा (3) के अधीन एक या अधिक व्यक्तियों को नियुक्त कर सकती है, यदि इस प्रकार की नियुक्ति कार्यभार के इतना अधिक होने के कारण वश्यक हो जाये कि सचिव अपने कृत्यों का सम्पादन और कर्तव्यों का पालन अकेले दक्षतापूर्वक करने में समर्थ हो और समिति ऐसी नियुक्ति में होने वाले वित्तीय भार का वहन कर सके। इस प्रकार नियुक्त व्यक्ति सचिव के नियन्त्रण, पथ प्रदर्शन तथा पर्यवेक्षण के अधीन कार्य करेगे।
129. किसी सहकारी समिति का सचिव समिति की प्रबन्ध कमेटी का न तो सदस्य होगा और न उसे मत देने का अधिकार होगा, भले ही वह नियमों या ऐसी समिति की उपविधियों के अधीन संघटित समिति की किसी अन्य कमेटी या उप कमेटी का सदस्य हो, जहऐसी कमेटी या उप कमेटी में समिति के सामान्य निकाय या प्रबन्ध कमेटी का कोई सदस्य हो।
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1. उत्तर प्रदेश असाधारण गजट की अधिसूचना सं0 196-1/ 12- सी0ए0 -5 (1)-69-बी0 दिनांक 14 जून, 1972 द्वारा रखे गये।


1[130. (1) यदि सहकारी समिति के सचिव की यह राय हो कि-
(क) समिति की प्रबन्ध कमेटी अथवा सामान्य निकाय द्वारा पारित कोई सकल्प अथवा
(ख) सहकारी समिति के किसी अधिकारी द्वारा दिया गया कोई आदेश-
समिति के उद्देश्यों के अन्तर्गत न आता हो, या अधिनियम, नियमों अथवा समिति की अपविधियों के उपबन्धों के प्रतिकू हो और उस दशा में जब ऐसे संकल्प या आदेश को कार्यान्वित किये जाने से रोका न जाये, तो उक्त संकल्प के रद्द करने अथवा आदेश के निरसित करने का आदेश जो धारा 128 के अधीन निन्धक द्वारा दिया जाये, निष्फल हो जायेगा।


सचिव


(1) समिति के सभापति से तुरन्त यह लिखित अनुरोध करेगा कि वह उक्त मामले को निबन्धक कपास उसके निर्णय के लिए भेजेः
प्रतिबन्ध ह है कि यदि सभापति सचिव को ऐसा अभिदेश करने के तीन दिन के भीतर अभिदेश न करे, अथव सचिव को ऐसा अभिदेश करने के लिये लिखित निर्देश न दे, तो सचिव स्वयं उक्त मामले को निबन्धक के निर्णय के लिये भेज सकता है;
(2) निबन्धक का निर्णय प्राप्त होने तक यथास्थिति संकल्प या आदेश के कार्यान्वयन को तुरन्त रोक देगा, यदि सचिव का, उन कारणों के आधार पर जो अभिलिखित किये जायें, समाधान हो गया हो कि इस प्रकार की कार्यवाही करना समिति के हित में आवश्यक है।
(2) निबन्धक, यथाशक्य शीध्र किन्तु उपनियम (1) के अधीन अभिदेश प्राप्त होने के 30 दिन के भीतर उक्त मामले की जच करेगा, और यदि वह ऐसा निर्णय करे कि जो संकल्प या आदेश सचिव न उसके पास भेजा है वह-
(क) धारा 128 के उपबन्धों के अन्तर्गत नही आता है तो वह संकल्प या आदेश को प्रभावी बनाने का निर्देश देगा और सचिव दनुसार कार्य करेगा।
(ख) धारा 128 के उपबन्धों के अन्तर्गत आता है तो वह धारा 128 के अधीन कार्यवाही होने तक यथास्थिति संकल्प या आदेश के कार्यान्वयन को रोक रखने के लिए सचिव को निदेश देगा और सचिव तदनुसार कार्य करेगा।
प्रतिबन्ध यह है कि निबन्धक ऐसा आदेश पारित करने के पूर्व समिति से संकल्प या आदेश पर पुनर्विचार करने की अपेक्षा करेगा।
(3) जहनिबन्धक द्वारा लिए गये निर्णय की सूचना उस दिनांक से जिसक अभिदेश किया गया था, पैतीस दिन के भीतर सचिव को प्राप्त न हो तो सचिव यथास्थिति संकल्प अथवा आदेश के कार्यान्वयन को और नही रोकेगा।
131. नियम 130 मे दी किसी बात से निबन्धक के धारा 128 के अधीन स्वयं अपने आप कार्यवाही करने के अधिकार पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नही पडे़गा।
2[131.क. प्रबन्ध कमेटी और किसी शीर्ष समिति के सभपति का अधिनियम की धारा 31.क की उपधारा (4) में प्रगणित मामलों के सम्बन्ध में समिति के प्रबन्ध निदेशक पर कोई नियन्त्रण नही होगा जब तक कि इन नियमों या समिति की उपविधि में विनिर्दिष्ट रूप से उपबन्धित न हो


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1. अधिसूचना संख्या 2700/49-1-94-7(1)-94, दिनांक 15.7.94 द्वारा बदला गया।
2. अधिसूचना सं0 2395/49-1-2001-7(10)-95 टी0सी0, दिनांक 30 अगस्त, 2001 द्वारा निकाल दिया गया तथा अधिसूचना सं0 965 /49 -1- 2003-500 (24)/2003 दिनांक 28 गई, 2003 द्वारा प्रतिस्थापित जो कि उ0प्र0 असाधारण गजट भाग-4 खण्ड (ख) दिनांक 28 मई 2003 को प्रकाशित हुआ।