अध्याय 11
सहकारी समितियों को राज्य की सहायता



132. धारा 44 की उपधारा (2) के खण्ड (क) के अधीन धनराशि देने के प्रयोजनार्थ, राज्य सरकार,
(क) ऐसी शर्तो एवं निर्बन्धों को निर्धारित कर सकती हे जिसे वह उचित समझे, तथा
(ख) ऐसी सहकारी समितियों को निर्दिष्ट कर सकती है जिनमें अंश क्रय किये जायेंगे।
133. (क) किसी सहकारी समिति के प्रार्थना पत्र पर और निधि के उपबन्ध होने के अधीन रहते हुए, राज्य सरकार प्रार्थी समिति को निम्नलिखित किसी एक या अधिक प्रयोजनों के लिये धारा 55 के खण्ड (घ) के अधीन वित्तीय सहायता दे सकता है-
(1) समिति के सदस्यों द्वारा माल के उत्पादन या निस्तारण में सुविधा देना;
(2) समिति द्वारा हाथ में लिये गये कृषि या औद्योगिक कार्य संचालन और उसे विकसित करना;
(3) पूर्व ऋण का मोचन, समिति के सदस्यों द्वारा भूमि का क्रय और सुधार अथवा अपने सदस्यों के लाभ हेतु सिंचाई सुविधाओं की व्यवस्था करने के लिये किसी परियोजना का निर्माण करना;
(4) समिति अथवा उसके सदस्यों द्वारा निवास गृहों का निर्माण करना;
(5) समिति द्वारा अपनी उपविधियों के अनुसार पहले उधार लिये गये धन का प्रतिदान करना;
(6) समिति के दक्षतापूर्ण प्रबन्ध के लिए कर्मचारी वर्ग रखना;
(7) ऐसी गाडिय, मशीनें तथा सज्जा खरीदना जो समिति के उद्देश्यों को कार्यान्वित करने के लिए आवश्यक हों, और
(8) कोई अन्य उद्देश्य जो राज्य सरकार, उचित समझे और जिसकी व्यवस्था समिति की उपविधियों में की जाये।
(ख) उपनियम (क) के अधीन किसी सहकारी समिति को स्वीकृत वित्तीय सहायकता ऐसी शर्तो और निर्बन्धों के अधीन होगी जो राज्य सरकार, समय समय पर सामान्य या विशेष आदेश द्वारा निर्धारित करें।
134. कोई सहकारी समिति जो अधिनियम के अध्याय 4 के अधीन वित्तीय सहायता के लिए मांग करें, ऐसी सूचना देगी तथा ऐसी विवरणिय प्रस्तुत करेगी और अन्य औपचारिकताओं को पूरा करेगी जिनकी निबन्धक या सरकार द्वारा अपेक्षा की जाये।
135. राज्य सरकार किसी सहकारी समिति या सहकारी समितियों के वर्ग की पूजी में राज्य के भाग लेने का अंश अवधारित करेगी। साधरणतया, यह अंश समिति की अभिदत्त अंश पूजी के पचास पतिशत से अधिक न होगा। यह सहकारी चीनी के कारखानों, कताई तथा बुनाई की मिलों, दुग्ध उत्पाद समितियों, ऐसी समितियों, की यूनियन या ऐसी यूनियन के फैडरेशन की दशा में और प्रक्रिया से सम्बन्धित तथा कोल्ड स्टोरेज निर्माण करने वाली सहकारी समितियों या ऐसे औद्योगिक कार्य कलाप करने वाली समितियों की दशा में जिनके लिए राज्य सरकार की राय में, समिति के अंश पूजी में राज्य द्वारा उदारता से भाग लेने की आवश्यकता हो, यह अंश समिति की अभिदत्त अंश पूजी के साठ प्रतिशत या उससे अधिक हो सकता है।