अध्याय 12
सहकारी समितियों की सम्पत्तियॉ और निधिय




136 1[* * * ]
137. नियम 91 के उपबन्धों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, शुद्व लाभ को कोई भाग, वार्षिक सामान्य बेठक के अनुमोदन के बिना विनियोजित नही किया जायेगा।
2[138. (1) प्रत्येक सहकारी समिति अपने शुद्व लाभ में से सहकारी शिक्षा निधि में वर्ष की समाप्ति के एक माह के भीतर अपने शुद्व लाभ का आधा प्रतिशत की दर से या नीचे दी गयी धनराशि का इसमें जो अधिक हो अंशदान करेगी-
(क) प्रारम्भिक सहकारी समिति 500 रूपये प्रतिवर्ष;
(ख) जिला/केन्द्रीय सहकारी बैंक 10,000 रूपये प्रतिवर्ष;
(ग) अन्य केन्द्रीय सहकारी समितिय 5,000 रूपये;
(घ) उत्तर प्रदेश सहकारी बैंक, उत्तर प्रदेश ग्राम विकास बैं, उत्तर प्रदेश कोआपरेटिव फेडरेशन 1,00,000 रूपये प्रतिवर्ष;
(ड.) उपर्युक्त (घ) से भिन्न अन्य शीर्ष समितिय 25,000 रूपये प्रतिवर्ष:
प्रतिबन्ध यह है कि ऐसी सहकारी समितिय  जिनमें वर्ष में हानि उपगत हो, भी सहकारी शिक्षा निधि में अंशदान करेगीः
अग्रेतर प्रतिबन्ध यह है कि निबन्धक किसी सहकारी समिति की आर्थिक स्थिति खराब होने के आधार पर उसे अंशदान करने से पूर्णतः या अंशतः छूट दे सकता है।
(2) प्रत्येक सहकारी समिति अपने शुद्व लाभ में से एक प्रतिशत अथवा अधिकतम 2,500/- रूपये उस वर्ग की शीर्ष समिति में जिससे वह समिति सम्बन्धित हे सृजित शध एवं विकास निधि में अंशदान करेगीः
प्रतिबन्ध यह है कि उस वर्ग की शीर्ष समिति का अंशदान 10,000/ रूपये से कम न होगा और अन्य वर्ग या वर्गो की समितिय   भी ऐसा अंशदान कर सकती है जैसा कि निबन्धक द्वारा समय समय पर अवधारित किया जाये।,
139. (1) सहकारी शिक्षा निधि का प्रबन्ध नियम 147 में निर्दिष्ट विनियमों के अनुसार और निम्नलिखित प्रकार से संघटित उप कमेटी की सिफारिशों पर यू0पी0 कोआपरेटिव यूनियन द्वारा किया जायेगा-
(1) प्रत्येक शीर्षक की सहकारी समिति का उस समिति के प्रबन्ध कमेटी द्वारा नाम निर्दिष्ट एक प्रतिनिधि;
(2) गन्न आयुक्त और उद्योग निदेशक में से प्रत्येक का एक एक नाम निर्दिष्ट व्यक्ति;
(3) राज्य सरकार का एक नाम निर्दिष्ट व्यक्ति; और
(4) सदस्य संयोजक के रूप में कार्य करने के लिए निबन्धक द्वारा नाम निर्दिष्ट सहकारी विभाग का एक अधिकारी।
(2) उप कमेटी अपने सभापति का चुनाव करेगी।
140. उत्तर प्रदेश कोआपरेटिव यूनियन सहकारी शिक्षा निधि के प्रशासन और उससे सम्बद्ध  विषयों के लिए विनियम तैयार करेगी; ये विनियम निबन्धक के अनुमोदन के अधीन होंगे।
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1.अधिसूचना सं0 2700/49-1-94-7(1)-94, दिनांक 15.7.94 द्वारा निकाला गया।
2. अधिसूचना सं0 3849/49-1-98-7(11)-97 लखनऊ, दिनांक 31 अक्टूबर 1998 द्वारा प्रतिस्थापित हुआ।


141. सहकारी शिक्षा निधि के नाम से जमा की जाने वाली धनराशि उत्तर प्रदेश सहकारी बैंक या सम्बद्ध जिले के केन्द्रीय सहकारी बैंक के लेखे में रखी जायेगी।
142. सहकारी शिक्षा निधि में या धृत सभी धनराशि, सिवाय नियम 140 में अभिर्दिष्ट विनियमों में की गई व्यवस्था के, न तो व्यय की जायेगी और न उसका उपयोग किया जायेगा।
143. सहकारी शिक्षा निधि का उपयोग निम्नलिखित सभी या किसी एक प्रयोजन के लिये किया जा सकता है-
(1) नेशनल कोआपरेटिव यूनियन आफ इन्डिया को अंशदान;
(2) सहकारिता के सिद्धान्तों और व्यवहारों में सहकारी समितियों के सदस्यों को शिक्षा,
(3) सहकारी शिक्षा के प्रसारण के लिए;
(4) सहकारी शिक्षा के लिए सहकारिता सम्बन्धी पुस्तकों तथा अन्य साधनों को तैयार करना, उसकी रचना और प्रकाशन;
(5) धारा 122 के अधीन बनाये गये प्राधिकारी को अंशदान; और
(6) निबन्धक की अनुज्ञा से किसी अन्य प्रयोजन के लिए उपर्युक्त उद्देश्यों की पूर्ति में सहायक हो।
1[143क. शोध एवं विकास निधि का उपयोग निम्नलिखित से भिन्न मदों पर सम्बन्धित वर्ग की शीर्ष सहकारी समिति द्वारा नही किया जायेगा-
(1) सहकारी आन्दोलन के विकास या समितियों के किसी वर्ग या वर्गो के विकास के लिये कोई शोध करना,
(2) सहकारी आन्दोलन के विकास या समितियों के किसी वर्ग या वर्गो के विकास के लिये कोई क्रिया कलाप करना,
(3) समितियों को शोध परामर्श जिसमें अध्ययन, यदि कोई हो, समिम्लित है, प्रदान करने का प्रयास करना,
(4) कोई अन्य ऐसा कार्य जो उपर्युक्त उद्देश्यों की प्राप्ति में सहायता या वृद्धि कर सके,
143ख. शोध एवं विकास निधि के प्रयोजन के लिए नियम, 139,140,141,142,145 और 146 के उपबन्ध यथावष्यक परिवर्तन सहित लागू होगे मानों वे अनन्य रूप से शोध और विकास निधि के लिये तात्पर्यित हो।]
144. सहकारी शिक्षा निधि का उपयोग, यथासम्भव, सहकारी वर्ष की सभी तिमाही में समान रूप से किया जायेगा।
145. सहकारी शिक्षा निधि का वार्षिक बजट इस प्रकार तयार किया जायेगा कि कुल व्यय उक्त सहकारी वर्ष में अनुमानित प्राप्तियों के पचास प्रतिशत से अधिक न हो जिसमें निधि पहले स्थापित की जाये और अनुवर्ती सहकारी वर्ष में व्यय पिछले 30 जून को शेष धनराशि के पचास प्रतिशत से अधिक न होः
प्रतिबन्ध यह है कि उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय या अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के सम्मेलन आयोजित क, जसे साधारण कारणों के लिए किसी विशेष सहकारी वर्ष में व्यय, राज्य सरकार की अनुज्ञा से, पिछले 30 जून को शेष धनराशि के पच्चासी प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता है।
146. सहकारी शिक्षा निधि के लेखों की परीक्षा 64 में की गई व्यवस्था के अनुसार की जायेगी, मानो वे किसी सहकारी समिति के लेखे हों।
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1.नियम 143-क और 143-ख अधिसूचना सं0 2700/49-1-94-7(1)-94,दिनांक 15.7.94 से बढ़ाये गये।


147.असीमित दायित्व वाली कोई सहकारी समिति किसी सदस्य या भूवपूर्व सदस्य को किसी सहकारी वर्ष के लिए अंश के सम्बन्ध में लाभांश का भुगतान केवल तभी कर सकती है जब ऐसे अंशों के सम्बन्ध में लाभांश का भुगतान केवल तभी कर सकती है जब ऐसे अंशो के सम्बन्ध में पहली किस्त के प्राप्त होने के दिनांक से दस वर्ष व्यतीत हो गये हों।
148. समिति दायित्व वाली कोई सहकारी समिति प्रथम सहकारी वर्ष के कार्य पर लाभांश देना शुरू कर सकती है। कोई भी लाभांश किसी ऐसे अं पर, जो ऐसे सहकारी वर्ष की, जिसके सम्बन्ध में लाभ का वितरण किया जाना हो, समाप्ति पर कम से कम छः माह तक धृत न किया गया हो, दत्त धनराशि पर देय नही होगा। एक वर्ष से कम और छः माह से अधिक समय तक धृत अंशों पर लाभांश छः माह के लिए देय होगा।
149. किसी सहकारी समिति द्वारा धारा 58 की उपधारा (1) के अधीन अपन शुद्व लाभ में से रक्षित निधि और सहकारी शिक्षा निधि की धनराशि निर्दिष्ट करने के बाद, वह उक्त शुद्व लाभों के शेष को उक्त धारा की उपधारा (2) के खण्ड (क),(ख),(ग) और (घ) में उल्लिखित सभी अथवा किसी प्रयोजन के उपयोग में ला सकती हैः
प्रतिबन्ध यह है कि अनुमानित अशोध्य अथवा संदिग्ध ऋणों को पूरा करने के लिये अशोध्य ऋण निधि पर्याप्त न हो, तो शुद्व लाभों को शेष के केवल तभी उपयोग में लाया जा सकता है जब अशोध्य ऋण निधि में ऐसी आवश्यक धनराशि का अंशदान कर दिया गया हो जिससे वह धनराशि अशोध्य और संदिग्ध ऋणों को पूरा करने के लिए पर्याप्त होः
स्पष्टीकरण-अशोध्य ऋण निधि के अन्तर्गत अशोध्य ऋण आरक्षण भी सम्मिलित होगा।
150. किसी ऐसी सहकारी समिति की, जिसकी कोई अंश पूजी न हो, निधियों का कोई भाग लाभांश के रूप में नही किया जायेगा।
151. (1) किसी सहकारी समिति द्वारा लाभांश का भुगतान नही किया जायेगा जब तक किसी ऋणदाता की समिति द्वारा देय किसी ऐसे दावे की जो धारा 66 की उपधारा (1) के अधीन किये गये निरीक्षण में साबित हो गया हो, अदायगी न कर दी गई हो, अथवा
(2) यदि धारा 65 की उपधारा (1) के अधीन जांच जारी हो अवा पूरी हो गई हो और निबन्धक ने यह निदेश दिया हो कि आदेश के निर्दिष्ट के दौरान कोई भी लाभांश नही दिया जायेगा, समिति द्वारा कोई लाभांश ऐसी अवधि के दौरान भुगतान न किया जायेगा।
152. अंश प्रमाण पत्र जारी न किये जाने के कारण,नियमों तथा उप विधियों के उपबन्धों के अधीन देय लाभांश के सम्बन्ध में किसी अंशधारी के दावे पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नही पड़ेगा।
153. यदि कोई सहकारी समिति अपने वित्त पोषण बैंक की उस सीमा तक देनदार हो जो ऐसी समिति द्वारा बैंक से लिये गये ऋण से पन्द्रह प्रतिशत से कम न हो तो उक्त समिति अपने शुद्व लाभ के किसी भाग का उपयोग धारा 58 की उपधारा (2) के खण्ड (क) से (ड.) तक के अधीन उस वित्त पोषण बैंक के सामान्य या विशेष अनुज्ञा के बिना नही किया जायेगा।
154. कोई नगर सहकारी समिति ग्राम सुधार निधि में अंशदान नही करेगी।
155. वेतन या मजदूरी अर्जित करने वालों की किसी सहकारी ऋण तथा अल्प व्यय समिति को निबन्धक लिखित रूप में अपने शुद्व लाभ का कम से कम दस प्रतिशत रक्षित निधि में अंशदान करने की अनुज्ञा दे सकता है, यदि समिति-
(1) अपने ऋण की ब्याज की दर को, उस सीमा तक कम करने के लिए तैयार हो जो निबन्धक को स्वीकार हो या जिसका उसने सुझाव दिया हो, और
(2) उसने धारा 40 के अधीन ऋण ग्रहीता सदस्यों के उनके वेतन से अपने देयों की वसूलों के लिए सहमति प्राप्त कर लिया हो जैसा कि धारा 46 के अधीन व्यवस्थित है।
156. धारा 58 की उपधारा (3) के अधीन निबन्धक को प्रार्थना पत्र देने वाली किसी सहकारी समिति की-
(1) यदि उसके अधिकांश सदस्य ऐसे छात्र या प्रशिक्षार्थी हों, जिनके सम्बन्ध में यह सम्भावना हो कि वे अपना अध्ययन या प्रशिक्षण पूरा कर लेने पर समिति को छोड़ देगे निबन्धक, रक्षित निधि में शुद्व लाभ का दस प्रतिशत कम प्रदिष्ट करने और लाभांश की दर को पन्द्रह प्रतिशत तक बढ़ाने की अनुज्ञा दे सकता हे और धारा 58 की उपधारा (2) के खण्ड (ग) में उल्लिखित किसी या सभी निधियों मे अंशदान करने से छूट भी दे सकता है,
(2) यदि वह कृषि समिति हो उसे निबन्धक, धारा 58 की उपधारा (3) में अधीन लाभांश के प्रतिशत को बीस तक बढ़ने और सहकारी शिक्षा निधि में अपने अंशदान को नियम 128 में उल्लिखित सामान्य दर के दसवें भाग तक कम करने की अनुज्ञा दे सकता है,
(3) यदि वह किसी अन्य प्रकार की समिति हो तो उसे निबन्धक, रक्षित निधि में अपने अंशदान के बीस प्रतिशत तक कम करने और अपने लाभांश के प्रतिशत को साढ़े बारह प्रतिशत तक बढ़ाने की, जब तक कि इस नियमावली के अधीन अन्यथा अनुज्ञेय न हो, अनुज्ञा दे सकता है।
157. निबन्धक, धारा 58 की उपधारा (3) के अधीन किये गये किसी भी सहकारी समिति के अनुरोध को स्वीकार नही करेगा, यदि समिति-
(1) असीमित दायित्व वाली हो;
(2) अन्तिम लेखा परीक्षा वर्गीकरण में वर्ग ग के नीचे रख गई हो,
(3) उसका सदस्यों के प्रति अतिदेय;
(4) उसका संचालन बाहरी ऋण या असदस्यो की जमा धनराशि से हो रहा हो;
(5) प्रार्थना पत्र देने के दिनांक को वित्तीय वचनबद्धता से अनुन्मुक्त हो; और
(6) उसके पास अपर्याप्त रक्षित निधि हो या रक्षित निधि समिति के कारोबार के बाहर उचित रूप से लगाई गई न हो।
158. निबन्धक, धारा 58 की उपधारा (3) के अधीन अनुरोध करने वाली सहकारी समिति से यह अपेक्षा कर सकता है कि उक्त समिति उसे सम्बद्ध सहकारी वर्ष के सम्पूर्ण लाभ को बटने का प्रस्ताव प्रस्तुत करे और वह अपने विवेक से समिति के अनुरोध को या तो स्वीकार कर सकता है अथवा अस्वीकार कर सकता है या परिष्कार के साथ उसे स्वीकार कर सकता है।
159. धारा 58 की उपधारा (3) के अधीन निबन्धक द्वारा दी गई अनुज्ञा उस विशिष्ट सहकारी वर्ष के लिए होगी जिसके लिए स्वीकृति दी जाये।
160. नियमों में की गई व्यवस्था को छोड़कर निबन्धक द्वारा धारा 58 की उपधारा (3) के अधीन किसी समिति को कोई अनुज्ञा नही दी जायेगी।
161. प्रत्येक सहकारी समिति, धारा 58 की उपधारा (2) के खण्ड (ग) में उल्लिखित निधियों के अतिरिक्त राष्ट्रीय रक्षा निधि सृजित करेगी और यदि समिति उपभोक्ता स्टोर हो या क्रय विक्रय करती हो तो मूल्य अस्थिरता निधि भी सृजित की जायेगी।

162. निबन्धक द्वारा जारी किये गये किन्हीं अनुदेशों के अनुकूल रहते हुये -
(1) कोई सहकारी समिति जिसका मुख्य कार्य माल का उत्पादन, क्रय-विक्रय या बांटना हो अथवा कतिपय सेवाओं की व्यवस्था करना हो, अपने सदस्यों को समिति के साथ उनके बिना कर्जे पाने वाला व्यवहारों पर धारा 58 की उपधारा (2) के अधीन बांटने के लिए उपलब्ध शुद्ध लाभ की आधी धनराशि तक बोनस बांट सकती है।
(2) कोई सहकारी कृषि समिति धारा 58 की उपधारा (2) के अधीन बांटने के लिए उपलब्ध अपने शुद्ध लाभ का 75 प्रतिशत तक बोनस अपने सदस्यों को समिति के लिए उनकी भूमि और श्रम के रूप में किये गये अंशदान के सम्बन्ध में दे सकती है, ऐसे अंशदान का मूल्य उपविधियों में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अवधारित किया जायेगा।
163. कोई भी लाभ जो अधिनियम, नियमों और सहकारी समिति की उपविधियों में निर्दिष्ट रीति से विनियोजित न किया गया हो, रक्षित मे जमा किया जायेगा।
164. किसी असीति दायित्व वाली सहकारी समिति की रक्षित निधि का उपयोग समिति के कारोबार के लिये किया जा सकता है जब तक कि निबन्धक विशेष आदेश द्वारा उसे नियम 173 में उल्लिखित रीति से विनियोजित करने के लिये निर्देश न दे, ऐसी दशा में यह उस प्रकार विनियोजित की जायेगी।
165. किसी समिति दायित्व वाली सहकारी समिति की निधि, नियम 173 में उल्लिखित किसी एक या अधिक रीतियों से विनियोजित की जायेगी।
प्रतिबन्ध यह है कि किसी सहकारी समिति की रक्षित निधि उसकी चालू पूंजी के 20 प्रतिशत से अधिक हो जाये तो, अधिक धनराशि का उपयोग निबन्धक की स्वीकृत से समिति के कारोबार में किया जा सकता है।
प्रतिबन्ध यह भी है कि जब किसी सहकारी समिति को अपनी उपविधियों के अन्तर्गत अपने सदस्यों या किसी अन्य से उधार लेने का निषेध हो और उसका कोई बाहरी दायित्व न हो तो निबन्धक समिति को उसके कारोबार में उसकी रक्षित निधि का 75 प्रतिशत तक उपयोग करने की अनुज्ञा दे सकता है।
166. कोई सहकारी समिति, निबन्धक की अनुज्ञा से अपनी रक्षित निधि का कोई निर्दिष्ट भाग निम्नलिखित एक या अधिक के लिये विनियोजित कर सकती है:-
(1) भूमि और भवन का अर्जन या खरीदना और निम्नलिखित के लिये भवनों का निर्माण -
(क) अपने कार्यालय, कर्मचारी वर्ग और सज्जा,
(ख) अपनी मशीन या संयन्त्र का अधिष्ठापन या परिचालन।
(2) ऐसी मशीन या संयन्त्र खरीदना जो उसे अपने मुख्य कारोबार को चलाने के लिये अपेक्षित हो, और
(3) खण्ड (1) (क) में उल्लिखित प्रयोजनों के लिये और अपनी उपविधियों के उपबन्धों के अनुसार अपने सदस्यों के लाभ के लिये भी, यदि समिति सहकारी आवास समिति हो, भूमि और भवनों का अर्जन या खरीदना और भवनों का निर्माण करना।
167. किसी सहकारी समिति की रक्षित निधि का उपयोग, निबन्धक की स्वीकृति से निम्नलिखित किसी भी प्रयोजन के लिये किया जा सकता है -
(1) अनुपेक्षित हानि को पूरा करने के लिये
(2) समिति के ऋण दाताओं के ऐसे दावों को पूरा करने के लिये जो अन्यथा पूरे नहीं किये जा सकते हों और
(3) विशेष अभाव में अन्य वित्तीय आवश्यकताओं की व्यवस्था करने के लिये।
168. नियम 167 के अधीन रक्षित निधि का उपयोग इस शर्त के अधीन होगा कि निकाली गयकिसी धनराशि की प्रतिपूर्ति अनुवर्ती सहकारी वर्ष या वर्षो में होने वाले लाभ से, जैसा निबन्धक द्वारा निदेश दिया जाये, की जायेगी। किन्तु निबन्धक समिति से विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखकर यह अनुज्ञा दे सकता है कि नियम 167 के खण्ड (2) और (3) के अधीन उल्लिखित प्रयोजनों के लिये निकाली गई और उपयोग की गई रक्षित निधि को पूर्ण रूप से या आंशिक रूप से प्रतिपूर्ति न की जाये जैसा कि निबन्धक निदेश दे।
169. कोई भी सहकारी समिति जिसकी रक्षित निधि नियम 173 के उपबन्धों के अनुसार अलग से विनियोजित या जमा की गई हो, ऐसी निधि में से पहले से प्राप्त की गई निबन्धक की स्वीकृति के बिन न तो कोई धनराशि निकालेगी, न गिरवी रखेगी और न ही किसी अन्य प्रकार से उसका प्रयोग करेगी।
170. किसी सहकारी समिति की रक्षित निधि अविभाज्य होगी और कोई सदस्य उसमें किसी निर्दिष्ट अंश के लिए कोई दावा नहीं कर सकेगा।
प्रतिबन्ध यह है कि किसी समिति के दो या अधिक समितियों में अलग होने की दशा में मूल समिति की रक्षित निधि धारा 16 के उपबन्धों के अधीन नई समितियों के बीच बांटी जायेगी। इस प्रकार बांटी गई धनराशि सम्बन्धित समिति की रक्षित निधि में रखी जायेगी।
171. (1) किसी सहकारी समिति के समापन की दशा में, समिति रक्षित निधि और अन्य निधियों का प्रयोग सबसे पहले, नीचे मद (1) से (6) तक में निर्दिष्ट पूर्वता के अनुसार समिति के दायित्वों का उन्मोचन करने के लिये किया जायेगा -
(1) समिति के कर्मचारी के देय वेतन और मजदूरी या अन्य भुगतान, यदि कोई हो,
(2) कर्मचारियों की प्रतिभूति, निक्षेप यदि कोई हो,
(3) सरकार या उसकी गारन्टी पर धृत उधार, यदि कोई हो,
(4) असदस्यों के निक्षेप, यदि कोई हो,
(5) ऋण, यदि कोई हो, और
(6) सदस्यों के निक्षेप, यदि कोई हो।
(2) उपनियम (1) में उल्लिखित दायित्वों का उन्मोचन करने के बाद, शेष यदि कोई हो का प्रयोग अदत्त अंश पूंजी के पुनर्भुगतान के लिये और तत्पश्चात् ऐसे लाभश के अनुभाग के लिये किया जायेगा जहां उसका भुगतान न किया गया हो।
(3) उपनियम (2) में दी गई किसी बात के होते हुये भी किसी लाभांश का भुगतान किया जायेगा यदि समिति की उपविधियों में लाभांश के भुगतान के लिये कोई व्यवस्था नहीं की गई है।
172. (1) नियम 171 में उल्लिखित भुगतान करने के पश्चात् यदि कोई धनराशि शेष रह जाये तो उसक प्रयोग राष्ट्रीय रक्षा निधि या ऐसे धर्मार्थ प्रयोजनों या लोक उपयोगिता के स्थानीय उद्देश्यों में अंशदान देने के लिये किया जायेगा जिसे प्रबन्ध कमेटी च ले और जिसका निबन्धक अनुमोदन करे। यदि निबन्धक द्वारा निर्दिष्ट समय के भीतर प्रबन्ध कमेटी ऐसे उद्देश्य अथवा प्रयोजन को न चुन सके जो निबन्धक द्वारा अनुमोदित हो तो निबन्धक अतिरेक निधियों का प्रयोग या तो राष्ट्रीय रक्षा निधि में अथवा नियम 138 में अभिदिष्ट सहकारी शिक्षा निधि में अंशदान देने के लिये कर सकता है।
(2) किसी वित्तपोषण बैंक के समाप्त किये जाने की दशा में, अतिरेक निधियो किसी ऐसे अन्य वितपोषण बैंक या बैंकों की रक्षित निधियों में अभ्यर्पित की जायेगी जिससे समाप्त किये जाने वाले वित्तपोषण बैंक के कार्य क्षेत्र में कार्यरत समितिय सम्बद्ध हों। किसी वित्तपोषण बैंक के न होने की दशा में धनराशि तब तक के लिये शीर्ष सहकारी बैंक में जमा कर दी जायेगी जब तक उस क्षेत्र में नया वित्तपोषण बैंक न बन जाये, और उस दशा में धनराशि नये वित्तपोषण बैंक की रक्षित निधि के नाम में जमा कर दी जायेगी।