अध्याय 14
उधार लेने पर निर्बन्धन


178. किसी सहकारी समिति का अधिकतम दायित्व उसकी वार्षिक सामान्य बैठक में निश्चित किया जायेगा, किन्तु वह उसके स्वामित्वभुक्त पूंजी के दस गुने से अधिक न होगा। वह या तो-(1) उस केन्द्रीय सहकारी समिति के जिससे सहकारी समिति सम्बद्ध हो और ऋणी हो, अनुमोदन के अधीन होगा, या (2) यदि सहकारी समिति किसी केन्द्रीय सहकारी समिति से सम्बद्ध न हो अथवा यदि सम्बद्ध हो किन्तु केन्द्रीय समिति की ऋणी न हो तो न हो तो निबन्धक के अनुमोदन के अधीन होगा।
प्रतिबन्ध यह है कि यदि कोई सहकारी समिति एक से अधिक केन्द्रीय समितियों से सम्बद्ध हो और उसकी ऋणी हो, तो ऐसे केन्द्रीय समिति का अनुमोदन आवश्यक होगा जिसकी समिति अत्यधिक ऋणी होः
प्रतिबन्ध यह भी है कि किसी सहकारी समिति का अधिकतम दायित्व विशेष परिस्थितियों में निबन्धक की विशेष स्वीकृति से उपर्युक्त निश्चित सीमा से अधिक हो सकता है।
179. निबन्धक समय-समय पर किसी सहकारी समिति या सहकारी समितियों के किसी वर्ष के अधिकतम दायित्व को गणना करने की रीति निर्दिष्ट कर सकता हैं
180. निबन्धक किसी समय किसी सहकारी समिति के अधिकतम दायित्व को उन कारणों से जिसकी सूचना वह समिति को देगा, कम कर सकता है और कम से कम चार माह की अवधि की अवधि निर्दिष्ट कर सकता है जिसके भीतर समिति, निबन्धक के आदेश का अनुपालन करेगी।
181. कोई सहकारी समिति, सदस्यों या असदस्यों से नियम 178 और 179 के अनुसार निश्चित अधिकतम दायित्व या नियम 180 के अधीन कम किये गये दायित्व से अधिक धन निक्षेप नहीं करेगी और न ऋण लेगी।
182. निबन्धक की सामान्य या विशेष अनुज्ञा के बिना कोई ऐसी सहकारी समिति जो किसी केन्द्रीय बैंक का सामान्य सदस्य हो, उक्त बैंक से भिन्न किसी अन्य स्रोत से ऋण (निक्षेप स्वीकार करने को छोड़कर) तब तक नहीं लेगी, जब तक कि बैंक ने उक्त समिति का वित पोषित करने में अपनी असमर्थता व्यक्त न कर दी हो।
183. किसी केन्द्रीय बैंक से भिन्न कोई सहकारी समिति, निबन्धक की सामान्य या विशेष स्वीकृत के बिना चालू या बचत लेखों में धनराशि जमा नहीं करेगा।
स्पष्टीकरण- इस नियम के प्रयोजन के लिए शब्द केन्द्रीय बैंक में राज्य भूमि विकास बैंक या कोई भूमि विकास बैंक अथवा धारा 129 के अधीन भूमि विकास बैंक के रूप में कार्य करने के लिये अनुज्ञेय कोई समिति सम्मिलित नहीं होगी।
184. बैंकिग लाज अप्लीकेशन टु कोआपेरटिव सोसाइटीज ऐक्ट 1965 (ऐक्ट संख्या-23, 1965) द्वारा यथासंशोधित बैंकिग रेगुलेशन ऐक्ट 1919 से नियन्त्रित कोई सहकारी समिति उक्त ऐक्ट की अपेक्षा न्यूनतम शीध्र परिवर्तनशील परिसम्पत्ति रखेगी:
185. नियम 1: 4 में उल्लिखित किसी सहकारी समिति के भिन्न सभी सहकारी समितियां जो ऋण और निक्षेप स्वीकार करें और नकद दें, निम्नलिखित मानक्रम के अनुसार न्यूनतम शीध्र परिवर्तनशील परिसम्पत्तियां रखेंगी:
(1) चालू निक्षेप का (जिसके अन्तर्गत ऐसी याचना और सावधि निक्षेप भी है जो परिपक्व हो किन्तु निकाला न गया हो) 40 प्रतिशत
(2) बचत बैंक निक्षेप का 20 प्रतिशत
(3) ऐसी सावधि का 25 प्रतिशत जो अगले तीन माह में परिपक्व होने वाला हो और ऐसी सावधि निक्षेप का 12 1/2 प्रतिशत जो उनके आगे तीन माह में परिपक्व होने वाला हो (जिसके अन्तर्गत समितियों की रक्षित निधि निक्षेप से है) और
(4) नकद साख के निकाले गये भाग का और संघटकों को स्वीकृति अधिविकर्षो का 40 प्रतिशत
प्रतिबन्ध यह है कि निबन्धक अभिलिखित किये जाने वाले कारणों के आधार पर ऊपर निय किये गये शीध्र परिवर्तनशील परिसम्पत्ति के प्रतिशत में परिवर्तन कर सकता है।
186. नियम 185 के प्रयोजनों के लिये शीध्र परिवर्तनशील (लिक्विड कवर) का तात्पर्य ऐसी परिसम्पत्तियों से है जिन्हें नकदी में शीध्र बदला जा सके और उसके अन्तर्गत निम्नलिखित भी है:-
(1) हस्तगत रोकड़ और शेष जो अनुमोदित बैंक से चालू तथा बचत बैंक लेखे में हो,
(2) सरकारी प्रतिभूतियों के (जिनके अन्तर्गत डाक नकद प्रमाण पत्र और राष्ट्रीय बचत प्रमाण पत्र भी है) अभारग्रस्त भाग के बाजार मूल्य का 90 प्रतिशत
(3) औद्योगिक वित निगम के बन्धपत्रों और अंशों के राज्य सहकारी भूमि विकास बैंक के ऋणपत्रों के न्यासी प्रतिभूतियों तथा अनुमोदित बैंकों के पास सावधि निक्षेप अभारग्रस्त भाग के बाजार मूल्य का 80 प्रतिशत,
(4) सहकारी प्रतिभूतियों पर प्राप्त नकद साख तथा अधिविकर्ष सीमा में से न निकाला गया भाग,
(5) स्टेट बैंक आफ इण्डिया या उत्तर प्रदेश काआपरेटिब बैंक लिमिटेड या किसी केन्द्रीय बैंक से आश्वासित नकद साख के न निकाले गये भाग का 50 प्रतिशत