अध्याय 17
लेखा-परीक्षा


205. समिति धारा 64 के अधीन निबन्धक या लेखा परीक्षा करने वाले किसी अन्य व्यक्ति को, जांच और सत्यापन के लिये जैसे और जब अपेक्षित हो वार्षिक ओर अन्य विवरणियां जिसके अन्तर्गत किसी सहकारी समिति की अशोध्य तथा संदिग्ध परिसम्पत्तियां भी हैं, और सभी बहयां, संगत लेखा, लेख्यों, पत्रादि प्रतिभूतियां, नकदी और अन्य सम्पत्ति उपलब्ध करायेगी।
206. नियम 367 में अभिदिष्ट लेखों और विवरणियों के लेखा परीक्षित विवरण-पत्र के साथ लेखा-परीक्षा प्रतिवेदन की प्रतियां लेखा-परीक्षक (1) प्रत्येक लेखा परीक्षित सहकारी समिति (2) उसके प्रकृष्ट अधिकारी या अधिकारियों (3) निबन्धक और यदि निबन्धक द्वारा इस निदेश प्रकार दिया जाये, तो उस केन्द्रीय समिति को जिससे उक्त लेखा-परीक्षित समिति सम्बद्ध हो, को भी प्रस्तुत करेगा। लेखा परीक्षा प्रतिवेदन में अन्य बातों के साथ-साथ निम्नलिखित का उल्लेख होगा -
(क) प्रत्येक व्यवहार जो लेखा-पीरक्षक की राय में, अधिनियम, नियमों या समिति की उपविधियों के प्रतिकूल हो,
(ख) प्रत्येक धनराशि जिसे समिति के लेखे में दर्ज किया जाना चाहिये किन्तु उसे दर्ज नहीं किया गया हो,
(ग) किसी धनराशि की कमी या हानि जो लेखा-परीक्षक की राय में समिति के किसी अधिकारी की किसी उपेक्षा या दुराचरण के कारण हो,
(घ) समिति की कोई धनराशि या सम्पत्ति जिसे, लेखा-परीक्षक की राय में किसी व्यक्ति द्वारा दुर्विनियोजित किया गया हो अथवा कपट पूर्वक रोक रखा गया है।
(ड) समिति की कोई भी परिसम्पत्ति जो लेखा-परीक्षक की राय में अशोध्य या संदिग्ध हो,
(च) यह तथ्य कि क्या अधिनियम नियमों या समिति की उपविधियों द्वारा अपेक्षित सभी लेखा वहियां समिति द्वारा उचित प्रकार से रखी गई है या नहीं
(छ) यह तथ्य कि क्या लेखा-परीक्षक रोकड-पत्र और हानि-लाभ का लेखा समिति द्वारा रखी गई लेखा वहियों तथा विवरणियों से मिलते है या नहीं,
(ज) व्यय में या समिति के देयों की वसूली में कोई सारवान अनौचित्य या अनियमितता,

(झ) समिति तथा उसके अधिकारियों के बीच व्यवहारों के परीक्षण का परिणाम,
() कोई अन्य विशेष जो लेखा-परीक्षक की राय में समिति की आर्थिक समृद्धि के लिये आवश्यक हो।
207. लेखा-परीक्षक-
(1) किसी प्रारम्भिक कृषि सहकारी ऋण समिति की दशा में,
(2) किसी ऐसी अन्य प्रारम्भिक सहकारी समिति की दशा में जिसकी चालू पूंजी 50,000 रूपये से अधिक न हो, और
(3) निबन्धक द्वारा तदर्थ निर्दिष्ट की जाने वाली अन्य सहकारी समितियों की दशा में (चाहे वे प्रारम्भिक हों या नहीं) इस प्रयोजन के लिये लेखा-परीक्षक के अधियाचन पर बुलाई गई सम्बद्ध समिति की प्रबन्ध कमेटी की बैठक के समक्ष ऐसी आपत्तियां रखेगा जिनका प्रबन्धक कमेटी द्वारा तत्काल समाधान किया जा सके या जो दूर की जा सके और ऐसी मदों के सामने प्रबन्ध कमेटी के संकल्प के अधीन ऐसी आपत्ति का समाधान किये जाने या दूर किये जाने के सम्बन्ध में दर्ज करेगा। लेखा-परीक्षा टिप्पणी की शेष आपत्तियां लेखा-परीक्षा प्रतिवेदन में दर्ज रहेगी और समिति की निर्दिष्ट अवधि के भीतर उनका यथोचित रूप से समाधान करने के लिये संसूचित किया जायेगा।
208. (1) लेखा-परीक्षक नियम 207 में अभिदिष्ट प्रारम्भिक सहकारी समितियों और ऐसी अन्य समितियों की दशा में जिन्हें निबन्धक तदर्थ निर्दिष्ट करें, लेखों का और व्यवहारों का सदस्यों से, विशेष रूप से उन सदस्यों से जो अशिक्षित हों, मौखिक रूप से सत्यापित करेगा और अपना सत्यापन सदस्य की पास-बुक और खाते में दर्ज करेगा और अपने लेखा-परीक्षा प्रतिवेदन में ऐसे सत्यापन का उल्लेख करेगा।
(2) लेखा-परीक्षक जिन सदस्यों से मौखिक रूप से सत्यापन करने की अपेक्षा करें, उन्हें उसके सम्मुख प्रस्तुत करने का दायित्व साधारणतया समिति के सचिव का होगा। इस सम्बन्ध में कई कठिनाई होने की दशा में लेखा-परीक्षक सभापति से और सभापति के उपलब्ध न होने की दशा में उप-सभापति से सदस्यों को मौखिक रूप से सत्यापन करने के निमित्त सम्पर्क कर सकेगा।
209. नियम 207 में उल्लिखित सहकारी समितियों से भिन्न सहकारी समितियों की दशा में, लेखा-परीक्षक लेखा परीक्षा के दौरान समय-समय पर समिति के सचिव को सचिव को अन्तरिम आपत्तियां जो ऐसी आपत्ति में इंगित त्रुटियों या अनियमितताओं का अनुपालन करने या उनके सम्बन्ध में स्पष्टीकरण देने के लिये होगी, जारी करेगा। सचिव अनुपालन-प्रतिवेदन के साथ अन्तरिम के आपत्ति पत्र को लेखा-परीक्षक को उसके द्वारा निर्दिष्ट समय के भीतर वापस कर देगा। लेखा-परीक्षक अनुपालन प्रतिवेदन का पुनर्विलोकन करेगा और ऐसी आपत्तियों को निकाल देगा जिसका उनकी राय में संतोषजनक ढंग से अनुपालन कर दिया गया है और शेष आपत्तियों को, यथास्थिति, अन्तिम या नियकालीन लेखा-परीक्षा प्रतिवेदन में अभिलिखित करेगा।
210. यदि लेखा-परीक्षक यह समझे की समिति द्वारा तैयार की गयी वार्षिक या अन्य विवरणियों में कोई संशोधन किया जाना चाहिये तो वह समिति को उसकी सूचना इस आशय से देगा कि समिति की वहियों में ऐसी प्रविष्टियां करके जो आवश्यक हों उन्हें चालू सहकारी वर्ष कलेखे में समाविष्ट किया जा सके।
211. यदि ऐसे संशोधन जिनका सुझाव नियम 210 के अधीन दिया गया है, समिति द्वारा लेखा-परीक्षा के दौरान समाविष्ट कर लिये जायें तो लेखा-परीक्षक लेखों तथा विवरणियों का ठीक होना प्रमाणित करेगा और रोकड़ पत्र के साथ उक्त् आशय का एक प्रमाण पत्र इस प्रयोजन के लिये निबन्धक द्वारा निर्दिष्ट प्रपत्र में संलग्न करेगा।
212. यदि सहकारी समिति, लेखा-परीक्षा पूरी होने के पूर्व ऐसे संशोधन को जिनका सुझाव नियम 210 के अधीन दिया गया है समाविष्ट न करें, तो लेखा-परीक्षक, लेखा-परीक्षा प्रमाण पत्र में नियम 210 के अधीन अपने द्वारा सुझाये गये संशोधन का उल्लेख करेगा और उसके लिये यदि आवश्यक हो, एक अलग से कागज लगाया जा सकता है।
213. यदि किसी सहकारी समिति, लेखा परीक्षा के दौरान ऐसी गम्भीर अनियमितताएं पायी जायें जिनके कारण निधियों या स्टाक का गबन या दुर्विनियोग हुआ हो या होने का सन्देह हो तो लेखा-परीक्षक, लेखा परीक्षा बन्द किये बिना, गुप्त रूप से अपने अधिकारी को, यदि कोई हो, निबन्धक को और समिति के सभापति तथा सचिव को भी सूचित करेगा, यदि सभापति या सचिव को ऐसी सूचना देने से आगे जांच करने पर या समिति के हितों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की सम्भावना न हो।
214. (1) कोई ऐसी सहकारी समिति, जिसकी लेखा परीक्षक द्वारा लेखा परीक्षा की गयी हो, उसे उस बैठक की जिसमें उसके लेखा परीक्षा प्रतिवेदन पर विचार किया जाना हो, कार्य-सूची सम्बन्धी नोटिस की एक प्रति भेजेगी। चाहे ऐसी बैठक प्रबन्ध कमेटी की हो या सामान्य निकाय की।
(2) लेखा-परीक्षक स्वतः ऐसी बैठक में उपस्थित हो सकता है और जब निबन्धक द्वारा अपेक्षित हो तो उपस्थित होगा और उसे इस बात का हक होगा कि ऐसी बैठक में समिति की लेखा-परीक्षा प्रतिवेदन में उसके द्वारा की गयी किसी अभियुक्ति तथा आपत्ति के सम्बन्ध में उसकी बात सुनी जाये।
215. लेखा-परीक्षक, लेखा-परीक्षा पूरी हो जाने के पश्चात् यथाशक्य शीध्र, निबन्धक को गोपनीय आवरण में, लेखा परीक्षा प्रतिवेदन समाविष्ट गम्भीर अनियमितताओं, दुर्विनियोजनों और गबन के सम्बन्ध में एक विशेष प्रतिवेदन अलग से प्रस्तुत करेगा।
216. जब तक कि निबन्धक द्वारा अन्यथा निदश न किया जाये, ऐसी सहकारी समिति जिसके सम्बन्ध में धारा 72 के अधीन समापित करने के आदेश अन्तिम हो चुका हो वार्षिक लेखा-परीक्षा के अतिरिक्त एक बार समापित किये जाने का आदेश जारी करने के पश्चात् और दुबारा समिति का निबन्धन रदद् करने के पूर्व लेखा-परीक्षा की जायेगी:
217. किसी अन्य नियम या प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना --
(क) किसी सहकारी समिति को प्रबन्ध कमेटी अपने लेखों की नियतकालिक या अन्य आधार पर ऐसे व्यक्तियों द्वारा और ऐसी शर्तो पर भुगतान सहित आंतरिक लेखा परीक्षा किये जाने का प्रबन्ध कर सकती है जो निबन्धक के सामान्य या विशेष आदेश द्वारा निर्धारित अथवा अनुमोदित की जाये।
(ख) जब राज्य सरकार द्वारा या निबन्धक द्वारा ऐसा अपेक्षित हो तो किसी सहकारी समिति की विशेष लेखा परीक्षा या पुनः लेखा परीक्षा की जायेगी
(ग) यदि और जब निबन्धक द्वारा अपेक्षित हो तो किसी सहकारी समिति या सहकारी समितियों के वर्ग की चालू लेखा परीक्षा की जायेगी।
218. निबन्धक किस सहकारी समिति की अभिलेखा परीक्षा की भी व्यवस्था कर सकता है जिससे कि किसी लेखा परीक्षा द्वारा की गयी लेख परीक्षा की कोटि की जांच की जा सके
219. निबन्धक समय-समय पर ऐसे अनुदेश जारी करेगा जिसमें सहकारी समितियों के लेखा परीक्षा वर्गीकरण के लिए स्तर निर्धारित करेगा। लेखा-परीक्षक प्रत्येक सहकारी वर्ष में ऐसे स्तर के अनुसार सहकारी समिति का वर्गीकरण करेगा और अपने द्वारा किये गये वर्गीकरण के लिये विस्तृत रूप से कारण देगा।
220. प्रत्येक सहकारी समिति, ऐसी दर पर और ऐसे समयों पर लेखा परीक्षा शुल्क  की देनदार होगी जो राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर निश्चित किया जायेगा।
221. निबन्धक किसी सहकारी समिति के अनुरोध पर और उन कारणों से जो अधिलिखित किये जायेंगे समिति द्वारा या उसकी ओर देय लेखा परीक्षा शुल्क में पूर्णतः या आंशिक रूप से छूट दे सकता है।
222. किसी सहकारी समिति की लेखा परीक्षा करने वाले व्यक्ति, लेखा परीक्षा पूरी हो जाने पर समिति से भारतीय लेखा परीक्षा शुल्क निर्धारित करेंगा। ऐसे निर्धारण से सम्बद्ध  टिप्पणी लेखा परीक्षा का भाग होगी।
प्रतिबन्ध यह है कि किसी केन्द्रीय बैंक से सम्बद्ध प्राथमिक ऋण समितियों की दशा में लेखा-परीक्षक ऐसी समितियों के सम्बन्ध में प्रत्येक माह के अन्त में एक समेकित निर्धारण आदेश भी सम्बन्धित बैंक को भेजेगा और बैंक सम्बन्धित समितियों से कोई सलाह अथवा कोई आपत्ति नहीं की सूचना पाने के बाद उनकी ओर सलेख परीक्षा शुल्क का भुगतान कर सकता है और जब तक नियमों में अन्यथा व्यवस्था न हो केन्द्रीय बैंक द्वारा इस प्रकार का भुगतान किय गया लेखा परीक्षा शुल्क उसके द्वारा सम्बन्धित समितियों से वसूल किया जा सकेगा।
प्रतिबन्ध यह भी है कि यदि किसी सहकारी समिति का यह मत हो कि उसके विरूद्ध लेखा परीक्षा शुल्क गलत ढंग से निर्धारित किया गया है तो वह उक्त निर्धारण  टिप्पणी की प्राप्ति स तीस दिन के भीतर निबन्धक को प्रत्यावेदन दे सकेगी। ऐसे प्रत्यावेदन का निस्तारण होने तक निबन्धक समिति से उसके प्रत्यावेदन के परिणाम पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना लेख परीक्षा शुल्क जमा करने की अपेक्षा कर सकता है जिस परसमिति यह आपत्ति करते हुए कि उसमें प्रत्यावेदन पर निर्णय दिये जाने के फलस्वरूप जब ऐसी धनराशि का निर्धारण किया जायेगा, उसके वापस पाने या समायोजन किये जाने के सम्बन्ध में उसक दावा बराबर बना रहेगा, उक्त लेखा परीक्षा शुल्क जमा कर देगी।
223. (क) निर्धारण टिप्पणी की प्राप्ति से 60 दिन के भीतर कोई सहकारी समिति, नियम 222 के उपबन्धों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना स्थानीय कोषागार में जिले के सहकारी केन्द्रीय बैंक में या जैसा भी निबन्धक निदेश दे, देय लेखा परीक्षा शुल्क जमा कर देगी।
(ख) यदि लेखा परीक्षा शुल्क केन्द्रीय सहकारी बैंक में जमा किया जाये या केन्द्रीय सरकारी बैंक द्वारा नियम 222 के अधीन सम्बद्ध सहकारी ऋण समितियों की ओर से अदा किया जाये तो लेखा परीक्षा शुल्क की धनराशि केन्द्रीय बैंक में सहकारी समितियां, लेखा परीक्षा शुल्क सम्बन्धी लेखा के नाम से एक अलग खाते में जमा की जायेगी और इस खाते में जमा धनराशि निबन्धक के निदेशों के अधीन स्थानीय कोषागार में जमा की जायेगी। ऐसा बैंक सहकारी समितियां लेखा परीक्षा शुल्क सम्बन्धी नाम से एक पृथक खाता रखेगा जिसका चालान निबन्धक द्वारा किया जायेगा।
224. सहकारी समिति लेखा परीक्षा प्रतिवेदन में इंगित दावों को दूर करेगी और लेखा परीक्षा प्रतिवेदन की प्राप्ति से 60 दिन के भीतर एक अनुपालन प्रतिवेदन निबन्धक को भेजेगी। विशेष परिस्थितियों में समिति के अनुरोध करने पर 60 दिन की अवधि निबन्धक द्वारा बढ़ाई जा सकती है। यदि निबन्धक का समिति के अनुपालन के सम्बन्ध में समाधान न हो तो वह समिति को अपने निर्देशों के अनुसार और आगे अनुपालन ऐसे समय के भीतर जैसा वह निर्दिष्ट करें, भेजने का निदेश देगी, समिति तद्नुसार आगे अनुपालन करेगी और निबन्धक द्वारा निर्दिष्ट समय के भीतर उसे अनुपालन प्रतिवेदन भेजेगी।