अध्याय 2
निबन्धन



1[3. किसी समिति के निबन्धन के लिए प्रार्थना पत्र उक्त प्रयोजन के लिए निबन्धक द्वारा समय समय पर निर्दिष्ट प्रपत्र में दिया जायेगा। ऐसा प्रपत्र, प्रपत्र क में प्रार्थना पत्र देकर और पचास रूपये का शुल्क देने पर जिला सहायक निबन्धक से प्राप्त किया जा सकेगा।
2[4. (1) नियम 3 मे अभिदिष्ट निबन्धन के लिए प्रार्थना पत्र के साथ ऐसी प्रतिमान उपविधियों की चार प्रतियॉ जो प्रस्तावित समिति के लिए उपयुक्त हो, जिला सहायक निबन्धक से बीस रूपये प्रति उपविधि की दर से भुगतान करके प्राप्त की जा सकेगी। यदि ऐसी प्रतिमान उपविधियॉ उपलब्ध न हों तो प्राथी अपनी प्रस्तावित उपविधियॉ बना सकता है।
(2) यदि प्रतिमान उपविधियॉ ग्रहण की जानी हो तो उन्हे उचित रीति से भर कर उनकी तीन प्रतियॉ प्रार्थना पत्र के साथ प्रस्तुत की जा सकती है। यदि प्रतिमान उपविधियों में संशोधन करना अपेक्षित हो तो ऐसे संशोधन उनमें स्पष्ट रूप से उल्लिखित किये जाने चाहिये ओर तब संशोधित उपविधियों की तीन प्रतियॉ  प्रार्थना पत्र के साथ प्रस्तुत की जायेगी। यदि कोई भी प्रतिमान उपविधियॉ उपलब्ध न हों और प्रार्थी उपनियम (1) में उल्लिखित अपनी प्रस्तावित उपविधियॉ बनाये तो उस दिशा में इस प्रकार प्रस्तावित उपविधियों की बनाई गई प्रतियों की मुद्रित या स्वच्छ रूप से टंकित अथवा साक्लोस्टाइल्ड तीन प्रतियॉ  की जायेगी और वे प्रार्थना पत्र के साथ प्रस्तुत की जायेगी।
5. निबन्धन के लिए प्रत्येक प्रार्थना पत्र में धारा 6 की उपधारा (2) में उल्लिखित अपेक्षाओं की पूर्ति की जायेगी। प्रार्थना पत्र का प्रथम हस्ताक्षरी वह व्यक्ति होगा जिसमें प्रार्थना पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले व्यक्तियों के अनुमदन से धारा 31 की उपधारा (4) के अनुसरण में अन्तरिम अवधि के लिए समिति के सदस्य सचिव के रूप में कार्य करने का वचन दिया हो और उनमें से एक हस्ताक्षरी मुख्य प्रवर्तक के रूप में भी हस्ताक्षर करेगा जिसको निबन्धक, निबन्धक प्रस्ताव के सम्बन्ध में सूचना दे सकेगे।
6. निबन्धक के लिए सभी प्रकार से पूर्ण प्रार्थना  पत्र निबन्धक का या तो प्राप्त अभिस्वीकृत रजिस्ट्री डाक द्वारा भेजा जायेगा अथवा व्यक्तिगत रूप से दिया जायेगा ओर पश्चात्वर्ती दशा में, प्रपत्र ख में निबन्धक से अभिस्वीकृति ली जायेगी।
7. निबन्धक, निबन्धक का प्रार्थना पत्र प्राप्त होने पर, प्रार्थना के ब्यौरे को प्रपत्र ग में रजिस्टर में दर्ज करेगा या दर्ज करायेगा और प्रार्थना पत्र पर क्रम संख्या डाली जायेग
8. यदि निबन्धक का निबन्धन के प्रस्ताव की परिनिरीक्षा करने पर, और यदि आवश्यक हो तो जच करने के पश्चात यह समाधान हो जाये कि-
(क) निबन्धन का प्रस्ताव (6) की उपधारा (2) और धारा 7 की उपधारा (1) की अपेक्षाओं की पूर्ति करता है;
(ख) व्यक्तियों के सम्बन्ध में समिति की साधारण सदस्यता जिन्हें समिति के उद्देश्यों का ध्यान ह उन व्यक्तियों तक संसीमित है जो उनकी राय में, या तोः
(1) समिति द्वारा प्रस्तावित सेवाओं या उधार के उपयोगकर्ता हो,
                                 या
(2) समिति द्वारा उत्पादित या व्यवस्थित   माल के उपभोक्ता हो,

                                  या

(3) समिति द्वारा उपयुक्त या बेचे जाने वाले माल के उत्पादक हों,

                                  या

(4) समिति द्वारा उपयुक्त या बेचे जाने वाले माल के नियमित सम्भरणकर्त हो,
                                  या
(5) समिति में कार्य करने वाले हों,
                                  या

(6) समिति के कारोबार के प्रकार पर निर्भर करते हुये ऐसे व्यक्तियों की एक से अधिक श्रेणी का हो।

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1.अधिसूचना संख्या 3849/49-1-98-7(11)-97, लखनऊ, दिनांक 31 अक्टूबर,1998 द्वारा प्रतिस्थापित।
2. अधिसूचना संख्या 3849/49-1-98-7(11)-97,लखनऊ दिनांक 31 अक्टूबर,1998 द्वारा प्रतिस्थापित।


(ग) प्रस्तावित समिति से राज्य में सहकारिता आन्दोलन की सामान्य कार्यप्रणाली और उसके स्वरूप पर कोई प्रतिकूल प्रभाव पड़ने में सम्भावना नही है,
(घ) प्रस्तावित समिति के नाम के साथ किसी व्यक्ति विशेष सम्प्रदाय, जाति या पन्थ का नाम नही हैः
प्रतिबन्ध यह है कि किसी संस्था, अधिष्ठान या व्यापारिक संस्था में कोई समिति बनाई जाये तो वह अपने नाम के साथ, यथास्थिति ऐसी संस्था, अधिष्ठान या व्यापारिक संस्था का नाम सम्मिलित कर सकती है,
(ड) प्रस्तावित समिति उन अपेक्षाओं तथा शर्तो की पूर्ति करती है जैसा कि परिशिष्ट 1 में सामान्य रूप से समितियों के लिए और उस विशेष वर्ग की प्रस्तावित समिति हो, निर्धारित है।
9. निबन्धक, किसी समिति को निबद्ध करने के पूर्व, निबन्धन के लिए प्रार्थना पत्र के साथ प्रस्तुत प्रस्तावित उपविधियों में ऐसे छोटे छोटे परिवर्तन कर सकता है जो उसकी राय में वांछनीय होः

प्रतिबन्ध यह है कि ऐसे परिवर्तन के लिए मुख्य प्रवर्तक या किसी अन्य प्रार्थी की, जो प्रार्थियों द्वारा प्राधिकृत हो, इस प्रयोजन के लिए लिखित सहमति प्राप्त कर ली जाये।
10.यदि कोई सहकारी समिति धारा 7 के अधीन निबद्ध की जाये, तो निबन्धक, प्रपत्र घ में निबन्धन रजिस्टर में, समिति का पता जैसा कि प्रार्थना पत्र के प्रपत्र में दिया गया हो दर्ज करेगा या करायेगा।
11.नियम 10 के अधीन व्यवस्थित कार्यवाही करने के पश्चात निबन्धक समिति को निम्नलिखित भेजेगा-
1-प्रपत्र ड में निबन्धन की सचना,
2-प्रपत्र च में निबन्धन का प्रमाण पत्र,
3- निबद्ध उपविधियों की प्रमाणित प्रति।
 

12. यदि किसी सहकारी समिति को धारा 7 की उपधारा (1) के प्रतिबन्धात्मक खण्ड के अधीन निबद्ध समझा जाये तो निबन्धक नियम 10 और 11 में

 व्यवस्थित कार्यवाही करेगा।