अध्याय 20
सहकारी समितियों का समापन और विघटन


270. (क) निबन्धक किसी सहकारी समिति को समापित करने का आदेश देने के पूर्व, सिवाय जब समिति के कम से कम तीन चथाई सदस्यों द्वारा उसे समापित किये जाने का प्रार्थना पत्र दिया जाये, समिति के सभापति या सचिव को रजिस्ट्री द्वारा भेजकर या अभिस्वीकृति के अन्तर्गत व्यक्तिगत रूप से देकर एक नोटिस जारी करेगा जिसमें निर्दिष्ट अवधि के भीतर यह कारण बताने के लिये कहेगा कि क्यों न समिति धारा 72 के अधीन समापित कर दी जाये।
(ख) समिति उपनियम (1) में उल्लिखित नोटिस पर विचार करेगी और नोटिस में निर्दिष्ट समय के भीतर उसका जवाब निबन्धक के पास भेजेगी।
(ग) यदि समिति नोटिस में निर्दिष्ट समय के भीतर जवाब न भेजे या भेजा गया जवाब सन्तोषजनक न हो तो निबन्धक समिति को समापित करने का आदेश दे सकता हैं
271. धारा 72 के अधीन कोई आदेश जिसमें किसी सहकारी समिति समापित करने के निदेश हो और धारा 73 की उपधारा (1) के अधीन किसी परिसमापक की नियुक्ति का आदेश और किसी परिसमापक को हटाने या इसमें परिवर्तन करने का आदेश गजट में अथवा निम्नलिखित किसी एक या अधिक प्रकार से प्रकाशित किया जायेगा, जैसा कि मामले की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर निबन्धक द्वारा निश्चित किया जाये।
(1) ऐसे समाचार पत्र में जो समिति के कार्य क्षेत्र में प्रचालित हो, प्रकाशित करके,
(2) समिति के निबद्ध पते पर आदेश की एक प्रति चिपका कर,
(3) समिति के कार्य क्षेत्र मे डुग्गी पीटकर घोषणा करके।
272. किसी परिसमापक को देय पारिश्रमिक धनराशि के समापन के व्यय में सम्मिलित की जायेगी। समापक का व्यय समिति की परिसम्पत्तियों में से, अन्य सभी दावों की पूर्वता में देय होगा।
273. (क) किसी परिसमापक के प्रभाव की सभी निधियां डाक घर बचत बैंक या किसी केन्द्रीय सहकारी बैंक या किसी ऐसे बैंक में जो निबन्धक द्वारा अनुमोदित किय जाये जमा की जायेगी। ऐसे सभी लेखे परिसमापक द्वारा चलाये जायेंगे।
(ख) सहकारी समिति के परिसमापन के दौरान में प्राप्त सभी धनराशियां उपनियम (1) में उल्लिखित लेखों में जमा की जायेगी।
(ग) उपर्युक्त लेखों में सभी भुगतान परिसमापक द्वारा किये जायेंगे।
(घ) सभी प्राप्ति तथा भुगतान परिसमापक द्वारा इस प्रयोजन के लिये रखे गये अभिलेखों में लेखांकित किये जायेंगे।
274. परिसमापक, ज्योंही किसी सहकारी समिति के समापन का आदेश प्रभावी हो ऐसे प्रकार से जो वह उचित समझे, एक नोटिस प्रकाशित करेंगे जिसमें सहकारी समिति के प्रति जो समापित की जा रही हो, सभी दावों को नोटिस के प्रकाशित किये जाने के दिनंक से 30 दिन के भीतर प्रस्तत करने की अपेक्षा की जायेगी। सहकारी समिति की बहियों में अभिलिखित सभी दायित्व इस नियम के अधीन इसे यथाविधि प्रस्तुत किये गये समझे जायेंगे।
275. तत्पश्चात् परिसमापक सहकारी समिति के दायित्व जैसे कि वे समापन आदेश लिए जाने के दिनांक को रहे हो, अवधारित करने की कार्यवाही करेगा। तत्पश्चात वह धारा 74 की उपधारा (2) के खण्ड (घ) में की गई व्यवस्था के अनुसार कार्यवाही करेगा।
276. (1) परिसमापक समिति की परिसम्पत्तियों तथा दायित्वों का जैसा कि वे धारा 72 के अधीन आदेश दिये जाने के दिनांक को रहे हों, अवधारित करने के पश्चात् धारा 74 की उपधारा (2) के खण्ड (ख) और (च) के अधीन अंशदान आदेश बनाने के लिये आगे कार्यवाही करेगा।
(2) यदि आवश्यकता पडे़ तो वह धारा 74 की उपधारा (2) के खण्ड (ख) या खण्ड (च) के अधीन इस सम्बन्ध में अनुवर्ती आदेश भी दे सकता है और ऐसे आदेश मूल आदेश की तरह ही प्रवर्तनीय होंगें।
277. परिसमापक, प्रत्येक सदस्य और भूतपूर्व सदस्य की सम्पत्ति और मृत सदस्यों के सम्पदाओं की सूची के साथ अपना अंशदान आदेश या अनुवर्ती आदेश, अनुमोदन के लिये निबन्धक को भेजेगा और निबन्धक यदि वह उचित समझे या तो आदेश में परिष्कार कर सकता है अथवा उसे और जांच के लिये अथवा अन्य कार्यवाही के लिये परिसमापक को वापस कर सकता है।
278. निबन्घक सामान्य अनुदेश जारी कर सकता है जिसमें वह ऐसे सिद्धांत और रीति निर्धारित करेंगा जिसके अनुसार अंशदान अवधारित किये जायेंगे और परिसमापक इन अनुदेशों के अनुसार कार्य करेंगा।
279. परिसमापक ऐसी सभी धनराशियों और अन्य परिसम्पत्तियों की जिनके लिये सहकारी समिति हकदार हो और नियम 276 के अधीन उसके द्वारा बनाये गये तथा निबन्धक द्वारा अनुमोदित अंशदान, आदेशों और अनुवर्ती आदेशों की धनराशि को भी वसूली करेगा। परिसमापक लिखित आदेश द्वारा किसी व्यक्ति को उसकी ओर से वसूली करने तथा वैघ रसीदें देने का अधिकार दे सकता है।
280. यदि आवश्यक हो तो निबन्घक के अनुमोदन से, परिसमापक अपने आदेश की एक प्रति स्थानीय क्षेत्राधिकारयुक्त दीवानी न्यायालय में दायर कर सकता है जिसमें उसी प्रकार लागू किया जायेगा मानो वह उक्त न्यायालय की कोई डिक्री हो।
281. परिसमापक किसी सहकारी समिति के समापन की कार्यवाही में अपने द्वारा अभिलिखित साक्ष्य की एक संक्षिप्त और अपने द्वारा गृहीत लेख्यों की एक सूची रखेगा।
282. परिसमापक को किसी भी समय समिति के जो समापित की जा रही हो, सदस्य या सदस्यों अथवा अन्तिम प्रबन्ध कमेटी के या सामान्य निकाय के सदस्यों की बैठक अथवा ऋणदाताओं की बैठक या ऋणदाताओं या सदस्यों की संयुक्त बैठक बुलाने का अधिकार होगा। ऐसी बैठक ऐसी रीति से बुलाई जायेगी तथा आयोजित और संचालित की जायेगी जैसा कि परिसमापक उचित समझे।
283. परिसमापक ऐसी बहियां तथा लेखे रखेगा और निबन्घक को ऐसी नियमतकालिक विवरणियां प्रस्तुत करेगा जो निबन्धक द्वारा समय-समय पर नियत की जाये।
284. सभी दायित्वों का (जिसके अन्तर्गत अंश पूंजी भी है) भुगतान किये जाने के पश्चात् निबन्धक सहकारी समिति के समापन के आदेश के दिनांक को अंशधारियों द्वारा घृत अंशों पर उनको देय अंशों के, यदि कोई हो, सम्बन्ध में लाभांश के वितरण की अनुज्ञा दे सकता है।
285. परिसमापक कार्यवाहियों की समाप्ति पर, परिसमापक समिति के सामान्य निकाय के सदस्यों की एक बैठक बुलायेगा जिसमें परिसमापक अपनी कार्यवाहियों का संक्षिप्त ब्यौरा देगा जो समिति की असफलताओं के कारणों को इंगित करेगा और इस बात को बतायेगा कि समिति के सभी दायित्वों को पूरा करने के पश्चात् कि धनराशि यदि कोई हो, शेष है। उस शेष धनराशि के निस्तारण के सम्बन्ध में वह सभी सदस्यों की इच्छाओं को सुनिश्चित करेगा।
286. (क) किसी सहकारी समिति की समापन कार्यवाहियों समापन आदेश के प्रभावी होने के दिनांक से साधारणतया तीन वर्ष के भीतर समाप्त कर दी जायेगी, जब तक कि निबन्धक द्वारा वधि बढ़ाई न जाये।
प्रतिबन्ध यह है कि निबन्धक एक बार में एक वर्ष से अनधिक अवधि के लिये उक्त अवधि नहीं बढ़ायेगा और इस प्रकार बढ़ाई गई कुल अवधि राज्य सरकार के अनुमोदन के बिना चार वर्ष से अधिक न होगी।
(ख) ज्योंही समापन सम्बन्धी कार्यवाहियां पूरी हो जायें, निबन्धक सहकारी समिति का निबन्धन रद्द करने का आदेश देगा।
287. सहकारी समिति का निबन्धक रदद् किये जाने के दिनांक से तीन वर्ष की समाप्ति क पश्चात् समिति की बहियां तथा अभिलेख निबन्धक के पर्यवेक्षण में नष्ट किये जा सकते है।
288. यदि सहकारी समिति को धारा 72 के अधीन समाप्त किये जाने का आदेश दिया जाये और कोई भी परिसमापक नियुक्त न किया जाये तो उस समिति का/के, जिसे परिसमापित किया जाना हो अधिकारी आदेश की प्राप्ति से पन्द्रह दिन के भीतर बहियों तथा अभिलेखों को निबन्ध या इस प्रयोजन कि लिये उनके द्वारा प्राधिकृत किसी अन्य व्यक्ति के पास भेजेगा/भेजेंगे और शेष धनराशि को यदि कोई हो, इस क्षेत्र के केन्द्रीय सहकारी बैंक या शीर्ष सहकारी बैंक में जमा करेगा/करेंगे और इसकी सूचना निबन्धक को देगा/ देंगे।
289. निबन्धक उन समितियों जिनके निबन्ध रद्द किये गये हो, परिसमापकों या अधिकारी अथवा अधिकारियों से प्राप्त सभी अतिरेक धनराशि का, यदि कोई हो, लेखा रखेगा।
290. किसी सहकारी समिति की उप-विधियों या धारा 121 अथवा धारा 122 के अधीन बनाये गये विनियमों में से दी गयी किसी प्रतिकूल बात के होते भी किसी ऐसी सहकारी समिति के जिसे समापित किये जाने का आदेश दिया गया हो, सभी कर्मचारियों की सेवायें, समापन आदेश के अन्तिम होने के दिनांक से समाप्त हुई समझी जायेगी। परिसमापक ऐसी शर्तो और निबन्धनों पर और ऐसी अवधि के लिये जो वह उचित समझे निबन्धक के अनुमोदन के अधीन रहते हुए समिति के किसी कर्मचारी को पुनः नियुक्त कर सकता है।